क्या योग और पेल्विक फ्लोर एक्सरसाइज से बेहतर हो सकती है महिलाओं की फर्टिलिटी, डॉक्टर से जानें सही जानकारी स्वास्थ्य एक घंटा पहले 6
आजकल मां बनने की तैयारी कर रही महिलाएं अपनी जीवनशैली में योग और एक्सरसाइज को शामिल कर रही हैं, लेकिन क्या यह वाकई गर्भधारण में मददगार है? एक्सपर्ट्स से समझें इसके फायदे और वैज्ञानिक सच।

फर्टिलिटी और एक्सरसाइज का संबंध

वर्तमान समय में महिलाओं के स्वास्थ्य, विशेषकर फर्टिलिटी से जुड़ी चुनौतियां काफी अधिक देखी जा रही हैं। गर्भधारण की योजना बना रही बहुत सी महिलाएं अपनी डाइट के साथ-साथ योग और विभिन्न व्यायामों का सहारा लेती हैं। प्रश्न यह उठता है कि क्या वाकई ये शारीरिक गतिविधियां कंसीव करने की संभावना को बढ़ा सकती हैं? गुरुग्राम स्थित सेंटर फॉर इनफर्टिलिटी एंड असिस्टेड रिप्रोडक्शन यानी CIFAR की संस्थापक और निदेशक डॉक्टर पुनीत राणा अरोड़ा के अनुसार, महिला की फर्टिलिटी कई जटिल कारकों पर निर्भर करती है। इसमें ओव्यूलेशन की प्रक्रिया, हार्मोनल संतुलन, प्रजनन अंगों का स्वास्थ्य, महिला की आयु और सामान्य शारीरिक स्थिति जैसे बिंदु अहम भूमिका निभाते हैं। जहां तक योग और पेल्विक फ्लोर एक्सरसाइज का सवाल है, ये निश्चित रूप से सहायक हो सकते हैं। ये विशेष रूप से उस मानसिक तनाव को कम करने में मदद करते हैं जो अक्सर मां बनने की प्रक्रिया के दौरान महिलाओं को महसूस होता है।

गर्भधारण में योग की भूमिका

योग में शामिल हल्की फिजिकल एक्टिविटी, गहरी सांस लेने की तकनीक और रिलैक्सेशन के तरीके काफी प्रभावी हो सकते हैं। फर्टिलिटी से जुड़ी प्रक्रियाओं के दौर में जो मानसिक चिंता होती है, उसे कम करने में योग एक बड़ा आधार बनता है। इससे शरीर में लचीलापन आता है, मानसिक शांति मिलती है और नींद की गुणवत्ता भी सुधरती है। जब कोई महिला फर्टिलिटी ट्रीटमेंट ले रही होती है, तो तनाव को मैनेज करना उसे भावनात्मक रूप से स्थिर रखता है। हालांकि, यह स्पष्ट करना जरूरी है कि योग को प्रजनन हार्मोन को विनियमित करने या अंडे यानी एग की गुणवत्ता को सुधारने का कोई जादुई उपचार नहीं माना जा सकता है। इसे सीधे तौर पर गर्भधारण की संभावना बढ़ाने वाला तरीका नहीं कहा जा सकता है।

पेल्विक फ्लोर एक्सरसाइज के लाभ और सीमाएं

पेल्विक फ्लोर एक्सरसाइज मुख्य रूप से उन मांसपेशियों को मजबूती प्रदान करने का काम करती हैं, जो ब्लैडर, गर्भाशय और आंतों को आधार देती हैं। इन मांसपेशियों के स्वास्थ्य में सुधार होने से यूरिनरी इनकॉन्टिनेंस जैसी समस्याओं से राहत मिलती है। हालांकि, इन एक्सरसाइज के ढेरों फायदे होने के बावजूद, चिकित्सा विज्ञान में ऐसे पुख्ता प्रमाण नहीं हैं जो यह साबित करें कि ये ओव्यूलेशन को बढ़ाते हैं, एग की क्वालिटी बेहतर करते हैं या प्राकृतिक रूप से प्रेग्नेंट होने की संभावनाओं को बढ़ाते हैं। महत्वपूर्ण बात यह है कि इनका अभ्यास सही तरीके से किया जाए। यदि किसी महिला की पेल्विक मांसपेशियां पहले से ही अत्यधिक तनावपूर्ण या टाइट हैं, तो गलत तरीके से एक्सरसाइज करने पर समस्या और अधिक बढ़ सकती है।

कौन से योगासन हैं प्रभावी

शरीर को तनावमुक्त रखने और स्ट्रेचिंग के लिए बटरफ्लाई पोज़, कैट-काऊ पोज़, चाइल्ड्स पोज़ और सपोर्टेड बाउंड एंगल पोज़ जैसे योगासन उपयोगी माने जाते हैं। इसके अलावा मेडिटेशन और गहरी सांस लेना फर्टिलिटी से जुड़े स्ट्रेस को कम करता है। हमेशा उन आसनों को प्राथमिकता दें जो शरीर के लिए आरामदायक हों। जिन महिलाओं का फर्टिलिटी ट्रीटमेंट चल रहा है, उन्हें डॉक्टर की राय के बिना कोई भी भारी शारीरिक गतिविधि शुरू नहीं करनी चाहिए।

डॉक्टर से कब करें संपर्क

योग और एक्सरसाइज एक स्वस्थ जीवनशैली का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं, लेकिन ये इनफर्टिलिटी की हर समस्या का समाधान नहीं हो सकते। यदि आप 12 महीने तक कोशिश करने के बाद भी गर्भधारण नहीं कर पा रही हैं, या फिर यदि महिला की आयु 35 साल से अधिक है और 6 महीने की कोशिश के बाद भी परिणाम नहीं मिला है, तो तुरंत फर्टिलिटी विशेषज्ञ से परामर्श लेना अनिवार्य है।

डॉ. आलोक मिश्रा पाबना के स्वास्थ्य संवाददाता हैं और चिकित्सा, बीमारियों तथा वेलनेस से जुड़ी खबरों को प्रामाणिक तरीके से पाठकों तक पहुंचाते हैं। नई रिसर्च, इलाज और रोकथाम पर वे विशेषज्ञों के हवाले से सटीक जानकारी देते हैं। उनका जोर भरोसेमंद और जिम्मेदार स्वास्थ्य पत्रकारिता पर है।

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