बाइनेंस से 6.3 अरब डॉलर की डिजिटल चोरी में उत्तर कोरियाई हैकर्स पर FBI का शक, जानिए अब क्या कर रहे हैं हमलावर विश्व एक घंटा पहले 5
दुनिया के सबसे बड़े क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंज बाइनेंस में हुई 6.3 अरब डॉलर की महाचोरी के तार उत्तर कोरिया से जुड़ रहे हैं। अमेरिकी जांच एजेंसी एफबीआई के अनुसार, हैकर्स इस भारी रकम को इथेरियम में बदलकर अवैध रूप से ठिकाने लगाने में जुटे हैं।

दुनिया की सबसे बड़ी क्रिप्टो चोरी में FBI की बड़ी कार्रवाई

क्रिप्टोकरेंसी की दुनिया में अब तक की सबसे बड़ी चोरी के मामले में अमेरिकी जांच एजेंसी फेडरल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (FBI) ने बड़ा खुलासा किया है। दुनिया के सबसे बड़े क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंज बाइनेंस से 6.3 अरब डॉलर (लगभग 6.3 बिलियन डॉलर) की डिजिटल संपत्ति गायब होने के पीछे उत्तर कोरिया से जुड़े कुख्यात हैकर समूह का हाथ होने का शक जताया गया है। एफबीआई ने शनिवार को जारी अपने आधिकारिक बयान में बताया कि इस हफ्ते हुई इस भीषण साइबर घटना के तार ट्रेडर ट्रेटर नामक साइबर आपराधिक गिरोह से जुड़े हुए हैं।

जांच एजेंसी के अनुसार, इस डिजिटल डकैती को महज कुछ ही मिनटों के भीतर अंजाम दिया गया। यह वही साइबर हैकिंग ग्रुप है जिसने पिछले साल बायबिट नामक क्रिप्टो प्लेटफॉर्म पर हमला करके 1.5 अरब अमेरिकी डॉलर की भारी संपत्ति पर हाथ साफ किया था। एफबीआई का मानना है कि इस बार भी उसी रणनीति के तहत बाइनेंस को निशाना बनाया गया है।

चुराई गई रकम को ठिकाने लगाने का हैकर्स का नया पैंतरा

एफबीआई की शुरुआती जांच में सामने आया है कि हैकर्स चुराई गई विशाल डिजिटल धनराशि का स्रोत छिपाने के लिए एक सुनियोजित योजना पर काम कर रहे हैं। साइबर अपराधियों द्वारा चोरी की गई संपत्तियों को तेजी से इथेरियम नामक क्रिप्टोकरेंसी में बदला जा रहा है। जांचकर्ताओं को आशंका है कि हैकर अब इन संपत्तियों को विभिन्न विकेंद्रीकृत वित्त यानी डीफाई (DeFi) मंचों और इंस्टेंट स्वैप सर्विसेज के माध्यम से दूसरी अन्य क्रिप्टोकरेंसी में स्थानांतरित करने का प्रयास करेंगे ताकि कानून प्रवर्तन एजेंसियों की पकड़ से बचा जा सके।

इस स्थिति की गंभीरता को देखते हुए एफबीआई ने वैश्विक क्रिप्टो एक्सचेंजों, ब्लॉकचेन विश्लेषण करने वाली कंपनियों और वित्तीय सेवा प्रदाताओं से विशेष अपील की है। एजेंसी ने आग्रह किया है कि उत्तर कोरियाई हैकर्स से जुड़े संदिग्ध डिजिटल वॉलेट पतों से होने वाले सभी लेन-देन को तुरंत प्रभाव से रोका जाए, ताकि इस अवैध धन की आवाजाही पर नकेल कसी जा सके।

राष्ट्रपति ट्रंप ने जताई अनिश्चितता, कहा जांच जारी

एक तरफ जहां एफबीआई उत्तर कोरियाई हैकर्स पर शक जता रही है, वहीं दूसरी तरफ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस मामले में फिलहाल संयमित रुख अपनाया है। शनिवार रात फ्लोरिडा स्थित अपने मार-ए-लागो आवास में आयोजित हैलोवीन कार्यक्रम के दौरान पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने इस हमले में उत्तर कोरिया की सीधी संलिप्तता पर सवाल उठाए।

पत्रकारों द्वारा पूछे गए सवालों का जवाब देते हुए राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा, "मैं चिंतित नहीं हूं। हम इस बारे में जानकारी जुटा रहे हैं। हमें नहीं पता कि इसमें उत्तर कोरिया शामिल है या नहीं।" हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि आगे की जांच प्रक्रिया में इस बात की पुष्टि हो सकती है।

विशेषज्ञों की चेतावनी: महीनों तक चल सकती है लॉन्ड्रिंग प्रक्रिया

क्रिप्टोकरेंसी के जाने-माने विशेषज्ञ एरी रेडबोर्ड ने इस चोरी के बाद की परिस्थितियों का विश्लेषण करते हुए चेतावनी जारी की है। उनका मानना है कि इतनी बड़ी रकम को एक बार में कैश कराना या ट्रांसफर करना हैकर्स के लिए संभव नहीं होगा। इसलिए, हैकर चुराई गई डिजिटल मुद्राओं को छोटे-छोटे हिस्सों में विभाजित कर सकते हैं।

एरी रेडबोर्ड के अनुसार, जांच एजेंसियों और वैश्विक निगरानी तंत्र की नजरों से बचने के लिए ये साइबर अपराधी कम लोकप्रिय या छोटे क्रिप्टो एक्सचेंज का सहारा लेंगे। इस पूरी मनी लॉन्ड्रिंग प्रक्रिया में कई महीनों का समय लग सकता है।

बृहस्पतिवार को हुआ था क्रिप्टो इतिहास का सबसे बड़ा हमला

गौरतलब है कि बृहस्पतिवार को दुनिया के सबसे प्रमुख क्रिप्टोकरेंसी प्लेटफॉर्म बाइनेंस से बिटकॉइन समेत कई अन्य प्रमुख डिजिटल मुद्राओं के रूप में कुल 6.3 अरब अमेरिकी डॉलर की भारी-भरकम राशि चुरा ली गई थी। घटना के तुरंत बाद से ही दुनिया भर के क्रिप्टो विशेषज्ञ इस बात के संकेत दे रहे थे कि इस उच्चस्तरीय साइबर हमले के पीछे उत्तर कोरियाई हैकर्स का हाथ हो सकता है। अब एफबीआई के बयान ने इन आशंकाओं को और अधिक मजबूती दे दी है।

करण मल्होत्रा पाबना के अंतरराष्ट्रीय संवाददाता हैं, जो अमेरिका, यूरोप और एशिया की खबरें रिपोर्ट करते हैं। वैश्विक राजनीति, अर्थव्यवस्था और बड़े अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर वे नजर रखते हैं। उनकी रिपोर्ट्स दुनिया की हलचल को पाठकों तक तेजी से पहुंचाती हैं।

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