लाखों की नौकरी छोड़ अपने जुनून को बनाया पहचान, सतना के शैलेंद्र गौतम की आवाज के कायल हुए दुनिया भर के लोग मध्य प्रदेश एक घंटा पहले 6
मध्य प्रदेश के सतना निवासी शैलेंद्र गौतम ने आईटी क्षेत्र में ऊंचे पैकेज वाली नौकरी को अलविदा कहकर अपनी रचनात्मकता और आवाज के जादू से एक अलग मुकाम हासिल किया है। आज उनकी आवाज सोशल मीडिया और मंचों पर लाखों लोगों को मंत्रमुग्ध कर रही है।

कॉरपोरेट लाइफ को अलविदा

आज के दौर में एक स्थिर और अच्छी सैलरी वाली नौकरी को छोड़ना किसी बड़े जोखिम से कम नहीं माना जाता है, लेकिन कुछ लोग ऐसे होते हैं जो अपनी अंतरात्मा की आवाज को सुनकर करियर की दिशा बदल देते हैं। मध्य प्रदेश के सतना के रहने वाले शैलेंद्र गौतम की कहानी कुछ ऐसी ही प्रेरणादायी है। कभी एक आईटी कंपनी में मोटी सैलरी वाले पैकेज पर काम करने वाले शैलेंद्र ने अपनी सुरक्षित नौकरी से इस्तीफा देकर उस काम को अपना करियर बनाया, जिसके लिए उनका दिल हमेशा से धड़कता था। आज उनकी दमदार आवाज, शब्दों के चयन और उनके अनोखे प्रस्तुतिकरण के लाखों प्रशंसक हैं, जो न केवल भारत बल्कि विदेशों में भी फैले हुए हैं।

शिक्षा और करियर की शुरुआत

शैलेंद्र गौतम का शुरुआती जीवन सतना के सरस्वती विद्यापीठ में बीता। स्कूल और कॉलेज के दिनों से ही उन्हें मंचों पर अपनी बात रखने और रचनात्मक गतिविधियों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने का शौक था। अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने आईटी सेक्टर में प्रवेश किया और वहां एक अच्छा मुकाम भी हासिल किया। हालांकि, उन्हें लगातार यह महसूस हो रहा था कि उनका मन किसी और चीज के लिए बना है। उन्हें राजनीतिक मुद्दों पर कलम चलाना, कविताएं लिखना और अपने विचारों को जन-जन तक पहुंचाना अधिक पसंद था। यही वह मोड़ था जब उन्होंने अपनी अच्छी खासी नौकरी को छोड़ने का साहसी फैसला लिया।

राजनीतिक सलाहकार के रूप में पहचान

शैलेंद्र गौतम ने अपने जुनून को हकीकत में बदलने के लिए साल 2013 में दिल्ली का रुख किया। उस दौरान दिल्ली की राजनीति में डॉ. हर्षवर्धन और अरविंद केजरीवाल के बीच कड़ा मुकाबला चल रहा था। उन्होंने वहां चुनाव से जुड़े कंट्रोल वॉर रूम की जिम्मेदारी संभाली और राजनीतिक सलाहकार के तौर पर अपनी पहचान बनाई। इस अनुभव का विस्तार करते हुए उन्होंने शरद पवार की एनसीपी पार्टी के लिए करीब डेढ़ साल तक मीडिया और राजनीतिक कंसल्टेंसी का काम भी किया। इन अनुभवों ने उन्हें राजनीति को बारीकी से समझने और उसे लोगों के सामने अपनी भाषा में प्रस्तुत करने का हुनर सिखाया।

सोशल मीडिया पर गूंजती आवाज

शैलेंद्र की प्रतिभा केवल पर्दे के पीछे के परामर्श तक ही सीमित नहीं रही। उन्होंने सामाजिक मुद्दों, राजनीतिक घटनाओं और गंभीर विषयों को कविता और व्यंग्य के माध्यम से लोगों तक पहुंचाना शुरू किया। उनके कहने का अंदाज बिल्कुल अलग और प्रभावी है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर उनके द्वारा प्रस्तुत राजनीतिक व्यंग्य बेहद लोकप्रिय हैं और उनके वीडियो को अक्सर मिलियंस में व्यूज मिलते हैं। टीवी डिबेट्स में भी उन्हें अक्सर समसामयिक मुद्दों और राजनीति पर अपनी राय रखने के लिए आमंत्रित किया जाता है। धीरे-धीरे लोगों ने उनके शब्दों के साथ-साथ उनकी आवाज को भी पसंद करना शुरू कर दिया, जो अब उनकी सबसे बड़ी पहचान बन गई है।

कला और व्यवसाय का अनूठा तालमेल

शैलेंद्र गौतम के काम का दायरा काफी विस्तृत है। वे धर्म, जियो पॉलिटिक्स, साहित्य और वैश्विक राजनीति जैसे विषयों पर अपने विचार रखते हैं। आज के समय में फेसबुक, यूट्यूब और एक्स जैसे मंचों को मिलाकर रोजाना करीब 7 से 9 लाख लोग उनकी आवाज सुनते हैं। उनके प्रति लोगों का प्रेम इतना अधिक है कि उनके प्रशंसक समय-समय पर उन्हें खास तोहफे भी भेजते रहते हैं। खास बात यह है कि कला के साथ-साथ वे व्यावसायिक सूझबूझ भी रखते हैं। सतना के ट्रांसपोर्ट नगर में उनकी तीन दुकानें हैं, जिन्हें उन्होंने किराये पर दिया हुआ है। इस तरह वे मंच और सोशल मीडिया के अलावा व्यवसाय के क्षेत्र में भी सक्रिय हैं।

सतना से वैश्विक स्तर तक का सफर

आज शैलेंद्र गौतम वापस अपने गृहनगर सतना में रहकर ही अपना काम पूरी ऊर्जा के साथ कर रहे हैं। उनके लिए सबसे बड़ी खुशी यह है कि वे अपने जन्मस्थान पर रहकर अपने पसंदीदा काम को नई ऊंचाइयों पर ले जा रहे हैं। उनका सफर आईटी कंपनी से शुरू होकर दिल्ली की चुनावी राजनीति और फिर सोशल मीडिया के बड़े मंचों तक पहुंचा, लेकिन उन्होंने अंततः उसी काम को चुना जो उन्हें खुशी देता है। शैलेंद्र गौतम की यह जीवन यात्रा उन युवाओं के लिए एक मिसाल है जो अच्छी नौकरी के बावजूद अपने मनपसंद काम में भविष्य तलाशना चाहते हैं। उन्होंने यह साबित कर दिया है कि यदि आपके पास सही जुनून और मेहनत करने का साहस है, तो सफलता निश्चित रूप से आपके कदम चूमती है। आज जिस आवाज को सुनने के लिए दुनिया भर में लोग आतुर रहते हैं, उस पहचान को बनाने के लिए उन्होंने अपनी सुखद नौकरी छोड़ने का जो जोखिम उठाया था, वह आज सार्थक हो गया है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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