मॉनसून के बुखार के बाद शरीर की थकान और कमजोरी दूर करने के 5 प्रभावी उपाय स्वास्थ्य एक घंटा पहले 4
बरसात के मौसम में होने वाली बीमारियों से ठीक होने के बाद भी कई लोग थकान और कमजोरी महसूस करते हैं। विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार, सही पोषण और आराम से आप अपनी ऊर्जा को वापस हासिल कर सकते हैं।

मॉनसून के बाद शरीर की सुस्ती से ऐसे पाएं निजात

हर साल बरसात के दौरान डेंगू, चिकनगुनिया, टाइफाइड और वायरल बुखार जैसे संक्रमणों के मामले तेजी से बढ़ते हैं। राहत की बात यह है कि इन बीमारियों से पीड़ित अधिकांश लोग इलाज के बाद बुखार से तो उबर जाते हैं, लेकिन उनके शरीर में बनी रहने वाली लंबे समय तक की कमजोरी चिंता का विषय बन जाती है। बीमारी के बाद शरीर में ऊर्जा की भारी कमी महसूस होती है। इस समस्या के समाधान के लिए डॉ. जे. कीर्तना, जो फोर्टिस अस्पताल, शालीमार बाग में संक्रामक रोग विभाग में एसोसिएट कंसल्टेंट हैं, ने रिकवरी के लिए 5 बेहद प्रभावी सुझाव साझा किए हैं।

पोस्ट इंफेक्शियस फैटीग क्या है?

चिकित्सा की भाषा में बीमारी के बाद होने वाली इस लगातार थकान को पोस्ट इंफेक्शियस फैटीग कहा जाता है। मॉनसून के दौरान फैलने वाली बीमारियों के बाद मरीजों में इसके लक्षण अक्सर देखे जाते हैं। कई मामलों में देखा गया है कि संक्रमण पूरी तरह ठीक हो जाने के बाद भी व्यक्ति हफ्तों या कभी-कभी महीनों तक शारीरिक थकान, मानसिक सुस्ती और एकाग्रता में कमी का अनुभव करता है।

थकान के पीछे के वैज्ञानिक कारण

अब विशेषज्ञों का मानना है कि यह स्थिति केवल थकान नहीं है, बल्कि यह संक्रमण फैलाने वाले कारकों और मानव शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली के बीच हुई जंग का परिणाम है। हर व्यक्ति का शरीर अलग तरह से प्रतिक्रिया करता है। इसका एक बड़ा कारण जेनेटिक या आनुवंशिक प्रभाव भी हो सकता है। आपको अपने माता-पिता से किस तरह के जीन मिले हैं, यह तय करता है कि किसी बीमारी के प्रति आपका शरीर कितना संवेदनशील होगा।

बीमारी से ठीक होने और ब्लड रिपोर्ट के नॉर्मल आने का मतलब यह नहीं है कि शरीर पूरी तरह रिकवर हो चुका है। मांसपेशियों में दर्द और कमजोरी महसूस होना सामान्य है क्योंकि इसके पीछे दो प्रमुख कारण हैं:

  • प्रतिरक्षा प्रणाली का आफ्टरशॉक: बुखार कम होने के बावजूद आपकी इम्यूनिटी तुरंत शांत नहीं होती है। वह संक्रमण के सूक्ष्म निशानों को खत्म करने और अंदरूनी अंगों की मरम्मत करने में जुटी रहती है। कई बार यह सक्रिय प्रतिरक्षा प्रणाली शरीर के स्वस्थ टिशू को भी प्रभावित करती है, जिससे रिकवरी धीमी हो जाती है।
  • ऊर्जा भंडारों में कमी: बीमारी के दौरान भूख कम होने से शरीर के पोषक तत्व और ऊर्जा का भंडार खाली हो जाता है, जिसे दोबारा भरने में समय लगता है।

रिकवरी के लिए अपनाएं ये 5 टिप्स

अपनी खोई हुई ऊर्जा को वापस पाने और रिकवरी में तेजी लाने के लिए इन बातों का ध्यान रखें:

  • संतुलित आहार: पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं और पोषण से भरपूर भोजन लें। किसी भी तरह के कृत्रिम सप्लीमेंट की तुलना में प्रोटीन, ताजे फल और हरी सब्जियां शरीर को जल्दी ठीक करने में ज्यादा कारगर होती हैं।
  • धैर्य रखें: ठीक होने की प्रक्रिया में समय लगता है। आम तौर पर रिकवरी में 2 से 4 सप्ताह का समय लग सकता है। अगर आप बुजुर्ग हैं या पहले से किसी पुरानी बीमारी से जूझ रहे हैं, तो यह अवधि और भी लंबी हो सकती है।
  • पर्याप्त आराम: अपने शरीर को रिकवर करने के लिए भरपूर नींद लें।
  • धीरे-धीरे शारीरिक गतिविधि शुरू करें: अचानक भारी काम करने के बजाय हल्के व्यायाम या पैदल चलने से शुरुआत करें।
  • तनाव से बचें: मानसिक स्वास्थ्य का सीधा असर शारीरिक रिकवरी पर पड़ता है, इसलिए रिकवरी के दौरान मन को शांत रखें।
डॉ. आलोक मिश्रा पाबना के स्वास्थ्य संवाददाता हैं और चिकित्सा, बीमारियों तथा वेलनेस से जुड़ी खबरों को प्रामाणिक तरीके से पाठकों तक पहुंचाते हैं। नई रिसर्च, इलाज और रोकथाम पर वे विशेषज्ञों के हवाले से सटीक जानकारी देते हैं। उनका जोर भरोसेमंद और जिम्मेदार स्वास्थ्य पत्रकारिता पर है।

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