29 अगस्त 2026 पंचांग: शनिवार को मनाया जाएगा अशून्य शयन व्रत, जानें पूजा का महत्व और राहुकाल की जानकारी धर्म 4 घंटे पहले 6
आचार्य इंदु प्रकाश के अनुसार 29 अगस्त 2026 को भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि है और इस दिन विशेष रूप से अशून्य शयन व्रत का आयोजन किया जाएगा।

29 अगस्त 2026 का पंचांग

हिन्दू कैलेंडर के अनुसार 29 अगस्त 2026, दिन शनिवार को भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि है। इस दिन का विशेष धार्मिक महत्व है क्योंकि शनिवार को अशून्य शयन व्रत का पालन किया जाएगा। ऐसी मान्यता है कि वैवाहिक जीवन में सुख, शांति और सामंजस्य बनाए रखने के लिए पति इस व्रत को विशेष रूप से रखते हैं। इसके अतिरिक्त, इस दिन धृति योग का संयोग रहेगा और पूर्वा भाद्रपद नक्षत्र का प्रभाव रहेगा। आइए जानते हैं आचार्य इंदु प्रकाश से इस तिथि का विस्तृत पंचांग, शुभ मुहूर्त और राहुकाल का समय।

29 अगस्त 2026 की तिथियां और नक्षत्र

  • भाद्रपद कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि: 29 अगस्त 2026 को सुबह 9 बजकर 57 मिनट तक प्रभावी रहेगी।
  • धृति योग: यह योग 29 अगस्त 2026 को पूरे दिन और पूरी रात पार करते हुए कल सुबह 5 बजकर 22 मिनट तक बना रहेगा।
  • पूर्वा भाद्रपद नक्षत्र: यह नक्षत्र 29 अगस्त 2026 को देर रात 3 बजकर 43 मिनट तक रहेगा।
  • विशेष आयोजन: 29 अगस्त 2026 को अशून्य शयन व्रत का महत्व है।

28 अगस्त 2026 का शुभ समय

दिन की शुरुआत में शुभ कार्यों के लिए निम्नलिखित समय निर्धारित किए गए हैं:

  • ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04:51 से 05:37 तक।
  • प्रातः सन्ध्या: सुबह 05:14 से 06:23 तक।
  • अभिजित मुहूर्त: दोपहर 12:14 से 01:04 तक।
  • विजय मुहूर्त: दोपहर 02:45 से 03:35 तक।
  • गोधूलि मुहूर्त: शाम 06:56 से 07:19 तक।
  • सायाह्न सन्ध्या: शाम 06:56 से रात 08:05 तक।
  • अमृत काल: शाम 07:32 से रात 09:10 तक।

विभिन्न शहरों में राहुकाल का समय

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार राहुकाल के दौरान किसी भी मांगलिक या नए कार्य को शुरू करने से बचना चाहिए। 28 अगस्त 2026 के लिए विभिन्न शहरों में राहुकाल का समय इस प्रकार है:

  • दिल्ली: सुबह 09:10 से 10:46 तक
  • मुंबई: सुबह 09:31 से दोपहर 11:05 तक
  • चंडीगढ़: सुबह 09:10 से 10:47 तक
  • लखनऊ: सुबह 08:56 से 10:31 तक
  • भोपाल: सुबह 09:11 से 10:46 तक
  • कोलकाता: सुबह 08:28 से 10:03 तक
  • अहमदाबाद: सुबह 09:30 से दोपहर 11:05 तक
  • चेन्नई: सुबह 09:04 से 10:37 तक

अशून्य शयन व्रत का महत्व

अशून्य शयन द्वितीया व्रत का विधान चातुर्मास के दौरान प्रत्येक महीने के कृष्ण पक्ष की द्वितीया तिथि को किया जाता है। व्रत के नियम के अनुसार, द्वितीया तिथि में रात को चंद्रोदय के समय चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत का पारण किया जाता है। द्वितीया तिथि आज सुबह 9 बजकर 58 मिनट पर प्रारंभ हो जाएगी और कल सुबह 9 बजकर 38 मिनट तक रहेगी। क्योंकि आज ही द्वितीया तिथि में चंद्रोदय होगा, इसलिए यह व्रत आज किया जाएगा। इस व्रत का शाब्दिक अर्थ है बिस्तर पर अकेले न सोना। जैसे स्त्रियां करवाचौथ का व्रत रखती हैं, वैसे ही पतियों को अपनी पत्नी की लंबी आयु की कामना के लिए यह व्रत करना चाहिए। यह व्रत पति-पत्नी के संबंधों में मिठास और मजबूती लाने के लिए अत्यंत लाभकारी माना गया है। इस दिन भगवान श्री हरि विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा की जाती है और विष्णु जी की आरती करना अनिवार्य माना गया है। चातुर्मास में भगवान विष्णु के शयनकाल के दौरान इस व्रत के माध्यम से शयन उत्सव मनाया जाता है। अतः सभी गृहस्थ पुरुषों को भक्ति भाव से यह व्रत संपन्न करना चाहिए।

प्रिया नायर पाबना की लाइफस्टाइल एवं फैशन एडिटर हैं, जो फैशन, ब्यूटी और लाइफस्टाइल ट्रेंड्स कवर करती हैं। रिश्तों, संस्कृति और रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़े विषयों पर भी वे लिखती हैं। उनका लेखन आधुनिक और भारतीय जीवनशैली का संतुलन पेश करता है।

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