सहजन की खेती से मालामाल होंगे किसान, केंद्रीय संस्थान बांट रहा है 1000 पौधे मुफ्त राजस्थान एक महीने पहले 73
केंद्रीय शुष्क क्षेत्र अनुसंधान संस्थान किसानों को सहजन के 1000 पौधे मुफ्त में देने जा रहा है। इस पहल का लक्ष्य कम पानी में अधिक मुनाफा देने वाली खेती को प्रोत्साहित करना है।

सहजन की खेती और किसानों के लिए सुनहरा मौका

सहजन, जिसे मोरिंगा या ड्रमस्टिक भी कहा जाता है, अपने औषधीय गुणों और उच्च पोषक तत्वों के कारण एक विशेष पहचान रखता है। इसके फल, बीज और पत्तियों का उपयोग न केवल खानपान में किया जाता है, बल्कि आयुर्वेद में भी इसे एक महत्वपूर्ण औषधि माना गया है। अब केंद्रीय शुष्क क्षेत्र अनुसंधान संस्थान, जिसे संक्षिप्त में काजरी के नाम से जाना जाता है, किसानों की आय बढ़ाने और उन्हें एक नई दिशा देने के लिए एक विशेष अभियान चला रहा है।

मुफ्त पौधे पाने का अवसर

संस्थान द्वारा शुरू की गई इस योजना के तहत किसानों को सहजन के 1000 पौधे मुफ्त में वितरित किए जाएंगे। इस पहल का मुख्य उद्देश्य किसानों को ऐसी फसल उगाने के लिए प्रेरित करना है जो व्यावसायिक दृष्टि से बेहद फायदेमंद है। सहजन की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह बहुत कम पानी की उपलब्धता में भी आसानी से पनप सकता है, जो शुष्क क्षेत्रों में रहने वाले किसानों के लिए एक बड़ा लाभ है।

बाजार में बढ़ती मांग और वैज्ञानिक दृष्टिकोण

वर्तमान समय में बाजार में सहजन की मांग लगातार बनी रहती है, जिससे किसानों को अपनी उपज का अच्छा दाम मिल सकता है। खेती के पारंपरिक तरीकों के अलावा सहजन को एक व्यावसायिक विकल्प के रूप में देखना किसानों की किस्मत बदल सकता है। हालांकि, स्वास्थ्य संबंधी दावों को लेकर सावधानी बरतनी जरूरी है। विशेषज्ञों का स्पष्ट कहना है कि बाजार में मौजूद उन दावों के लिए पर्याप्त वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं, जिनमें सहजन को 300 से अधिक बीमारियों का इलाज बताया जाता है। किसान इसे एक पौष्टिक और नकदी फसल के रूप में देखें, न कि किसी चमत्कारिक औषधि के रूप में।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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