राजस्थान
एक घंटा पहले
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शाही इतिहास की गवाह है यह गली
राजस्थान के भरतपुर शहर में एक ऐसी जगह है जिसका नाम सुनकर आज भी लोग चकित रह जाते हैं। सरकारी रिकॉर्ड और स्थानीय लोगों की जुबान पर इस जगह का नाम चीते वाली गली के रूप में दर्ज है। यह कोई साधारण गली नहीं है, बल्कि अपने भीतर राजघराने के उस सुनहरे दौर की कहानियों को समेटे हुए है जब यहां घरों के बाहर चीते और शेर बंधे होते थे।
चीते पालने वाले परिवार की अनूठी विरासत
इस गली के नाम के पीछे का कारण यहां रहने वाला एक खास परिवार है। सुल्तान खान बताते हैं कि उनके दादा और पिता भरतपुर राजपरिवार के लिए चीते और शेर पालने का काम करते थे। इसी वजह से इस क्षेत्र को चीते वाली गली कहा जाने लगा। सुल्तान खान के अनुसार, उन्होंने अपने बचपन में खुद अपनी आंखों से घर के बाहर इन खतरनाक जानवरों को रस्सी से बंधे हुए देखा है। उनका कहना है कि वे बचपन में अक्सर इन चीतों को रबड़ी भी खिलाया करते थे। इन जानवरों को बहुत ही सावधानी से प्रशिक्षित किया जाता था, जिसके कारण वे आम लोगों या घर के सदस्यों को नुकसान नहीं पहुंचाते थे।
महाराजा किशन सिंह के साथ शिकार का सफर
सुल्तान खान ने पुरानी यादों को साझा करते हुए बताया कि उनके पूर्वज सिर्फ जानवरों की देखभाल ही नहीं करते थे, बल्कि भरतपुर के महाराजा किशन सिंह के साथ शिकार अभियानों पर भी जाते थे। जब जंगल से इन चीतों को लाया जाता था, तब उनका स्वभाव काफी आक्रामक होता था, लेकिन धीरे-धीरे उन्हें इंसानी समाज में रहने का आदी बना दिया जाता था। परिवार के सदस्य अक्सर इन चीतों को लेकर बाजारों में भी निकलते थे, जो उस समय लोगों के लिए बड़े आकर्षण का केंद्र होता था।
बीते दौर की यादें
समय के साथ राजशाही का युग बीत गया और जंगली जानवरों को पालने की वह पुरानी परंपरा भी खत्म हो गई। आज भले ही वहां चीतों की दहाड़ सुनाई नहीं देती, लेकिन चीते वाली गली का नाम आज भी लोगों को उस शाही इतिहास की याद दिलाता है। यह गली आज भी भरतपुर के गौरवशाली अतीत का एक अनूठा प्रतीक बनी हुई है।
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