उपनाम: पौधारोपण
Donkey Leaf: पत्ता मिट्टी में डालें और उग आएगा नया पौधा, मात्र ₹20 में हो सकती है अच्छी कमाई
पटना के Naresh Agarwal ने अपनी छत पर Donkey Leaf नाम का एक ऐसा पौधा लगाया है जिसके पत्तों से खुद-ब-खुद नए पौधे निकल आते हैं। वे इन्हें मात्र ₹20 प्रति पौधे में बेचते हैं और उस कमाई से पटना की सड़कों पर पेड़ लगाते हैं।
बालोद में स्व-सहायता समूह की महिलाएं बीज उपचार से तैयार कर रहीं पौधे, जानें नारियल से लेकर पपीता तक के दाम
छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में धरा क्लस्टर संगठन लाटाबोड़ से जुड़ी महिलाएं बीज उपचार कर विभिन्न प्रजातियों के पौधे तैयार कर रही हैं, जिन्हें बेचकर वे अतिरिक्त आय अर्जित करेंगी। नारियल, कटहल और मुनगा जैसे बड़े पौधे 200 रुपये में और नीम, इमली, पपीता व आम 50 रु...
सरहद के इस माड़साहब ने बदली धरती की रंगत, पहली तनख्वाह से बोई थी हरियाली की नींव
बाड़मेर के शिक्षक भैराराम भाखर बीते 26 वर्षों से पर्यावरण संरक्षण को मिशन बनाकर जुटे हैं और अब तक करीब 4.65 लाख पौधे लगा चुके हैं। पहली सरकारी तनख्वाह से शुरू हुआ उनका यह सफर हर परिवार को प्रकृति से जोड़ने के संकल्प तक पहुंच गया है।
गया की निराली 'मंथन वाटिका': हर पौधे पर दर्ज है किसी IAS अधिकारी का नाम, जानें वजह
गया के हदहदवा पहाड़ी की तलहटी में बिपार्ड द्वारा विकसित मंथन वाटिका में करीब 200 पौधे लगाए गए हैं, जिनमें से लगभग हर पौधे के साथ किसी न किसी IAS अधिकारी का नाम जुड़ा है। कभी बंजर रही यह जमीन अब हरियाली से भर गई है।
नागौर का बेटा बना पर्यावरण का संदेशवाहक: 27 राज्य, 6 केंद्र शासित प्रदेश और 42 हजार किमी की साइकिल यात्रा
नागौर के कुड़छी गांव निवासी 26 वर्षीय पप्पू राम चौधरी अप्रैल 2023 से साइकिल पर देश का भ्रमण कर रहे हैं और अब तक 42 हजार किलोमीटर का सफर तय कर चुके हैं। पर्यावरण संरक्षण, नशामुक्ति और फिटनेस का संदेश लेकर निकले पप्पू राम अब अपनी यात्रा के अंतिम पड़ाव अरुणा...
World Environment Day: मिठाई की दुकान छोड़ी, साइकिल थामी और निकल पड़े पर्यावरण की मुहिम पर — आज देश-दुनिया में हो रही चर्चा
बाड़मेर के नरपतसिंह राजपुरोहित ने मिठाई की दुकान का काम छोड़कर साइकिल से देशभर में पर्यावरण जागरूकता फैलाई और ढाई लाख पौधे लगाए. उनका नाम इंडिया बुक, एशिया बुक और गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में दर्ज है.
कैंसर को मात देकर हरियाली से जुड़े कोडरमा के 71 वर्षीय शिक्षाविद्, कबाड़ से सजाया 'मीनाक्षी गार्डन'
कोडरमा के झुमरी तिलैया निवासी डॉ. अरुण मिश्रा ने बेकार वस्तुओं से एक खूबसूरत मीनाक्षी गार्डन तैयार किया है. कैंसर की चौथी स्टेज से उबर चुके इस शिक्षाविद् के लिए बगीचे की हरियाली किसी थेरेपी से कम नहीं रही.
मेरठ की ईहा दीक्षित को 'ग्रीन गर्ल' क्यों कहते हैं लोग, पीएम मोदी भी हैं इनके मुरीद
मेरठ की ईहा दीक्षित साढ़े चार साल की उम्र से लगातार पौधारोपण कर रही हैं और उनके लगाए पौधे अब विशाल पेड़ों का रूप ले चुके हैं। इस लगन के लिए उन्हें कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार मिल चुके हैं।