छत्तीसगढ़
4 घंटे पहले
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विचारों
पारंपरिक हुनर बना रोजगार का जरिया
छत्तीसगढ़ के बालोद जिले स्थित कोहंगाटोला गांव की महिलाएं आज अपने हुनर के दम पर आर्थिक रूप से स्वतंत्र होने की मिसाल पेश कर रही हैं। गायत्री साहू और उनके महिला समूह ने घर के कामों के साथ-साथ पारंपरिक व्यंजनों को व्यावसायिक रूप देकर एक नई शुरुआत की है। ये महिलाएं बाजार में मिलने वाले आधुनिक और प्रोसेस्ड स्नैक्स के मुकाबले अपने घर के बने शुद्ध और देसी स्वाद वाले उत्पादों को बढ़ावा दे रही हैं, जिन्हें स्थानीय लोग काफी पसंद कर रहे हैं। इस काम की सबसे बड़ी खूबी यह है कि इसमें किसी भारी-भरकम मशीन या निवेश की जरूरत नहीं पड़ती, बल्कि घर में मौजूद सामान्य सामग्री से ही सब कुछ तैयार किया जाता है।
साबूदाना पापड़ से लेकर बड़ी तक, 11 तरह के व्यंजन
गायत्री साहू के अनुसार, उनका समूह पिछले करीब तीन महीने से निरंतर इन उत्पादों का निर्माण कर रहा है। उनकी उत्पादन सूची में लगभग 11 प्रकार के देसी व्यंजन शामिल हैं। इनमें से कुछ प्रमुख उत्पाद इस प्रकार हैं:
- साबूदाना पापड़
- देसी दाल बड़ी
- सूजी के चिप्स
- आलू के चिप्स
- चावल के मुरकु
- चावल के पापड़
इन सभी चीजों को बनाने की विधि गायत्री ने अपनी माताजी से सीखी है। बचपन में जो व्यंजन केवल परिवार के लिए बनाए जाते थे, आज वे उनकी आय का मुख्य स्रोत बन गए हैं।
किफायती दाम और आसान उत्पादन प्रक्रिया
इस समूह ने अपने उत्पादों की कीमतें काफी किफायती रखी हैं ताकि वे आम लोगों की पहुंच में रहें। उनके उत्पादों का मूल्य निर्धारण कुछ इस प्रकार है:
- 200 ग्राम देसी दाल बड़ी: 60 रुपये
- चावल का पापड़: 1 रुपये प्रति नग
- चावल का मुरकु: 30 रुपये प्रति पैकेट
गायत्री बताती हैं कि इन व्यंजनों को बनाने में समय भी बहुत कम लगता है। वे केवल एक घंटे के भीतर कई प्रकार की सामग्री तैयार कर लेती हैं, जिससे उत्पादन क्षमता बढ़ जाती है और कम समय में अधिक उत्पाद बाजार में उपलब्ध हो पाते हैं।
आत्मनिर्भरता और बढ़ता आत्मविश्वास
इस छोटे से स्टार्टअप के बारे में बात करते हुए गायत्री ने साझा किया कि शुरुआत में उन्होंने जो भी मामूली निवेश किया था, वह अब उत्पाद बिक्री के जरिए वापस मिल चुका है। यानी शुरुआती लागत पूरी तरह से वसूल हो चुकी है और अब होने वाली बिक्री से उन्हें शुद्ध लाभ मिल रहा है। यह अतिरिक्त कमाई महिलाओं में न केवल आत्मविश्वास पैदा कर रही है, बल्कि उन्हें और अधिक काम करने के लिए प्रेरित भी कर रही है। महिलाओं का मानना है कि आज के दौर में जब हर तरफ आधुनिक और मशीनी खाद्य पदार्थ भरे पड़े हैं, लोग शुद्ध और घर के बने स्वाद की ओर वापस लौट रहे हैं।
स्थानीय स्तर पर मिल रहा जबरदस्त प्रोत्साहन
इन महिलाओं को स्थानीय ग्राहकों से काफी प्रोत्साहन मिल रहा है। कोहंगाटोला और आसपास के क्षेत्रों में बड़ी, पापड़ और चावल के स्नैक्स की मांग निरंतर बनी हुई है। बाजार में मिलने वाले पैकेट बंद आधुनिक स्नैक्स की तुलना में लोग इन पारंपरिक खाद्य पदार्थों को अधिक सुरक्षित और स्वादिष्ट मान रहे हैं। महिलाओं का कहना है कि वे इस काम को आगे भी जारी रखेंगी क्योंकि यह उनके पारंपरिक हुनर को भी जिंदा रखता है और उन्हें आर्थिक रूप से सक्षम बनाता है। यह प्रयास आज बालोद जिले की अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन गया है।
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