डोनाल्ड ट्रंप का बड़ा कदम: किम जोंग उन को बताया अच्छा दोस्त, दक्षिण कोरिया के सैन्य अभ्यास पर कैंची विश्व 4 घंटे पहले 11
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग उन के साथ अपने बेहतर संबंधों का हवाला देते हुए दक्षिण कोरिया के साथ होने वाले संयुक्त सैन्य अभ्यासों को कम करने का ऐलान किया है। इस फैसले को ईरान के मुद्दे पर दक्षिण कोरिया के असहयोग से भी जोड़कर देखा जा रहा है।

सैन्य संबंधों में नया मोड़

अमेरिका और दक्षिण कोरिया के बीच दशकों से चले आ रहे रक्षा और सैन्य सहयोग में एक महत्वपूर्ण बदलाव की स्थिति बन रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में एक बड़ी घोषणा करते हुए स्पष्ट किया है कि अमेरिका अब दक्षिण कोरिया के साथ होने वाले संयुक्त सैन्य अभ्यासों को काफी हद तक कम करने की योजना बना रहा है। इस फैसले के पीछे ट्रंप ने कई मुख्य कारणों का उल्लेख किया है, जिसमें उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग उन के साथ अपने व्यक्तिगत संबंधों की प्रगाढ़ता और सैन्य अभ्यासों पर होने वाले भारी खर्च का हवाला दिया गया है।

ईरान का मुद्दा और नाराजगी की अटकलें

ट्रंप के इस बयान ने राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है, क्योंकि इसमें ईरान से जुड़ी एक महत्वपूर्ण जानकारी भी सामने आई है। ट्रंप ने स्वीकार किया कि उन्होंने दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति से यह सवाल किया था कि क्या उनका देश ईरान के परमाणु कार्यक्रम को रोकने के लिए चलाए जा रहे अमेरिकी अभियान में सहयोग करेगा। इस पर दक्षिण कोरिया की ओर से ‘नहीं, शुक्रिया’ का जवाब मिला। हालांकि ट्रंप ने इसे अलग मुद्दा करार देने की कोशिश की, लेकिन सैन्य अभ्यास कम करने की घोषणा के साथ इस प्रकरण का उल्लेख करना यह संकेत देता है कि शायद यह दक्षिण कोरिया के लिए एक तरह की सजा है। अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों का मानना है कि ट्रंप न केवल दक्षिण कोरिया, बल्कि फ्रांस, ब्रिटेन और जापान जैसे देशों से भी नाराज हैं क्योंकि ये सभी ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य या रसद सहायता देने में हिचकिचाते रहे हैं।

ट्रुथ सोशल पर ट्रंप का दावा

डोनाल्ड ट्रंप ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल के जरिए अपनी बात रखी। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि अमेरिका और दक्षिण कोरिया के बीच होने वाले सैन्य युद्धाभ्यास अत्यधिक महंगे हैं और इनका ज्यादातर आर्थिक बोझ अमेरिका उठाता है। ट्रंप ने आगे कहा कि ऐसे सैन्य अभ्यास उत्तर कोरिया के लिए शत्रुतापूर्ण संदेश देते हैं, जो कि उचित नहीं है। उन्होंने किम जोंग उन के साथ अपने बहुत अच्छे रिश्तों का जिक्र करते हुए कहा कि उनके बीच एक मजबूत तालमेल है, जो इस निर्णय के पीछे एक प्रमुख आधार है। यह बयान और भी दिलचस्प हो जाता है क्योंकि हाल ही में उत्तर कोरिया ने कई मिसाइल परीक्षण किए हैं, जिन्हें संयुक्त राष्ट्र ने प्रतिबंधित कर रखा है। एक तरफ उत्तर कोरिया आक्रामकता दिखा रहा है, तो दूसरी तरफ अमेरिका तनाव कम करने की बात कर रहा है।

उल्ची फ्रीडम शील्ड का भविष्य

ट्रंप की इस घोषणा के बावजूद दक्षिण कोरियाई प्रशासन ने अपना रुख स्पष्ट कर दिया है। अधिकारियों ने कहा कि अमेरिका और दक्षिण कोरिया का वार्षिक उल्ची फ्रीडम शील्ड सैन्य अभ्यास अपने पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार ही आयोजित किया जाएगा। इस अभ्यास की अवधि 11 दिन है और इसमें लगभग 18,000 दक्षिण कोरियाई सैनिक भाग लेने वाले हैं। ट्रंप ने भी इस बात को स्वीकार किया कि सोमवार से शुरू होने वाले इस अभ्यास को अचानक रद्द करना उचित नहीं होगा, लेकिन भविष्य के लिए उन्होंने अभ्यास के स्तर में कटौती की बात दोहराई है।

उत्तर कोरिया का दृष्टिकोण

उत्तर कोरिया की ओर से इन सैन्य अभ्यासों को हमेशा ही एक ‘आक्रामक युद्ध की रिहर्सल’ के रूप में देखा गया है। प्योंगयांग का विदेश मंत्रालय लगातार इन गतिविधियों का विरोध करता रहा है। वर्ष 2019 में ट्रंप और किम जोंग उन के बीच हुई बातचीत के विफल होने के बाद, उत्तर कोरिया ने अपने परमाणु और मिसाइल कार्यक्रमों की गति को और अधिक तेज कर दिया है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और सैन्य तैनाती

यह पहला मौका नहीं है जब डोनाल्ड ट्रंप ने ऐसे कदम उठाए हैं। अपने पहले कार्यकाल के दौरान वर्ष 2018 में भी उन्होंने किम जोंग उन के साथ परमाणु निरस्त्रीकरण की वार्ता के समय सैन्य अभ्यासों को पूर्णतः रोक दिया था। इसके बाद वर्ष 2020 में वैश्विक महामारी के दौरान भी इन अभ्यासों का दायरा सीमित रखा गया था। वर्तमान में दक्षिण कोरिया में लगभग 28,500 अमेरिकी सैनिक तैनात हैं। इस तैनाती का मूल आधार वर्ष 1953 का कोरियाई युद्धविराम है। चूँकि दोनों देशों के बीच औपचारिक शांति समझौता नहीं हो सका है, इसलिए तकनीकी रूप से युद्ध की स्थिति अभी भी बरकरार मानी जाती है। अमेरिकी सैनिकों की उपस्थिति का मुख्य उद्देश्य दक्षिण कोरिया की सुरक्षा सुनिश्चित करना और किसी भी संभावित खतरे को रोकना है।

शांति की तलाश में कोरिया

दिलचस्प बात यह है कि दक्षिण कोरिया खुद भी उत्तर कोरिया के साथ बातचीत के रास्ते तलाश रहा है। पिछले हफ्ते दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति ने एक प्रस्ताव पेश किया था जिसमें 1953 के युद्धविराम को आधिकारिक रूप से समाप्त करने और शांति वार्ता को आगे बढ़ाने की बात कही गई थी। जहाँ एक तरफ अमेरिका सैन्य दबाव कम करने के मूड में दिख रहा है, वहीं दूसरी ओर दक्षिण कोरिया स्वयं भी कूटनीतिक समाधान खोजने के प्रयास में लगा हुआ है।

साहिल चौहान पाबना के वर्ल्ड अफेयर्स रिपोर्टर हैं, जो अंतरराष्ट्रीय खबरें और वैश्विक मामले कवर करते हैं। विदेश नीति, कूटनीति और दुनिया भर के घटनाक्रमों पर उनकी अच्छी पकड़ है। वे जटिल वैश्विक मुद्दों को भारतीय नजरिए से समझाते हैं।

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