देश का बचपन और जवानी खतरे में है: बाबा रामदेव का तीखा बयान, आंदोलनों में बच्चों के इस्तेमाल पर जताई चिंता राष्ट्रीय राजनीति 3 घंटे पहले 9
योग गुरु बाबा रामदेव ने हालिया छात्र आंदोलनों और विरोध प्रदर्शनों में बच्चों को शामिल किए जाने पर गहरी नाराजगी जताई है। उन्होंने कहा कि देश की असल समस्या बच्चों के भविष्य और जवानी से जुड़ी है, न कि धर्म या जाति से।

आंदोलनों में बच्चों की भागीदारी पर बाबा रामदेव का सख्त रुख

देश के विभिन्न हिस्सों में भर्ती परीक्षाओं में धांधली और अनियमितताओं के खिलाफ हो रहे छात्र विरोध प्रदर्शनों के बीच योग गुरु बाबा रामदेव ने एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने विशेष रूप से इस बात पर चिंता व्यक्त की है कि इन आंदोलनों में छोटी उम्र के बच्चों का इस्तेमाल किया जा रहा है। रामदेव का कहना है कि जब बच्चे पढ़ाई के बजाय सड़कों पर विरोध प्रदर्शन करेंगे, तो वे अपना भविष्य कैसे संवार पाएंगे।

असली खतरा धर्म से नहीं, बल्कि भविष्य से है

बाबा रामदेव ने देश में चल रही बहस को एक नया मोड़ देते हुए कहा कि देश में न तो हिंदू खतरे में है और न ही मुसलमान, सिख, ईसाई, जैन, बौद्ध, ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, शूद्र, दलित या आदिवासी खतरे में हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि वास्तविक खतरा देश के बचपन और जवानी पर मंडरा रहा है। रामदेव के अनुसार, देश का वर्तमान और आने वाला कल खतरे में है। इतना ही नहीं, उन्होंने देश की प्रकृति, संस्कृति, सभ्यता, अखंडता और संप्रभुता को भी गंभीर संकट के दौर में बताया है।

अंधेरगर्दी से फैलता है जन आक्रोश

योग गुरु ने अपनी बात रखते हुए कहा कि जब व्यवस्था में अंधेरगर्दी होती है, तो लोगों में स्वाभाविक रूप से आक्रोश फूटता है। गौरतलब है कि दिल्ली के जंतर-मंतर पर नीट-यूजी पेपर लीक मामले को लेकर लंबे समय तक छात्र आंदोलनों का केंद्र बना रहा था, और अब झारखंड जैसे राज्यों में भी भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ी के आरोपों को लेकर युवा सड़कों पर उतर आए हैं। इन आंदोलनों के दौरान छात्रों ने अपनी मांगों के समाधान के लिए सरकार पर दबाव बनाया था, जिसके बाद ही विरोध प्रदर्शनों को समाप्त किया गया था।

बच्चों को आंदोलनों से दूर रखने की अपील

बाबा रामदेव ने आंदोलनों में बच्चों के इस्तेमाल पर कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने सवाल खड़ा किया कि जो बच्चा अभी प्राइमरी स्तर की शिक्षा ले रहा है, उसे यदि विरोध प्रदर्शनों में धकेल दिया जाएगा तो वह पढ़ाई कब करेगा। उन्होंने कहा कि छोटे बच्चों को यह तक पता नहीं होता कि आंदोलन का वास्तविक अर्थ क्या है। उन्हें केवल उकसाकर थाने घेराव करने जैसे कार्यों में झोंक दिया जाता है। रामदेव ने स्पष्ट रूप से कहा कि बच्चों को ऐसे अराजक प्रदर्शनों का हिस्सा नहीं बनाना चाहिए।

अराजक आंदोलनों के बजाय संवैधानिक रास्ते पर जोर

बाबा रामदेव ने यह भी साफ किया कि वह लोकतंत्र में विरोध दर्ज करने के अधिकार के खिलाफ नहीं हैं। उन्होंने कहा कि संविधान और लोकतंत्र की सुरक्षा के लिए किए जाने वाले शांतिपूर्ण आंदोलनों के वे समर्थक हैं, लेकिन देश में किसी भी प्रकार की अराजकता फैलाने वाले प्रदर्शनों का वे समर्थन नहीं करते हैं। उन्होंने देशवासियों से अपील की कि वे अपने बच्चों के भविष्य के प्रति अधिक जागरूक रहें और उन्हें शिक्षा पर केंद्रित रहने के लिए प्रोत्साहित करें। उनके अनुसार, देश के सामने सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण मुद्दा यही है कि कैसे बचपन को आंदोलनों की आग से सुरक्षित रखा जाए ताकि राष्ट्र का भविष्य अंधकार में न जाए।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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