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एक घंटा पहले
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नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस को मिली बड़ी शिकस्त के बाद AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने ममता बनर्जी की पार्टी की हार के पीछे चार प्रमुख कारण गिनाए हैं। उनका कहना है कि राज्य में भ्रष्टाचार, कुशासन, मुस्लिम समुदाय की अनदेखी और SIR का विवाद ही टीएमसी की पराजय की सबसे बड़ी वजहें बनीं। एएनआई को दिए एक इंटरव्यू में ओवैसी ने दावा किया कि ममता सरकार आम लोगों की समस्याओं से पूरी तरह कट चुकी थी और जनता का भरोसा खो बैठी थी, जिसका सीधा असर चुनाव नतीजों पर पड़ा।
ओवैसी ने बताईं हार की चार वजहें
असदुद्दीन ओवैसी के अनुसार ममता बनर्जी की हार के पीछे ये चार बड़े कारण रहे:
- भ्रष्टाचार: ओवैसी ने कहा कि राज्य सरकार पर लगातार भ्रष्टाचार के आरोप लगते रहे। उनका मानना है कि इन मामलों ने जनता में नाराजगी बढ़ाई और इसका प्रभाव चुनाव परिणामों में स्पष्ट रूप से नजर आया।
- कुशासन: उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था कमजोर रही और सरकार जनता की उम्मीदों पर खरी नहीं उतर सकी। ओवैसी के मुताबिक कुशासन भी टीएमसी की हार की एक अहम वजह बना।
- मुस्लिम समुदाय की उपेक्षा: ओवैसी ने कहा कि पश्चिम बंगाल में मुस्लिम आबादी बड़ी संख्या में है, फिर भी सरकार ने उनकी जरूरतों और समस्याओं पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया। उनका आरोप था कि मुस्लिमों के साथ विश्वासघात हुआ और उनकी भलाई के लिए जरूरी कदम नहीं उठाए गए। उन्होंने राजनीतिक दलों से अपील की कि मुस्लिमों को सिर्फ वोट बैंक न समझा जाए, बल्कि समान अधिकार रखने वाले नागरिक के रूप में उन्हें सम्मान मिलना चाहिए।
- SIR का मुद्दा: ओवैसी के मुताबिक SIR भी टीएमसी की हार का एक बड़ा कारण बना। उनका कहना था कि इस मुद्दे ने जनता के बीच असंतोष पैदा किया, जिसका असर चुनाव में देखने को मिला।
ओवैसी ने कहा कि ये चारों मुद्दे मिलकर तृणमूल कांग्रेस की हार की बड़ी वजह बने। उन्होंने आरोप लगाया कि ममता बनर्जी का आम जनता से संपर्क पूरी तरह खत्म हो चुका था और सरकार लोगों की भावनाओं को समझने में नाकाम रही।
ओबीसी प्रमाणपत्र विवाद पर भी उठाया सवाल
ओवैसी ने कलकत्ता हाई कोर्ट द्वारा वर्ष 2010 के बाद जारी किए गए पांच लाख ओबीसी प्रमाणपत्र रद्द किए जाने के मामले को भी उठाया। उन्होंने दावा किया कि इनमें करीब 3 लाख प्रमाणपत्र मुस्लिम समुदाय के लोगों के थे। उनका कहना था कि सरकार के पास इस समस्या को सुलझाने का मौका था, मगर उसने जरूरी कदम नहीं उठाए।
बीजेपी के हाथों बुरी तरह हारी टीएमसी
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में भारतीय जनता पार्टी ने 294 में से 206 सीटें जीतकर शानदार प्रदर्शन किया। इसके बाद फलता में हुए विधानसभा चुनाव में भी बीजेपी ने जीत दर्ज की, जिससे उसकी सीटों की कुल संख्या 207 हो गई। दूसरी ओर, पिछले चुनाव में 212 सीटें जीतने वाली तृणमूल कांग्रेस इस बार केवल 80 सीटों पर सिमट गई और बाद में उसके अधिकांश विधायक भी बागी हो गए।
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