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2 घंटे पहले
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार को विश्वास जताया कि वॉशिंगटन और नई दिल्ली बहुत जल्द एक व्यापार समझौते पर सहमति बना लेंगे। इस दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना “अच्छा दोस्त” करार दिया और कहा कि दोनों के बीच रिश्ते बेहद मजबूत हैं।
मोदी को बताया अच्छा दोस्त
व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत में ट्रंप ने कहा, “हम समझौते तक जरूर पहुंचेंगे, क्योंकि मुझे आपके प्रधानमंत्री बहुत पसंद हैं। वह मेरे अच्छे दोस्त हैं और हमारे बीच अच्छी बनती है। हमारे संबंध अच्छे हैं।” उन्होंने दोनों नेताओं के बीच की व्यक्तिगत केमिस्ट्री को रिश्तों की मजबूती की वजह बताया।
भारत की टैरिफ नीति पर निशाना
ट्रंप ने एक बार फिर भारत की शुल्क नीति पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि नई दिल्ली ने लंबे समय तक अमेरिकी उत्पादों पर भारी शुल्क लगाया, जबकि उसे अमेरिकी बाजार तक आसान पहुंच हासिल रही। उन्होंने कहा, “सालों तक भारत ने अमेरिका का फायदा उठाया। उन्होंने हम पर भारी टैरिफ लगाए और कुछ नहीं चुकाया।”
हालांकि ट्रंप का दावा था कि बीते कुछ वर्षों में व्यापार का संतुलन बदल चुका है और अब अमेरिका को भारत के साथ आर्थिक रिश्तों से अधिक लाभ मिल रहा है। उनके शब्दों में, “अब स्थिति पूरी तरह उलट गई है और हम भारत के साथ बहुत पैसा कमा रहे हैं।”
हार्ले-डेविडसन का दिया उदाहरण
अपनी बात को साबित करने के लिए ट्रंप ने अमेरिकी मोटरसाइकिल कंपनी हार्ले-डेविडसन का जिक्र किया, जिसे वह अक्सर अनुचित व्यापार बाधाओं के उदाहरण के तौर पर पेश करते हैं। उन्होंने कहा, “वे हार्ले-डेविडसन को भारत में आने नहीं देते थे। वे 200% टैरिफ लगाते थे। दुर्भाग्य से यह सब मेरे कार्यकाल से पहले हुआ। वे यहां मोटरसाइकिल बेचना चाहते थे और हमने उन पर कोई शुल्क नहीं लगाया।”
व्यापार वार्ता का दौर जारी
ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है जब वॉशिंगटन और नई दिल्ली के बीच द्विपक्षीय व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के लिए बातचीत चल रही है। दोनों पक्षों ने इस समझौते को आर्थिक सहयोग और बाजार तक पहुंच बढ़ाने की दृष्टि से अहम बताया है।
इस सप्ताह की शुरुआत में एक अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल भारत पहुंचा था और गुरुवार को चार दिन तक चली बातचीत के बाद एक अंतरिम द्विपक्षीय समझौते पर चर्चा संपन्न हुई। भारत के वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार, व्यापार वार्ता सहयोग और व्यावहारिकता की भावना के साथ हुई, जिसमें दोनों पक्षों ने आपसी रूप से लाभकारी समझौते को अंतिम रूप देने की प्रतिबद्धता दोहराई, ताकि द्विपक्षीय व्यापार और आर्थिक रिश्ते और मजबूत हो सकें।
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