पितर रूठे हैं? अधिक मास की इस अमावस्या पर हरिद्वार के इन घाटों पर करें पितृ कर्म, स्कंद पुराण में छिपा है उपाय धर्म 11 घंटे पहले 3
अधिक मास (पुरुषोत्तम मास) की पितृ कार्येषु अमावस्या 14 जून को है, जो नाराज पितरों को मनाने का सबसे उत्तम समय माना जाता है। हरिद्वार के पंडित श्रीधर शास्त्री के अनुसार इस दिन हरिद्वार के कुछ खास घाटों पर पितृ कार्य करने से रूठे पितर प्रसन्न होते हैं।

सनातन परंपरा में अधिक मास यानी पुरुषोत्तम मास को पूजा-पाठ, हवन, यज्ञ और व्रत जैसे धार्मिक कार्यों के लिए अत्यंत शुभ माना गया है। यही वह काल भी है, जब भगवान विष्णु की विशेष कृपा पाने के साथ-साथ नाराज पितरों को प्रसन्न करने का अवसर मिलता है। इसी महीने पुरुषोत्तम मास का आगमन हो रहा है।

तीन संवत बाद आता है अधिक मास

संवत में कुल 12 मास होते हैं, जबकि अधिक मास (पुरुषोत्तम मास) हर तीन संवत के बाद आता है। इसी कारण इसका धार्मिक महत्व और भी बढ़ जाता है। यह मास धार्मिक अनुष्ठानों के माध्यम से भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त करने और रूठे हुए पितरों को मनाने के लिए सबसे उपयुक्त समय माना जाता है।

14 जून को है पितृ कार्येषु अमावस्या

एक विशेष संयोग यह है कि संवत 2083 में पुरुषोत्तम मास के आखिरी पक्ष में पितृ कार्येषु अमावस्या 14 जून को पड़ रही है। मान्यता है कि इस दिन हरिद्वार के कुछ चुनिंदा स्थानों पर पितृ कार्य करने से सभी पितर तृप्त होकर अपने धाम लौट जाते हैं। इन स्थानों का उल्लेख धार्मिक ग्रंथों में मिलता है।

पंडित श्रीधर शास्त्री ने बताया महत्व

हरिद्वार के विद्वान पंडित श्रीधर शास्त्री के अनुसार, अधिक मास में पितृ कार्यों के लिए पितृ कार्येषु अमावस्या 14 जून को आ रही है। उनका कहना है कि नाराज पितरों को मनाने के लिए अधिक मास की यह अमावस्या बेहद खास मानी जाती है।

इन घाटों पर करें पितृ कर्म

पंडित श्रीधर शास्त्री के अनुसार, इस दिन हरिद्वार के इन स्थानों पर पिंडदान, तर्पण, जलांजलि, तिलांजलि और पितृ गायत्री के पाठ आदि करने से नाराज पितर भी प्रसन्न हो जाते हैं:

  • हर की पौड़ी स्थित अस्थि प्रवाह घाट
  • हर की पौड़ी का कुशा घाट
  • नील धारा पर बना चंडी घाट यानी नमामि गंगे घाट
  • हरिद्वार की उपनगरी और भोलेनाथ की ससुराल कनखल का प्राचीन शीतला माता घाट
  • हरिद्वार शहर के मध्य देवपुरा के पास स्थित प्राचीन नारायणी शिला मंदिर

स्कंद पुराण में मिलता है उल्लेख

पंडित श्रीधर शास्त्री बताते हैं कि इन सभी स्थानों का वर्णन हिंदू धार्मिक ग्रंथ स्कंद पुराण के केदार खंड में किया गया है। इन स्थानों पर 14 जून को पितृ कार्येषु अमावस्या के दिन पितरों का श्राद्ध कर्म करने से रूठे हुए पितर प्रसन्न होते हैं और अपने वंशजों पर विशेष कृपा बनाए रखते हैं।

इनके अलावा धर्मनगरी हरिद्वार में गंगा किनारे भी पितरों के उद्धार के लिए पितृ कार्य करने की धार्मिक मान्यता प्रचलित है।

चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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