उपनाम: पिंडदान
जमशेदपुर के प्रवीण सेठी का अनूठा मिशन, 599 अज्ञात और लावारिस लोगों के लिए किया पिंडदान
जमशेदपुर के निवासी प्रवीण सेठी पिछले कुछ सालों से लावारिस शवों के सम्मानजनक अंतिम संस्कार के लिए काम कर रहे हैं। हाल ही में उन्होंने पितृ पक्ष के दौरान 599 ऐसे लोगों की आत्मा की शांति के लिए सामूहिक श्राद्ध और भोज का आयोजन किया जिनके दुनिया में कोई नहीं थ...
पितृ पक्ष 2026: गया जी में पिंडदान की पूरी प्रक्रिया, यात्रा मार्ग और खर्च का विवरण
पितृ पक्ष के दौरान बिहार के गया जी में पिंडदान करने की विशेष मान्यता है। यहाँ पिंडदान कैसे करें, कौन से प्रमुख स्थान हैं और यात्रा व पूजा का अनुमानित बजट क्या है, इसकी विस्तृत जानकारी यहाँ दी गई है।
पितृपक्ष 2026: आखिर दोपहर में ही क्यों होता है श्राद्ध का ब्राह्मण भोज? जानिए कुतुप मुहूर्त का रहस्य
पितृपक्ष के दौरान श्राद्ध कर्म और ब्राह्मण भोज के लिए दोपहर का समय ही क्यों चुना जाता है, इसका गहरा धार्मिक और ज्योतिषीय आधार है। आइए जानते हैं कुतुप मुहूर्त और दोपहर के महत्व के बारे में।
पितृपक्ष की प्रमुख तिथियाँ: मातृ नवमी से लेकर घात चतुर्दशी तक का है विशेष आध्यात्मिक महत्व
पितृपक्ष के दौरान गयाजी में पिंडदान और तर्पण की परंपरा सदियों से चली आ रही है। यहां जानिए मातृ नवमी, त्रयोदशी श्राद्ध और अकाल मृत्यु को प्राप्त पूर्वजों के लिए घात चतुर्दशी का धार्मिक महत्व क्या है।
श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान में क्या अंतर है? आचार्य से समझें इन धार्मिक अनुष्ठानों का महत्व
पितृ पक्ष के दौरान अपने पूर्वजों के प्रति सम्मान प्रकट करने के लिए श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान किए जाते हैं, लेकिन कई लोग इनके बीच के सूक्ष्म अंतर को लेकर उलझन में रहते हैं। खरगोन के विद्वान पंडित जगदीश ठक्कर ने इन तीनों प्रक्रियाओं की विधि और महत्व को विस्...
श्राद्ध और पिंडदान के लिए बेहद खास हैं ये पौराणिक तीर्थ स्थल, जानिए इनका धार्मिक महत्व
पितृ पक्ष के दौरान अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए सही स्थान पर श्राद्ध और पिंडदान करना अत्यंत फलदायी माना जाता है। शास्त्रों में वर्णित कुछ विशेष तीर्थ स्थल ऐसे हैं जहां तर्पण करने से पितरों को मोक्ष की प्राप्ति होती है और उनका आशीर्वाद परिवार पर...
पितृपक्ष: गयाजी की 45 पिंड वेदियां और 3 तर्पण स्थलों का महत्व, जानिए 1 से 17 दिनों तक के श्राद्ध की विधि
गयाजी को पितरों को मोक्ष दिलाने वाला पवित्र स्थान माना जाता है, जहां श्रद्धालु अपनी सुविधा और परंपरा के अनुसार 1 से लेकर 17 दिनों तक का श्राद्ध कर्म करते हैं।
पितृपक्ष 2026: आज से शुरू हुआ पूर्वजों को नमन का पर्व, जानिए हरिद्वार की नारायणी शिला का विशेष धार्मिक महत्व
आज से पितृपक्ष की शुरुआत हो चुकी है, जो 10 अक्टूबर तक चलेगा। इस दौरान हरिद्वार स्थित नारायणी शिला पर पिंडदान और श्राद्ध कर्म का विशेष महत्व माना गया है, जिसे भगवान विष्णु के हृदय का प्रतीक माना जाता है।
पितृ पक्ष विशेष: जानिए श्राद्ध की शुरुआत कैसे हुई और किसने किया था सबसे पहला पितृकर्म
सनातन धर्म में श्राद्ध और पिंडदान का विशेष महत्व है। गयाजी के विद्वान आचार्यों के अनुसार, इस पवित्र परंपरा की शुरुआत महर्षि निमि ने महर्षि अत्रि के मार्गदर्शन में की थी।
पितृ पक्ष विशेष: हरिद्वार का कुशावर्त घाट है बेहद खास, जुड़ी हैं भगवान राम और दत्तात्रेय से जुड़ी पौराणिक कथाएं
पितृ पक्ष के दौरान हरिद्वार के विभिन्न घाटों पर तर्पण और पिंडदान का विशेष महत्व है। हर की पौड़ी के अलावा कुशावर्त घाट का आध्यात्मिक महत्व भी अत्यंत गहरा माना गया है।
पितृपक्ष 2026: मोक्ष का पहला द्वार है यह स्थान, गयाजी जाने से पहले यहां क्यों करते हैं पिंडदान?
पितृपक्ष के दौरान गयाजी को पिंडदान का सबसे बड़ा केंद्र माना जाता है, लेकिन एक विशेष स्थान ऐसा भी है जहां गया जाने से पहले तर्पण करना बेहद जरूरी है। जानिए भगवान श्री राम और माता सीता से जुड़ी इस जगह का धार्मिक महत्व और पितृपक्ष की प्रमुख तिथियां।
पितृपक्ष 2026: 27 सितंबर से शुरू होगा पूर्वजों का श्रद्धा पर्व, जानें श्राद्ध की तिथियां और सर्वपितृ अमावस्या का महत्व
वर्ष 2026 में पितृपक्ष का शुभारंभ 27 सितंबर से होने जा रहा है, जिसका समापन 10 अक्टूबर को सर्वपितृ अमावस्या के साथ होगा। इस दौरान पूर्वजों के निमित्त किए जाने वाले श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान की पूरी जानकारी यहां उपलब्ध है।
पितृपक्ष 2026: क्या बेटियां कर सकती हैं पिंडदान और श्राद्ध, जानिए शास्त्रों के नियम
पितृपक्ष के दौरान पूर्वजों का स्मरण करना बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है, और यदि किसी परिवार में बेटा न हो तो बेटी भी श्राद्ध और पिंडदान का अधिकार रखती है। इस साल पितृपक्ष 27 सितंबर से 10 अक्टूबर तक मनाया जाएगा।
पितृ पक्ष: हरिद्वार के इन पवित्र घाटों पर पिंडदान से मिलती है पितरों को मुक्ति
पितृ पक्ष के दौरान पूर्वजों को समर्पित तर्पण और पिंडदान के लिए हरिद्वार में कई महत्वपूर्ण घाट हैं। इन स्थानों का पौराणिक ग्रंथों में विशेष उल्लेख मिलता है और इनका महत्व सामान्य घाटों से अधिक माना गया है।
पितृपक्ष 2026: संतान नहीं होने पर कौन करेगा पिंडदान? गया के पुरोहित ने बताए नियम
पितृपक्ष के दौरान अगर किसी व्यक्ति की कोई संतान नहीं है, तो पिंडदान का अधिकार किसे मिलता है? गया के विशेषज्ञों ने इससे जुड़े धार्मिक नियमों और आत्म-पिंडदान की प्रक्रिया को विस्तार से समझाया है।