राजस्थान
2 घंटे पहले
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अंतरराष्ट्रीय सीमा से लगे इलाकों में सुरक्षा और निगरानी के तंत्र को और पुख्ता करने के लिए जैसलमेर प्रशासन ने अहम पहल की है। जिला कलेक्टर अनुपमा जोरवाल ने साफ किया है कि सीमा से 0 से 15 किलोमीटर के दायरे में मौजूद सभी अतिक्रमणों का व्यापक सर्वेक्षण कराया जाएगा। जो मामले नियमों के खिलाफ पाए जाएंगे, उन पर दिवाली से पहले कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
अवैध कब्जों पर होगा सख्त एक्शन
कलेक्टर अनुपमा जोरवाल के अनुसार, हाल ही में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई बैठक में सीमावर्ती जिलों के कलेक्टरों तथा पुलिस अधीक्षकों को खास दिशा-निर्देश सौंपे गए हैं। इस बैठक में मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटे क्षेत्रों की सुरक्षा, सूचना तंत्र और भूमि उपयोग की निगरानी को मजबूत करने पर जोर रहा।
उन्होंने कहा कि प्रशासन यह तय करेगा कि सीमा क्षेत्र में किसी भी तरह के अतिक्रमण की संपूर्ण जानकारी उसके पास मौजूद रहे। इसी मकसद से 0 से 15 किलोमीटर के दायरे में आने वाले इलाकों का बारीकी से सर्वे होगा। यदि कहीं अवैध कब्जा या नियमों के विरुद्ध निर्माण सामने आता है, तो तय समयसीमा के भीतर उस पर कार्रवाई की जाएगी।
सूचना तंत्र को बनाया जाएगा और मजबूत
कलेक्टर ने कहा कि सीमावर्ती क्षेत्र होने के नाते सूचना एकत्र करने की प्रणाली को सुदृढ़ करना बेहद आवश्यक है। इसके लिए पुलिस, प्रशासन, बीएसएफ, आईबी और सैन्य एजेंसियों के बीच होने वाली मासिक बैठकों को अधिक असरदार बनाया जाएगा। इसके अलावा पटवारियों, पशुपालकों, पूर्व सैनिकों और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को भी इस नेटवर्क का हिस्सा बनाकर एक सशक्त स्थानीय सूचना तंत्र खड़ा किया जाएगा।
फंडिंग की होगी गहन जांच
अनुपमा जोरवाल ने अतिक्रमण के स्वरूप के साथ-साथ उसकी फंडिंग को भी एक अहम मुद्दा बताया। उन्होंने कहा कि अगर कोई व्यक्ति केवल खेती के लिए जमीन का इस्तेमाल कर रहा है तो स्थिति भिन्न हो सकती है, लेकिन यदि सीमा क्षेत्र में बड़े पैमाने पर निर्माण कार्य चल रहे हैं तो यह पता लगाना जरूरी है कि इसके लिए पैसा कहां से आ रहा है। ऐसे प्रकरणों की गहराई से पड़ताल की जाएगी।
41 गांवों का बनेगा नक्शा और डेटा बैंक
प्रशासन अब जैसलमेर के 41 सीमावर्ती गांवों का विस्तृत नक्शा और डेटा बैंक तैयार करेगा। इसमें जमीन की मौजूदा स्थिति, वहां रहने वाले समुदायों और वैध तथा अवैध निर्माण गतिविधियों का पूरा ब्योरा शामिल किया जाएगा। इस काम के लिए सभी राजस्व अधिकारियों को निर्देश दे दिए गए हैं। सर्वे रिपोर्ट बनकर तैयार होने के बाद इसे राज्य सरकार को भेजा जाएगा, जिसके आधार पर आगे की रणनीति और कार्रवाई तय होगी।
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