उपनाम: प्रेरक कहानी
सफलता की कहानी: बहन से लिए 10 हजार के उधार से शुरू हुआ कारोबार, आज चप्पल की दुकान पर ग्राहकों की भीड़
मध्य प्रदेश के बुरहानपुर में एक भाई ने बहन के आर्थिक सहयोग से चप्पल का व्यापार शुरू किया, जो आज कड़ी मेहनत के दम पर एक सफल व्यवसाय बन चुका है।
नोबेल प्राइज जीतने के बाद भी नहीं बदली दिनचर्या, बच्चों का लंच बनाकर साइकिल से यूनिवर्सिटी पहुंचे कार्ल डिजायरोथ
स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर कार्ल डिजायरोथ को 2026 के मेडिसिन नोबेल पुरस्कार से नवाजा गया है। दुनिया के इस सबसे बड़े सम्मान के ऐलान के बाद जश्न मनाने के बजाय उन्होंने अपनी रोजमर्रा की पारिवारिक जिम्मेदारियों को प्राथमिकता दी और बच्चों के लिए लंच तै...
4 साल में मां और पति को खोया, फिर भी नहीं टूटी सोनी, मेकअप के हुनर से बदल दी जिंदगी, लोग कहते हैं, रांची की 'जादू वाली दीदी'
रांची की सोनी चौरसिया ने व्यक्तिगत जीवन में भारी दुखों के बावजूद मेकअप आर्टिस्ट के तौर पर अपनी एक अलग पहचान बनाई है। 5,000 से अधिक दुल्हनों को संवारने वाली सोनी को आज लोग 'जादू वाली दीदी' के नाम से बुलाते हैं।
एमकॉम डिग्री को दी मात, लाखों की कॉर्पोरेट नौकरी छोड़ पिता के सपने को बनाया अपना करियर
मध्य प्रदेश के बुरहानपुर में रहने वाले भारत महाजन ने अपनी उच्च शिक्षा पूरी करने के बाद कॉर्पोरेट जगत की चमक-धमक को छोड़कर अपने पारिवारिक होटल व्यवसाय को नई पहचान दी है। आज वे न केवल अपना होटल सफलतापूर्वक चला रहे हैं, बल्कि 10 अन्य परिवारों के लिए रोजगार का...
कोडरमा: सब्जी की दुकान से तंगहाली में था परिवार, बेटे के एक आइडिया ने पलट दी किस्मत
झारखंड के कोडरमा निवासी अर्जुन महतो का परिवार पहले सब्जी बेचकर मुश्किल से गुजारा करता था, लेकिन बेटे दिलीप कुमार के सुझाव पर शुरू किए गए बेकरी के काम ने उनकी आर्थिक स्थिति पूरी तरह बदल दी है।
बिलासपुर की रामबाई: 12 साल की उम्र से मोची का काम कर रही ये महिला बनी आत्मनिर्भरता की मिसाल
छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में रामबाई नाम की एक महिला अपनी छोटी सी मोची की दुकान से परिवार का पेट पाल रही हैं। पति के निधन और दिव्यांग बेटे की जिम्मेदारी के बावजूद वह 12 साल की उम्र से ही इस पारंपरिक पेशे को पूरी मेहनत के साथ निभा रही हैं।
'बेटा.. मैं चाहती हूं तुम प्रोफेसर बनो', मां के सपने को बेटे ने दी उड़ान, संघर्ष और मेहनत से लिखी सफलता की अनूठी कहानी
बलिया के प्रोफेसर दयालानंद राय के जीवन का सफर हर उस युवा के लिए एक बड़ी सीख है जो संघर्षों से घबराकर पीछे हट जाते हैं। मां की एक बात को लक्ष्य मानकर उन्होंने विपरीत परिस्थितियों में भी हार नहीं मानी।
मऊ के अजय चौहान की अदम्य इच्छाशक्ति: दोनों हाथ खोने के बाद भी नाक और पैरों से चला रहे दुकान
उत्तर प्रदेश के मऊ जिले के रहने वाले अजय चौहान ने एक भीषण हादसे में अपने दोनों हाथ गंवा दिए थे, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। आज वे अपनी नाक और पैरों की मदद से मोबाइल चलाने के साथ-साथ इलेक्ट्रॉनिक दुकान चलाकर अपने परिवार का भरण-पोषण कर रहे हैं।
निवेश का अनोखा उदाहरण: पूरी जीवन की कमाई से बदल दी बंजर जमीन की सूरत, अब देखने आते हैं लोग
इंग्लैंड में एक शख्स ने अपनी मेहनत की सारी जमा-पूंजी एक बंजर जमीन पर खर्च कर उसे एक घने जंगल में बदल दिया है, जो आज प्रकृति प्रेमियों के लिए आकर्षण का केंद्र है।
सिरोही की उर्मिला का कमाल: क्रिकेट के मैदान में स्टंप आउट कीं सामाजिक बंदिशें
सिरोही की रहने वाली उर्मिला चौधरी ने तमाम सामाजिक चुनौतियों को पीछे छोड़ते हुए क्रिकेट में अपनी पहचान बनाई है और आज वे पुणे में प्रोफेशनल ट्रेनिंग ले रही हैं।
दृष्टिहीन होकर भी सुरों के जादूगर हैं छतरपुर के सुरेश, लखनऊ से दिल्ली तक गूंज रही है उनकी आवाज
मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले के रहने वाले सुरेश खरे जन्म से देख नहीं सकते, लेकिन अपनी जादुई आवाज और गायकी से वे पूरे देश में अपनी पहचान बना चुके हैं। संगीत ही उनके जीवन का आधार है और इसी के जरिए वे अपनी आजीविका भी चला रहे हैं।
खुद बोल नहीं सकते, लेकिन बेजुबान वन्यजीवों की आवाज बने जोधपुर के मूक-बधिर फरसाराम
जोधपुर के बुधनगर निवासी मूक-बधिर फरसाराम पिछले 12 वर्षों से घायल वन्यजीवों के लिए मसीहा बने हुए हैं। सिलाई का काम करने वाले फरसाराम अपनी कमाई का बड़ा हिस्सा इन बेजुबानों के इलाज पर खर्च करते हैं।
दरभंगा में महिला अधिकारी की मिसाल, गोद में नवजात लिए दफ्तर पहुंचीं और संभालीं सरकारी फाइलें
दरभंगा में पौधा संरक्षण विभाग की सहायक निदेशक रोमी कुमारी ने काम और मातृत्व के बीच बेहतरीन तालमेल बिठाकर समाज के सामने एक नई नजीर पेश की है।
घर की जिम्मेदारियों ने छीना बचपन, पर नहीं डिगा हौसला: फरीदाबाद में महिलाओं की संघर्ष भरी कहानी
फरीदाबाद के अमृता अस्पताल में इलेक्ट्रिक बग्घी चलाकर अपना और अपने परिवार का पेट पाल रहीं महिलाएं आज आत्मनिर्भरता की मिसाल बनी हुई हैं। कम उम्र में ही घर के बोझ तले दबी इन महिलाओं ने हार न मानकर नई राह चुनी है।
अपनी बहन के कैंसर ने बदली तकदीर, कबाड़ बीनने वाले के बेटे ने NEET पास कर डॉक्टर बनने का सपना किया सच
राजस्थान के कोटा के रहने वाले सागर रेगर ने अभावों के बीच नीट परीक्षा पास की है। अपनी बहन की बीमारी से प्रेरित होकर डॉक्टर बनने का संकल्प लेने वाले सागर को एलन शिक्षा संबल योजना से बड़ी मदद मिली।