उपनाम: प्रेरक कहानी
'बेटा.. मैं चाहती हूं तुम प्रोफेसर बनो', मां के सपने को बेटे ने दी उड़ान, संघर्ष और मेहनत से लिखी सफलता की अनूठी कहानी
बलिया के प्रोफेसर दयालानंद राय के जीवन का सफर हर उस युवा के लिए एक बड़ी सीख है जो संघर्षों से घबराकर पीछे हट जाते हैं। मां की एक बात को लक्ष्य मानकर उन्होंने विपरीत परिस्थितियों में भी हार नहीं मानी।
मऊ के अजय चौहान की अदम्य इच्छाशक्ति: दोनों हाथ खोने के बाद भी नाक और पैरों से चला रहे दुकान
उत्तर प्रदेश के मऊ जिले के रहने वाले अजय चौहान ने एक भीषण हादसे में अपने दोनों हाथ गंवा दिए थे, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। आज वे अपनी नाक और पैरों की मदद से मोबाइल चलाने के साथ-साथ इलेक्ट्रॉनिक दुकान चलाकर अपने परिवार का भरण-पोषण कर रहे हैं।
निवेश का अनोखा उदाहरण: पूरी जीवन की कमाई से बदल दी बंजर जमीन की सूरत, अब देखने आते हैं लोग
इंग्लैंड में एक शख्स ने अपनी मेहनत की सारी जमा-पूंजी एक बंजर जमीन पर खर्च कर उसे एक घने जंगल में बदल दिया है, जो आज प्रकृति प्रेमियों के लिए आकर्षण का केंद्र है।
सिरोही की उर्मिला का कमाल: क्रिकेट के मैदान में स्टंप आउट कीं सामाजिक बंदिशें
सिरोही की रहने वाली उर्मिला चौधरी ने तमाम सामाजिक चुनौतियों को पीछे छोड़ते हुए क्रिकेट में अपनी पहचान बनाई है और आज वे पुणे में प्रोफेशनल ट्रेनिंग ले रही हैं।
दृष्टिहीन होकर भी सुरों के जादूगर हैं छतरपुर के सुरेश, लखनऊ से दिल्ली तक गूंज रही है उनकी आवाज
मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले के रहने वाले सुरेश खरे जन्म से देख नहीं सकते, लेकिन अपनी जादुई आवाज और गायकी से वे पूरे देश में अपनी पहचान बना चुके हैं। संगीत ही उनके जीवन का आधार है और इसी के जरिए वे अपनी आजीविका भी चला रहे हैं।
खुद बोल नहीं सकते, लेकिन बेजुबान वन्यजीवों की आवाज बने जोधपुर के मूक-बधिर फरसाराम
जोधपुर के बुधनगर निवासी मूक-बधिर फरसाराम पिछले 12 वर्षों से घायल वन्यजीवों के लिए मसीहा बने हुए हैं। सिलाई का काम करने वाले फरसाराम अपनी कमाई का बड़ा हिस्सा इन बेजुबानों के इलाज पर खर्च करते हैं।
दरभंगा में महिला अधिकारी की मिसाल, गोद में नवजात लिए दफ्तर पहुंचीं और संभालीं सरकारी फाइलें
दरभंगा में पौधा संरक्षण विभाग की सहायक निदेशक रोमी कुमारी ने काम और मातृत्व के बीच बेहतरीन तालमेल बिठाकर समाज के सामने एक नई नजीर पेश की है।
घर की जिम्मेदारियों ने छीना बचपन, पर नहीं डिगा हौसला: फरीदाबाद में महिलाओं की संघर्ष भरी कहानी
फरीदाबाद के अमृता अस्पताल में इलेक्ट्रिक बग्घी चलाकर अपना और अपने परिवार का पेट पाल रहीं महिलाएं आज आत्मनिर्भरता की मिसाल बनी हुई हैं। कम उम्र में ही घर के बोझ तले दबी इन महिलाओं ने हार न मानकर नई राह चुनी है।
अपनी बहन के कैंसर ने बदली तकदीर, कबाड़ बीनने वाले के बेटे ने NEET पास कर डॉक्टर बनने का सपना किया सच
राजस्थान के कोटा के रहने वाले सागर रेगर ने अभावों के बीच नीट परीक्षा पास की है। अपनी बहन की बीमारी से प्रेरित होकर डॉक्टर बनने का संकल्प लेने वाले सागर को एलन शिक्षा संबल योजना से बड़ी मदद मिली।
बिहार के इस गांव के पहले BPSC शिक्षक बने थे नागेश्वर दास, बिना TET और B.Ed के ऐसे मिली थी नौकरी
आज के दौर में शिक्षक बनने के लिए तमाम परीक्षाएं और प्रशिक्षण जरूरी हैं, लेकिन गया जिले के बिशुनपुर गांव के नागेश्वर दास और उनकी पत्नी यमुना कुमारी ने उस दौर में सफलता हासिल की थी जब ये प्रक्रियाएं नहीं थीं। बीपीएससी के माध्यम से चयनित यह दंपती आज शिक्षा ज...
3000 बच्चों की बदली तकदीर, आधी सैलरी शिक्षा पर खर्च करने वाले दुर्गाराम मुवाल की कहानी
उदयपुर के शिक्षक दुर्गाराम मुवाल ने अपने वेतन का आधा हिस्सा जरूरतमंद बच्चों की पढ़ाई पर खर्च कर उन्हें बाल श्रम के अंधेरे से बाहर निकाला है। उनके इसी समर्पित जज्बे के लिए उन्हें राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित किया गया है।
सिर्फ 6 महीने की उम्र में गंवा दिए दोनों पैर, फिर भी बहराइच के नसीम ने नहीं मानी हार
उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले के रहने वाले नसीम ने शारीरिक विकलांगता को मात देते हुए संघर्ष भरी जिंदगी को एक नई दिशा दी है। आज वे जोमैटो में डिलीवरी एजेंट के रूप में काम कर अपना पेट पाल रहे हैं और शिक्षक बनने का सपना देख रहे हैं।
हिमाचल: उफनते नाले को बुलडोजर से पार कर पलजोम ने बच्चों को पिलाई पोलियो की दवा, जज्बे को सलाम
हिमाचल प्रदेश के दुर्गम लाहौल में एक स्वास्थ्य कार्यकर्ता ने अपनी जान जोखिम में डालकर उफनते नाले को बुलडोजर से पार किया ताकि समय पर बच्चों को पोलियो की खुराक दी जा सके।
बेगूसराय के डॉक्टर ने रचा इतिहास, बेटे से प्रेरित होकर जीते शूटिंग चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल
बिहार के बेगूसराय के रहने वाले डॉ. अजय कुमार ने 49 साल की उम्र में राज्य स्तरीय शूटिंग प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीतकर एक मिसाल पेश की है। अपनी व्यस्त दिनचर्या के बावजूद उन्होंने शूटिंग के लिए समय निकाला और इस सफलता का श्रेय अपने बेटे और कोच को दिया है।
मेहंदी की रस्म के बीच आई सफलता की खबर, दिव्यांग विकास कुमार ने BPSC पास कर बना लिया BDO का पद
जहानाबाद के रहने वाले विकास कुमार ने अपनी शारीरिक चुनौतियों को मात देते हुए बीपीएससी परीक्षा में सफलता हासिल की है। जिस दिन उनके घर में शादी की मेहंदी की रस्म हो रही थी, उसी दिन उन्हें प्रखंड विकास पदाधिकारी बनने की खुशखबरी मिली।