खुद बोल नहीं सकते, लेकिन बेजुबान वन्यजीवों की आवाज बने जोधपुर के मूक-बधिर फरसाराम राजस्थान एक घंटा पहले 3
जोधपुर के बुधनगर निवासी मूक-बधिर फरसाराम पिछले 12 वर्षों से घायल वन्यजीवों के लिए मसीहा बने हुए हैं। सिलाई का काम करने वाले फरसाराम अपनी कमाई का बड़ा हिस्सा इन बेजुबानों के इलाज पर खर्च करते हैं।

राजस्थान के जोधपुर में एक ऐसा संवेदनशील व्यक्ति है जो खुद तो बोल और सुन नहीं सकता, लेकिन बेजुबान वन्यजीवों की तकलीफ और उनकी कराह को बेहद गहराई से महसूस करता है। जोधपुर के बुधनगर गांव के रहने वाले मूक-बधिर फरसाराम पिछले 12 साल से घायल और बेसहारा वन्यजीवों के लिए किसी मसीहा से कम नहीं हैं। अपनी शारीरिक अक्षमता को पीछे छोड़कर वे लगातार जीव सेवा के इस निस्वार्थ काम में जुटे हुए हैं।

घर को ही बना दिया अस्थायी रेस्क्यू सेंटर

पेशे से दर्जी फरसाराम सिलाई का काम करके अपनी आजीविका चलाते हैं। उनके पास आमदनी के बहुत बड़े साधन नहीं हैं, लेकिन इसके बावजूद वे अपनी मेहनत की कमाई का एक बहुत बड़ा हिस्सा इन बेजुबान जानवरों के इलाज और उनकी देखभाल पर खर्च कर देते हैं। वन्यजीवों के प्रति उनका समर्पण इतना गहरा है कि उन्होंने अपने खुद के घर को ही एक अस्थायी रेस्क्यू सेंटर में तब्दील कर दिया है। यहां वे घायल जीवों को लाकर उनकी देखरेख और मरहम-पट्टी करते हैं।

तकनीक और टीम के जरिए बचा रहे हैं जिंदगियां

एक मूक-बधिर व्यक्ति के लिए समाज में संवाद करना बेहद चुनौतीपूर्ण होता है, लेकिन फरसाराम ने तकनीक के इस्तेमाल से इस दूरी को पाट दिया है। उन्होंने एक मजबूत व्हाट्सएप नेटवर्क और अपनी एक समर्पित टीम तैयार की है। इस नेटवर्क के माध्यम से उन्हें जैसे ही जोधपुर और पाली क्षेत्र में किसी घायल जानवर की जानकारी मिलती है, वे तुरंत सहायता के लिए सक्रिय हो जाते हैं। इस बेहतरीन तालमेल की मदद से वे अब तक सैकड़ों वन्यजीवों की जान बचाने में कामयाब रहे हैं।

अरावली पर्वतमाला के संरक्षण के लिए राष्ट्रपति को लिखा पत्र

फरसाराम का काम केवल धरातल पर जानवरों की जान बचाने तक ही सीमित नहीं है, बल्कि वे पर्यावरण संरक्षण को लेकर भी बेहद गंभीर हैं। अरावली पर्वतमाला के संरक्षण को लेकर उन्होंने सीधे देश के राष्ट्रपति को पत्र लिखकर प्रशासनिक गलियारों तक अपनी बात पहुंचाई है। उनका यह प्रयास दिखाता है कि पर्यावरण और प्रकृति को बचाने के लिए इरादे मजबूत होने चाहिए, आवाज की जरूरत तो बाद में पड़ती है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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