अपनी बहन के कैंसर ने बदली तकदीर, कबाड़ बीनने वाले के बेटे ने NEET पास कर डॉक्टर बनने का सपना किया सच राजस्थान एक घंटा पहले 3
राजस्थान के कोटा के रहने वाले सागर रेगर ने अभावों के बीच नीट परीक्षा पास की है। अपनी बहन की बीमारी से प्रेरित होकर डॉक्टर बनने का संकल्प लेने वाले सागर को एलन शिक्षा संबल योजना से बड़ी मदद मिली।

संघर्ष की दास्तान और डॉक्टर बनने का जुनून

जीवन की कठिनाइयां अक्सर बड़े संकल्पों को जन्म देती हैं। शिक्षा के केंद्र के रूप में मशहूर कोटा के निकट कैथून कस्बे के गोदल्याहेडी गांव के रहने वाले सागर रेगर ने कुछ ऐसा ही मिसाल पेश की है। पिता का काम घर-घर जाकर कबाड़ इकट्ठा करना था, बावजूद इसके सागर ने हिम्मत नहीं हारी। एलन शिक्षा संबल के मार्गदर्शन में तैयारी करते हुए उन्होंने नीट परीक्षा में 564 अंक हासिल किए हैं। इस परीक्षा में सागर ने 98.6296 परसेन्टाइल के साथ ऑल इंडिया रैंक 27157 और एससी श्रेणी में एआईआर 684 प्राप्त कर अपने परिवार का गौरव बढ़ाया है। उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा कैथून के सरकारी स्कूल से पूरी की, जहां उन्होंने 10वीं में 76 प्रतिशत और 12वीं में 92 प्रतिशत अंक हासिल किए थे।

बहन की बीमारी बनी प्रेरणा का कारण

सागर के अनुसार उनका परिवार बड़ा है और उनमें से अधिकांश सदस्य पढ़ना-लिखना नहीं जानते। परिवार के भीतर शिक्षा और जागरूकता की भारी कमी के कारण कई लोग नशे की चपेट में हैं। सागर के जीवन का सबसे दुखद और प्रेरणादायक मोड़ तब आया जब उनकी बुआ की बेटी गुटखा सेवन के कारण कैंसर की शिकार हो गई। इस घटना ने उन्हें अंदर तक हिलाकर रख दिया। सागर मानते हैं कि समाज में सकारात्मक बदलाव लाने का शिक्षा ही एकमात्र प्रभावी जरिया है। डॉक्टर बनने के बाद उनका लक्ष्य केवल अपना करियर बनाना नहीं, बल्कि अपने परिवार और समाज की आने वाली पीढ़ी को शिक्षित करना और उन्हें नशामुक्त जीवन के प्रति जागरूक करना है।

कोटा में रहकर संवरी प्रतिभा

सागर ने स्पष्ट किया कि यदि उन्हें एलन शिक्षा संबल का साथ न मिलता, तो यह सफलता हासिल करना नामुमकिन था। कोटा में रहने के दौरान उन्हें पढ़ाई के साथ-साथ रहने और खाने की भी मुफ्त सुविधा मिली। इसी सहयोग की बदौलत वह पूरा साल एकाग्रता के साथ तैयारी कर सके। आर्थिक तंगी के चलते पिता पढ़ाई का खर्च उठाने में असमर्थ थे। ऐसे में कैथून के सरकारी विद्यालय के प्रधानाचार्य ने उन्हें सही रास्ता दिखाया और शिक्षा संबल योजना की जानकारी दी। इस योजना के अंतर्गत उन्हें नीट के लिए निशुल्क कोचिंग मिली। साथ ही, एलएन माहेश्वरी परमार्थ न्यास ने उनके लिए आवास और भोजन की निशुल्क व्यवस्था की। एलएन माहेश्वरी परमार्थ न्यास के ट्रस्टी और एलन के संस्थापक नवीन माहेश्वरी ने इस उपलब्धि पर कहा कि सरकारी स्कूलों के हिंदी माध्यम के मेधावी बच्चों को मंच देने के उद्देश्य से यह पहल की गई थी। उनकी सफलता केवल एक घर तक नहीं, बल्कि पूरे समाज में बदलाव की बयार लाती है।

आर्थिक अभाव और परिवार का साथ

सागर के पिता मुरली रेगर कबाड़ इकट्ठा कर अपने परिवार का पालन-पोषण करते हैं। उन्होंने बताया कि बेटा बचपन से ही डॉक्टर बनने की इच्छा रखता था, लेकिन उनकी आर्थिक स्थिति इसके आड़े आती रही। सागर की मां एक गृहिणी हैं जो पिता के साथ मिलकर स्क्रैप अलग करने का काम करती हैं। उनका घर केवल दो कमरों का है। सागर के अलावा उनकी दो छोटी बहनें भी हैं। बड़ी बहन मानसी 12वीं कक्षा में बायोलॉजी से पढ़ाई कर रही हैं, जबकि सबसे छोटी बहन इशिका 10वीं में है।

शिक्षा संबल ने बदली जीवन की दिशा

सागर खुद मानते हैं कि शिक्षा संबल ने उनके भविष्य को एक नई दिशा दी। यदि यह योजना नहीं होती, तो शायद उन्हें मजबूरन बीएससी में दाखिला लेना पड़ता। उनके पिता निरक्षर हैं और मां केवल आठवीं कक्षा तक पढ़ी हैं, लेकिन इसके बावजूद वे जानते हैं कि शिक्षा ही एकमात्र रास्ता है। उन्होंने हमेशा सागर को आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया और आज उसी मेहनत का परिणाम सामने है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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