बालाघाट के छात्रों का कमाल, फैक्ट्री के बेकार पानी से बना दी शानदार जैविक खाद मध्य प्रदेश 4 महीने पहले 125
मध्य प्रदेश के बालाघाट में कॉलेज के छात्रों ने लाख उद्योग से निकलने वाले अपशिष्ट जल का उपयोग करके एक प्रभावी जैविक खाद तैयार की है। यह नवाचार न केवल मिट्टी की उर्वरता बढ़ा रहा है बल्कि किसानों के लिए भी वरदान साबित हो रहा है।

पर्यावरण और कृषि के लिए नई उम्मीद

बालाघाट जिला घने वनों से घिरा हुआ है, जहां की 53 प्रतिशत भूमि वनाच्छादित है। यहाँ पलाश के पेड़ों पर लाख का उत्पादन स्थानीय ग्रामीणों की आजीविका का मुख्य आधार है। लाख प्रसंस्करण के दौरान बड़ी मात्रा में पानी का उपयोग होता है, जिससे निकलने वाला दूषित जल पहले केवल एक कचरा माना जाता था। हालांकि, अब इसी पानी को एक उपयोगी जैविक खाद में बदलकर पर्यावरण संरक्षण और कृषि की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है।

कैसे हुई इस खाद की शुरुआत

केरा गांव स्थित लाख उत्पादन इकाई के पास की जमीन पर जब फसलों की पैदावार और मिट्टी की उर्वरता में आश्चर्यजनक सुधार देखा गया, तो विशेषज्ञों ने इसका परीक्षण किया। मिट्टी की जांच में सामने आया कि लाख उद्योग के पानी वाली जमीन में पोषक तत्वों की मात्रा सामान्य खेतों की तुलना में काफी अधिक है। इस शोध को आगे बढ़ाने के लिए जटाशंकर त्रिवेदी शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय के विद्यार्थियों ने कंपनी के साथ एक समझौता (MOU) किया।

छात्रों का सफल प्रयोग

महाविद्यालय के छात्रों ने अपनी मेहनत से लाख प्रसंस्करण के अपशिष्ट जल में कुछ अन्य आवश्यक घटकों को मिलाकर एक विशेष जैविक खाद तैयार की है। इस खाद की मुख्य विशेषताएं इस प्रकार हैं:

  • इसमें नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटेशियम जैसे प्रमुख पोषक तत्व प्रचुर मात्रा में मौजूद हैं।
  • खाद का पेटेंट भी पंजीकृत करवा लिया गया है।
  • इसे 1 किलो की पैकिंग में तैयार किया गया है।

उपयोग और भविष्य की राह

यह खाद फिलहाल बड़े व्यावसायिक खेतों के बजाय मुख्य रूप से गृह वाटिका, गमलों में लगे पौधों, हाइड्रोपोनिक्स और एयरोपोनिक्स तकनीक के लिए सबसे उत्तम मानी जा रही है। अगर बजट अनुकूल हो, तो किसान इसे सब्जियों की खेती के लिए भी उपयोग में ला सकते हैं। छात्रों के इस सफल नवाचार से जल्द ही यह जैविक खाद व्यापक रूप से बाजार में उपलब्ध होगी, जो खेती को और अधिक टिकाऊ बनाने में मदद करेगी।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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