उपनाम: हस्तशिल्प
बहराइच के जंगलों की बेकार समझी जाने वाली चीजों से बन रहे खास उत्पाद, बाजार में जबरदस्त मांग
बहराइच के कतर्नियाघाट जंगल से सटे गांवों में थारू जनजाति की महिलाएं घास, जलकुंभी, मूंज और फसलों के अवशेष जैसी बेकार चीजों से उपयोगी और आकर्षक सामान बनाकर अच्छी कमाई कर रही हैं। इनके बनाए उत्पादों की बाजार में खूब मांग है।
गांव की बेटियों ने थामी उद्यमिता की राह, IIT कानपुर के केंद्र से बनीं सफल बिजनेस वुमन, उत्पाद विदेशों तक पहुंचे
आईआईटी कानपुर के रंजीत सिंह रोजी शिक्षा केंद्र से जुड़ी ग्रामीण महिलाएं बैग, हस्तशिल्प, परिधान और पॉटरी जैसे उत्पाद तैयार कर आत्मनिर्भर बन रही हैं, जिनकी बाजार में अच्छी मांग है और आय भी बढ़ी है।
प्लास्टिक और इलेक्ट्रॉनिक खिलौनों के दौर में भी जीवंत है करौली के हटवारा बाजार की लकड़ी कारीगरी
करौली का हटवारा बाजार आज भी पारंपरिक लकड़ी के खिलौनों और घरेलू वस्तुओं की पहचान बनाए हुए है, जो 10 से 20 परिवारों की आजीविका का सहारा हैं। महंगाई के बावजूद यहां 20 से 100 रुपये तक के हस्तनिर्मित खिलौने उपलब्ध हैं।
भारत की 'सिल्क सिटी' किसे कहते हैं? जहां की साड़ियों और कपड़ों के दीवाने हैं विदेशी भी
बिहार का भागलपुर शहर अपने रेशमी कपड़ों और साड़ियों के लिए मशहूर है और इसे भारत की 'सिल्क सिटी' कहा जाता है। यहां की टसर सिल्क की मांग अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस और जापान जैसे देशों तक फैली हुई है।
अब किराये की दुकान की जरूरत नहीं, घर बैठे पूरे देश में बेचें अपने लोकल उत्पाद
ONDC और Amazon Karigar जैसे प्लेटफॉर्म छोटे कारोबारियों और कारीगरों को बिना दुकान खोले ऑनलाइन बिक्री का मौका दे रहे हैं, जिससे लाखों लोग घर बैठे अपना डिजिटल कारोबार शुरू कर रहे हैं।