जयपुर के इस दंपति ने जूट से बनाया करोड़ों का कारोबार, घर से शुरू कर विदेशों तक पहुंचाई हस्तकला व्यापार एक घंटा पहले 2
राजस्थान की राजधानी जयपुर के एक दंपति ने जूट से बने इको-फ्रेंडली उत्पादों के साथ एक सफल स्टार्टअप शुरू किया है, जिससे आज सैकड़ों महिलाएं रोजगार प्राप्त कर रही हैं।

जयपुर की हस्तकला को नया आयाम

राजस्थान की राजधानी जयपुर को सदियों से अपनी अद्भुत कला और हस्तशिल्प के लिए जाना जाता है। इस ऐतिहासिक शहर की रचनात्मक विरासत को आगे बढ़ाते हुए, शहर के निवासी मनीष शर्मा और उनकी धर्मपत्नी ने जूट से बने फैंसी उत्पादों का एक अभिनव स्टार्टअप शुरू किया है। अपने घर से शुरू की गई यह छोटी सी शुरुआत आज एक सफल व्यावसायिक ब्रांड के रूप में स्थापित हो चुकी है। न केवल भारत के बाजारों में, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इनके द्वारा बनाए गए जूट के आइटम्स की भारी मांग देखी जा रही है।

पर्यावरण संरक्षण और जूट का महत्व

मनीष शर्मा का कहना है कि वे काफी समय से जूट उद्योग की बारीकियों को समझ रहे थे। पारंपरिक रूप से भारत में जूट का इस्तेमाल केवल बोरियों, पैकेजिंग सामग्री या खाद के थैलियों तक ही सीमित रहा है। लेकिन बदलते दौर में लोगों की सोच में बदलाव आया है। आज ग्राहक सुंदरता के साथ-साथ पर्यावरण के अनुकूल और इको-सस्टेनेबल उत्पादों को अधिक पसंद कर रहे हैं। मनीष के स्टार्टअप द्वारा बनाए जाने वाले उत्पाद पूरी तरह से 100% बायोडिग्रेडेबल यानी जैव अपघटनीय हैं। ये उत्पाद न केवल दिखने में बेहद आकर्षक और फैशनेबल हैं, बल्कि ये गैर-विषाक्त और लंबे समय तक चलने वाले टिकाऊ भी होते हैं। उच्च गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए वे विशेष रूप से कोलकाता और देश के अन्य प्रमुख केंद्रों से कॉर्कोरस प्रजाति का जूट कच्चा माल के तौर पर मंगवाते हैं।

विविध उत्पादों की विस्तृत श्रृंखला

बाजार में वर्तमान में कई मशीन से निर्मित विकल्प उपलब्ध हैं, लेकिन जूट की हस्तकला की बात ही निराली है। मनीष शर्मा की टीम पुराने ढर्रे के बैग और रस्सियों से आगे बढ़कर आधुनिक होम डेकोर और लाइफस्टाइल उत्पादों पर विशेष ध्यान दे रही है। इनके कलेक्शन में कई प्रकार के आकर्षक आइटम शामिल हैं, जैसे:

  • पेन स्टैंड
  • फ्लावर पॉट
  • वॉश बास्केट
  • वॉल हैंगिंग
  • टेबल और चेयर मैट्स
  • टी-कोस्टर्स
  • ट्रेंडी बैग्स

इन उत्पादों की कीमत भी काफी किफायती रखी गई है ताकि हर वर्ग के लोग इन्हें खरीद सकें। इनके सजावटी सामान की शुरुआती कीमत महज 60 रुपये से शुरू होती है और उत्पादों की जटिलता के अनुसार यह 3 से 4 हजार रुपये तक जाती है। अपने ब्रांड की पहुंच बढ़ाने के लिए यह दंपति ई-कॉमर्स वेबसाइटों के साथ-साथ राजस्थान और पूरे भारत में आयोजित होने वाली प्रदर्शनियों एवं बड़े मेलों में अपने उत्पादों का प्रदर्शन करते हैं।

सामाजिक सशक्तिकरण और महिला रोजगार

इस स्टार्टअप की सबसे बड़ी उपलब्धि व्यापारिक सफलता से कहीं ज्यादा सामाजिक बदलाव है। जूट के फैंसी प्रोडक्ट्स की लगातार बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए मनीष शर्मा ने स्वयं सहायता समूहों (SHGs) और लघु उद्योगों से जुड़ी सैकड़ों महिलाओं को अपने साथ जोड़ा है। ये महिलाएं अपने घरों में रहकर ही इन उत्पादों को कलात्मक ढंग से तैयार करती हैं, जिससे उन्हें नियमित रूप से आय का साधन मिल रहा है। इस पहल ने न केवल इन महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाया है, बल्कि वे पर्यावरण के अनुकूल उत्पादों के निर्माण में अपना बहुमूल्य योगदान भी दे रही हैं। स्थानीय स्तर पर शुरू हुआ यह छोटा सा उपक्रम अब एक बड़े सामाजिक सशक्तिकरण का जरिया बन चुका है, जो जूट उद्योग में नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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