सफलता की कहानी: हाथ से बनी पटियाला जूतियों के जादूगर पवन, 20 हजार से ज्यादा लोग हैं दीवाने झारखंड 3 घंटे पहले 3
झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाले पवन पटियाला जूती बनाने के अपने पारंपरिक हुनर से देशभर में मशहूर हो गए हैं। अपनी मेहनत और हुनर के दम पर उन्होंने 20 हजार से अधिक ग्राहकों का भरोसा जीता है और लोग उन्हें प्यार से 'जूती किंग' कहते हैं।

परंपरा को दिया नया मुकाम

झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाले पवन की कहानी बेहद प्रेरणादायक है। पवन का संबंध पटियाला से है और उनके पूर्वज भी इसी पुश्तैनी काम को पीढ़ियों से करते आ रहे थे। बचपन से ही पवन को पढ़ाई में अधिक लगाव नहीं था, लेकिन उन्होंने अपने घर के बड़े-बुजुर्गों को बेहद बारीकी से जूती बनाते हुए देखा था। उसी हुनर को देखकर पवन ने तय किया कि वह इस कला को न केवल आगे बढ़ाएंगे बल्कि इसे एक नई पहचान भी दिलाएंगे।

मशीन का उपयोग नहीं, कलाकारी पर भरोसा

पवन बताते हैं कि उन्होंने बहुत कम उम्र से ही जूती बनाने की बारीकियां सीखनी शुरू कर दी थीं। हालांकि, शुरुआती दौर में उनका पारिवारिक व्यवसाय इतने बड़े स्तर पर नहीं था। पवन ने बदलते दौर के साथ जूतियों के अलग-अलग डिजाइन तैयार करने पर काम करना शुरू किया। उनकी बनाई जूतियों की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इनमें मशीन का बिल्कुल भी इस्तेमाल नहीं किया जाता। सोल से लेकर फ्लैट सतह और जूतियों पर की जाने वाली जरी की कढ़ाई, फूल-पत्तियों की सजावट और मोर के डिजाइन तक सब कुछ कारीगर अपने हाथों से तैयार करते हैं। यही वजह है कि उनकी जूतियों में एक अलग तरह की जीवंतता और पारंपरिक लुक दिखाई देता है।

हर मौके के लिए खास डिजाइन

पवन के संग्रह में हर अवसर के लिए विकल्प मौजूद हैं। उनके पास महारानी डिजाइन, कट डिजाइन से लेकर ऑफिस में पहनने के लिए सादी और कैजुअल जूतियों की एक लंबी श्रृंखला उपलब्ध है। ग्राहक जब उनके पास आते हैं, तो पवन उनसे उनकी पसंद और जरूरत पूछते हैं। वे इस बात का विशेष ध्यान रखते हैं कि जूती जींस, लहंगे या सलवार-सूट जैसे परिधानों के साथ कैसी दिखेगी। वे ग्राहकों की जरूरत के अनुसार ही उन्हें बेहतरीन विकल्प सुझाते हैं।

पूरे भारत में है पहचान

पवन अपनी कला को लोगों तक पहुंचाने के लिए पूरे भारत में आयोजित होने वाले सरकारी और निजी मेलों में अपने स्टॉल लगाते हैं। उनके द्वारा बनाई गई जूतियों की मांग कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक है। आज उनके पास 20,000 से अधिक ग्राहकों का एक बड़ा आधार है, जो उनकी कारीगरी के मुरीद हैं। पवन बताते हैं कि उनके कारीगर जूतियों को जिस तरह से तैयार करते हैं, उसकी अनूठी बनावट के कारण वैसी दूसरी जोड़ी मिलना लगभग नामुमकिन है। इसी अनोखे हुनर और ग्राहकों के प्यार के कारण लोग उन्हें आज 'जूती किंग' के नाम से संबोधित करते हैं।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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