झारखंड
4 घंटे पहले
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विचारों
हुनर और मेहनत से बदली तकदीर
जीवन यापन के लिए हर व्यक्ति संघर्ष करता है। कई लोग ऐसे होते हैं जो अपनी नौकरी या काम में रुचि नहीं रखते, फिर भी मजबूरी में उसे करते रहते हैं। लेकिन कुछ लोग अपने जुनून को ही अपना पेशा बना लेते हैं। ऐसे ही एक शख्स हैं राजेश, जिन्होंने अपने गुरु से जूती बनाने का बारीक काम सीखा और आज इसे ही अपनी आजीविका का मुख्य जरिया बनाया है। यदि किसी के पास हुनर है, मेहनत करने का जज्बा है और काम के प्रति धैर्य है, तो वह अपने छोटे से कौशल को एक सफल रोजगार में बदल सकता है।
पटियाला की कला और बोकारो में पहचान
पंजाब के पटियाला के मूल निवासी राजेश पिछले करीब 20 वर्षों से हस्तनिर्मित यानी हैंडमेड पंजाबी जूती के व्यवसाय में पूरी तरह सक्रिय हैं। बीते करीब 6 वर्षों से वे लगातार झारखंड के बोकारो शहर में लगने वाले मेलों में अपनी दुकान सजाते आ रहे हैं। राजेश का यह सफर केवल एक शहर तक सीमित नहीं है। वे सालभर देश के विभिन्न हिस्सों में घूम-घूमकर अपने जूतों का कारोबार करते हैं, जो उनकी कमाई का मुख्य आधार है। बोकारो के अलावा वे टाटा, धनबाद, रांची, चाईबासा, चक्रधरपुर और गुमला जैसे प्रमुख शहरों में जाकर भी अपनी जूतियां बेचते हैं।
स्वदेशी उत्पादों का विशेष आकर्षण
राजेश का मानना है कि पटियाला की हाथ से बनी पंजाबी जूतियों की अपनी एक अलग ही मांग और पहचान है। शादियों का सीजन हो, कोई पार्टी हो या फिर लहंगा, पटियाला सूट, पंजाबी सूट और साड़ियों के साथ पहनने के लिए वे अलग-अलग आकर्षक डिजाइन की जूतियां तैयार करवाते हैं। एक खास बात यह है कि राजेश केवल बाजार से तैयार माल लाकर उसे बेचते नहीं हैं, बल्कि वे अपनी व्यक्तिगत निगरानी में पटियाला में इन जूतियों को विशेष तौर पर बनवाते हैं। उनका दावा है कि यह पूरी तरह से स्वदेशी और हस्तनिर्मित उत्पाद है, जिसे बढ़ावा मिलना बेहद आवश्यक है।
गुरु से सीखा हुनर और बढ़ता हुआ रोजगार
अपने अनुभव साझा करते हुए राजेश बताते हैं कि जूती बनाने की कला उन्होंने अपने गुरु से सीखी है। शुरुआत के दिनों में वे घंटों अपने गुरु को काम करते हुए देखते रहते थे। धीरे-धीरे उन्होंने इस काम की बारीकियों को समझा और अपनी कार्यकुशलता बढ़ाई। बाद में उन्हें महसूस हुआ कि इसे एक व्यवसाय के रूप में आगे बढ़ाया जा सकता है। आज उनके परिवार में भले ही वे अकेले इस काम को कर रहे हों, लेकिन उनके इस व्यवसाय से लगभग 8 से 10 लोग सीधे तौर पर पटियाला में जुड़े हुए हैं। अगर कुल मिलाकर देखें, तो वे इस धंधे के माध्यम से लगभग 12 से 13 लोगों को रोजगार उपलब्ध कराने में मदद कर रहे हैं।
कीमत और ग्राहकों का अनुभव
राजेश बताते हैं कि जूतियों की कीमत उनकी डिजाइन और सामग्री की गुणवत्ता के आधार पर निर्धारित की जाती है। कुछ विशेष जूतियों की कीमत करीब 350 रुपये तक होती है। ग्राहकों के प्रति उनका रुख काफी लचीला है, इसलिए वे मेले में खरीदारी करने आने वाले लोगों को विशेष छूट भी देते हैं। इससे आम ग्राहक अपनी पसंद और बजट के हिसाब से खरीदारी कर पाते हैं। बोकारो के लोगों के साथ अपने अनुभव पर वे कहते हैं कि यहां के निवासी बहुत मिलनसार और अच्छे हैं। पिछले 6 वर्षों से मिल रहे सकारात्मक फीडबैक के कारण ही वे बार-बार यहां आने के लिए प्रेरित होते हैं।
चुनौतियां और परिवार की जिम्मेदारी
यह काम राजेश के लिए सिर्फ एक बिजनेस नहीं, बल्कि उनके पूरे परिवार की जीविका का एकमात्र स्रोत है। परिवार की सारी आर्थिक जरूरतें इसी कारोबार से पूरी होती हैं। सालभर अलग-अलग शहरों में रहने के कारण उन्हें अपने परिवार से भी दूर रहना पड़ता है। कई बार लंबे अंतराल के बाद घर वापसी होती है, जिस पर परिजन नाराजगी भी जताते हैं। लेकिन राजेश का मानना है कि बच्चों की पढ़ाई और परिवार की जिम्मेदारियों को पूरा करने के लिए निरंतर काम करना और शहरों का दौरा करना अनिवार्य है।
नए कारोबारियों के लिए सलाह
जो युवा या नए उद्यमी जूती के व्यवसाय में कदम रखना चाहते हैं, उन्हें राजेश धैर्य रखने की सलाह देते हैं। उनका कहना है कि किसी भी नए काम की शुरुआत में कड़ी मेहनत और धैर्य का होना सबसे महत्वपूर्ण है। ग्राहकों के साथ कभी भी झगड़ा या विवाद नहीं करना चाहिए। इसके बजाय, उनसे विनम्रता से बात करनी चाहिए और अपने उत्पाद की खूबियां व मेहनत को उन्हें समझाना चाहिए। राजेश का अपना अनुभव यही है कि यदि आप अपने काम और मेहनत पर भरोसा रखते हैं, तो सफलता निश्चित रूप से मिलती है।
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