उपनाम: छपरा
छपरा का आधुनिक कृषि मॉडल: हेमंत सिंह एक ही जमीन से कमा रहे हैं मोटा मुनाफा
बिहार के छपरा जिले में हेमंत सिंह ने खेती का एक अनूठा तरीका अपनाया है, जहाँ वे एक ही खेत में सब्जी, फल और कीमती लकड़ी के पेड़ उगाकर बेहतरीन कमाई कर रहे हैं।
सफलता की कहानी: कभी मजदूरी करते थे इमाम अली, आज खुद की फैक्ट्री से देश भर में भेज रहे बेकरी मशीनें
छपरा के रहने वाले इमाम अली ने तंगहाली के कारण कम उम्र में ही पढ़ाई छोड़ दी थी, लेकिन कड़ी मेहनत और हुनर के दम पर आज वे खुद का मैन्युफैक्चरिंग उद्योग चला रहे हैं।
सिक्की घास ने बदली छपरा की महिलाओं की किस्मत, घर बैठे कर रहीं हजारों की कमाई
छपरा के ग्रामीण इलाकों में महिलाएं जीविका परियोजना की मदद से सिक्की घास से बेहतरीन हस्तशिल्प उत्पाद बना रही हैं। स्थानीय मेलों और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स के जरिए इन उत्पादों की भारी मांग है, जिससे महिलाएं आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन रही हैं।
जीविका योजना का कमाल: घर की चारदीवारी के अंदर आत्मनिर्भर बनीं छपरा की महिलाएं, खुद उठा रही हैं बच्चों की पढ़ाई का खर्च
बिहार के छपरा जिले के गरखा प्रखंड में जीविका योजना ने महिलाओं की जिंदगी बदल दी है। घर से बाहर निकले बिना ही महिलाएं सिलाई और अन्य छोटे व्यवसायों से जुड़कर न केवल आर्थिक तंगी दूर कर रही हैं, बल्कि अपने बच्चों की स्कूल फीस भी खुद भर रही हैं।
बिहार के शुभम का कमाल: कैंडी क्रश में 22,222 का रिकॉर्ड पीछे छोड़ा, अब 23,165 लेवल पर पहुंचे
बिहार के छपरा के रहने वाले 19 वर्षीय शुभम कुमार ने कैंडी क्रश सागा में अंतरराष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाने के बाद भी अपना सफर जारी रखा है। उन्होंने किशोर वर्ग में रिकॉर्ड बनाने के बाद अब 23,165वें लेवल को पार कर लिया है।
सारण में खूनी संघर्ष: चाकूबाजी में 3 लोगों की दर्दनाक मौत, एक गंभीर रूप से घायल
बिहार के सारण जिले में एकमा थाना क्षेत्र के अंतर्गत चाकूबाजी की एक भीषण घटना सामने आई है, जिसमें तीन लोगों की जान चली गई है और एक व्यक्ति को गंभीर हालत में पटना भेजा गया है।
छपरा की चंपा देवी की सफलता की कहानी: 10 बकरियों से शुरू किया सफर और खड़ा कर लिया अपना खुद का कारोबार
बिहार के छपरा जिले में रहने वाली चंपा देवी ने जीविका योजना के जरिए अपनी जिंदगी बदल दी है। मजदूरी का काम छोड़कर उन्होंने बकरी पालन के व्यवसाय को अपनाया और आज वह आत्मनिर्भर बन चुकी हैं।
छपरा में खेती का कमाल, बंजर पड़ी जमीन पर लहलहाई मखाने की फसल
छपरा के जलालपुर में अनुपयोगी मानी जाने वाली जमीन पर मखाने की सफल खेती का ट्रायल पूरा हो गया है। कृषि विशेषज्ञों की सलाह पर की गई इस नई पहल से किसानों को अच्छी कमाई और स्थानीय लोगों को रोजगार मिलने की उम्मीद है।
पशुपालकों के लिए वरदान है नेपियर घास, गन्ने जैसी खेती से सालभर मिलेगा हरा चारा और बढ़ेगा दूध
छपरा के एक किसान ने नेपियर घास की खेती अपनाकर न केवल पशुओं के चारे का खर्च घटाया है, बल्कि दुधारू गायों के स्वास्थ्य और दूध उत्पादन में भी शानदार बढ़ोतरी दर्ज की है।
छपरा के किसान की अनूठी पहल, खेतों की मेड़ पर उगा दी शानदार मौसमी
बिहार के छपरा जिले के एक किसान ने पारंपरिक खेती से हटकर मौसमी की बागवानी में सफलता पाई है। कृषि विज्ञान केंद्र से प्रशिक्षण लेकर उन्होंने अपने खेत की मेड़ पर मौसमी के पौधे लगाए, जो अब बंपर पैदावार दे रहे हैं।
छपरा के एकमा में राजेश के 5 फ्लेवर वाले पकौड़ों की धूम, 3 खास चटनियों के साथ मिलता है लाजवाब स्वाद
छपरा-सिवान मार्ग पर स्थित एकमा बाजार में राजेश पिछले 10 सालों से अपने हाथ से बने मसालों और शुद्ध बेसन से तैयार 5 तरह के पकौड़े परोस रहे हैं, जिसे लोग बेहद पसंद करते हैं।
छपरा का मशहूर पेड़ा: शुद्धता और स्वाद का ऐसा जादू कि सऊदी अरब तक है भारी डिमांड
बिहार के छपरा जिले के देवरिया बाजार में तैयार होने वाले विशेष पेड़े ने अपनी शुद्धता और लाजवाब स्वाद के दम पर अंतरराष्ट्रीय पहचान बना ली है।
छपरा के नरेंद्र सिंह ने अपनी छत को बनाया हरा-भरा बगीचा, उगाए हजारों औषधीय और फलदार पौधे
अगर आपके पास बागवानी के लिए जमीन की कमी है, तो छपरा के नरेंद्र सिंह का मॉडल आपके लिए एक बेहतरीन प्रेरणा है। उन्होंने अपनी छत को ही फलों, फूलों और औषधीय पौधों से लदा एक विशाल बगीचा बना दिया है।
छपरा के किसान ऑर्गेनिक खेती से बदल रहे किस्मत, लौकी और करेला की उपज से कमा रहे तगड़ा मुनाफा
बिहार के छपरा जिले में किसान पारंपरिक फसलों को छोड़कर ऑर्गेनिक तरीके से नकदी फसलों की ओर रुख कर रहे हैं, जिससे उन्हें प्रति एकड़ 20 से 30 हजार रुपये तक की मासिक आमदनी हो रही है।
अगर घर में नहीं है खेती की जमीन, तो छत पर उगाएं फल और सब्जियां, छपरा के नरेंद्र सिंह से सीखें बागवानी का हुनर
छपरा के रहने वाले नरेंद्र सिंह ने साबित कर दिया है कि बागवानी के लिए जमीन का होना जरूरी नहीं है। उन्होंने अपनी छत पर ही हजारों औषधीय और फलदार पौधे लगाकर एक अनूठा उदाहरण पेश किया है।