अगर घर में नहीं है खेती की जमीन, तो छत पर उगाएं फल और सब्जियां, छपरा के नरेंद्र सिंह से सीखें बागवानी का हुनर बिहार 2 घंटे पहले 3
छपरा के रहने वाले नरेंद्र सिंह ने साबित कर दिया है कि बागवानी के लिए जमीन का होना जरूरी नहीं है। उन्होंने अपनी छत पर ही हजारों औषधीय और फलदार पौधे लगाकर एक अनूठा उदाहरण पेश किया है।

छत को बनाया हरा-भरा बगीचा

अगर आपके पास खेती करने के लिए जमीन नहीं है या आप बागवानी के शौकीन हैं लेकिन जगह की कमी से जूझ रहे हैं, तो अब आपको मायूस होने की आवश्यकता नहीं है। छपरा के रहने वाले नरेंद्र सिंह ने अपनी मेहनत और इच्छाशक्ति के दम पर यह साबित कर दिया है कि घर की छत ही एक शानदार बगीचा बन सकती है। उन्होंने अपने घर की छत पर हजारों की संख्या में फल, फूल और औषधीय पौधों को लगाकर एक अनूठी मिसाल पेश की है। उनकी यह बागवानी तकनीक अब न केवल चर्चा का विषय बनी हुई है, बल्कि कई लोगों के लिए प्रेरणा भी बन गई है।

घर के हर कोने में हरियाली

नरेंद्र सिंह के बागवानी प्रेम की झलक उनके घर के प्रवेश द्वार से लेकर पूरी छत तक देखी जा सकती है। उन्होंने अपने घर को प्रकृति के करीब लाने के लिए किसी भी कोने को खाली नहीं छोड़ा है। उन्होंने छत पर विभिन्न प्रकार के गमलों और विशेष कंटेनरों का उपयोग करके सैकड़ों पौधे लगाए हैं। इन पौधों में न केवल मौसमी फूल शामिल हैं, बल्कि औषधीय पौधे और फल देने वाले पेड़ भी बड़ी संख्या में मौजूद हैं। यह प्रयास दिखाता है कि यदि व्यक्ति के अंदर बागवानी का जुनून हो, तो सीमित जगह भी बाधक नहीं बनती है।

दूर-दूर से आते हैं सीखने वाले

नरेंद्र सिंह द्वारा छत पर विकसित की गई यह बागवानी अब उनके घर तक ही सीमित नहीं रही है। उनकी इस सफलता को देखने और बागवानी की बारीकियां सीखने के लिए लोग दूर-दराज के क्षेत्रों से छपरा पहुंच रहे हैं। बिहार के विभिन्न जिलों के अलावा पटना, हाजीपुर और पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश से भी कई लोग उनसे टिप्स लेने आते हैं। उनकी बगिया को देखने वालों की भीड़ अब यह साबित करती है कि टेरेस गार्डनिंग का चलन लोगों के बीच तेजी से बढ़ रहा है।

बागवानी के लिए जरूरी सुझाव

नरेंद्र सिंह के अनुसार, यदि किसी के पास खेती के लिए खेत उपलब्ध नहीं है, तो निराश होने के बजाय घर की छत का सही इस्तेमाल करना चाहिए। बागवानी शुरू करने के लिए कुछ बातों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है:

  • सही देखभाल: पौधों को समय पर पानी देना और उनकी नियमित देखभाल करना अनिवार्य है।
  • जल निकासी: छत पर बागवानी करते समय जल निकासी यानी ड्रेनेज का विशेष ध्यान रखें, ताकि छत पर पानी जमा न हो और उसे कोई नुकसान न पहुंचे।
  • विविधता: आप अपनी छत पर आसानी से मौसमी सब्जियां, फल और औषधीय पौधे उगा सकते हैं।

नरेंद्र सिंह का यह सफल मॉडल उन सभी शहरी और ग्रामीण निवासियों के लिए एक प्रेरणा का स्रोत बन गया है, जो जगह की कमी के कारण अपने गार्डनिंग के शौक को पूरा नहीं कर पा रहे थे। उनका यह अनोखा प्रयोग यह संदेश देता है कि इच्छाशक्ति हो तो आप कहीं भी हरियाली ला सकते हैं और प्रकृति के करीब रह सकते हैं।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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