भारत
3 घंटे पहले
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खेती में बदलाव की नई कहानी
बिहार के छपरा जिले में खेती की तस्वीर अब धीरे धीरे बदल रही है। यहां के किसान पारंपरिक रूप से नकदी फसलों और सब्जियों की खेती करते आए हैं, लेकिन अब बागवानी के प्रति उनका रुझान काफी तेजी से बढ़ा है। जिले के किसान अब आम, अमरूद और केले जैसे फलों के साथ साथ मौसमी जैसी बागवानी फसलों की ओर भी आकर्षित हो रहे हैं। दरियापुर प्रखंड के खानपुर गांव के रहने वाले रणजीत सिंह ने अपने नवाचार से यह साबित किया है कि सही जानकारी और लगन से खेती को मुनाफे का सौदा बनाया जा सकता है। उन्होंने अपने खेत की मेड़ पर मौसमी के पौधे लगाए थे, जो आज शानदार पैदावार दे रहे हैं।
प्रशिक्षण से मिली सफलता की राह
किसान रणजीत सिंह की इस सफलता के पीछे कृषि वैज्ञानिकों का मार्गदर्शन प्रमुख है। उन्होंने मांझी कृषि विज्ञान केंद्र से बागवानी का विशेष प्रशिक्षण लिया था। इस प्रशिक्षण के दौरान उन्हें मौसमी की वैज्ञानिक खेती और इसके रख रखाव से जुड़ी बारीकियों की विस्तृत जानकारी मिली। इसी प्रशिक्षण के दौरान मिले प्रोत्साहन के बाद उन्होंने अपने बागवानी के सपने को हकीकत में बदलने का फैसला किया। हाजीपुर की एक नर्सरी से उन्होंने 50 रुपये प्रति पौधे की दर से लगभग 15 पौधे खरीदे थे। आज करीब ढाई से तीन साल की मेहनत के बाद उनके द्वारा लगाए गए ये पौधे फल देने के लिए तैयार हैं और उन पर बंपर फलन हो रहा है।
बाजार की मौसमी से बेहतर गुणवत्ता
रणजीत सिंह ने बताया कि अभी यह केवल एक ट्रायल था, लेकिन जो नतीजे सामने आए हैं, वे बेहद उत्साहजनक हैं। उनके खेतों में उगी मौसमी का आकार बाजार में बिकने वाली सामान्य मौसमी से काफी बड़ा है और स्वाद में यह कहीं अधिक मीठी है। प्राकृतिक तरीके से उगाई गई इस मौसमी की मिठास और गुणवत्ता ने क्षेत्र के लोगों को भी प्रभावित किया है। उन्होंने बताया कि जिस समय उन्होंने ये पौधे रोपे थे, तब उन्हें यह उम्मीद थी कि धीरे धीरे ये पौधे बड़े होंगे और एक दिन अच्छी पैदावार देंगे। आज उनकी मेहनत रंग ला रही है और पेड़ों पर लगे मौसमी के लदे हुए फल उनकी खुशी का जरिया बन गए हैं।
भविष्य के लिए बड़े बागवानी प्रोजेक्ट की तैयारी
रणजीत सिंह अब इस सफल प्रयोग को केवल अपने खेत तक ही सीमित नहीं रखना चाहते हैं। उन्होंने भविष्य के लिए बड़े पैमाने पर बागवानी करने की योजना तैयार कर ली है। उनका मानना है कि अगर अन्य किसान भी इस तरह की खेती को अपनाएं, तो वे अपनी आय में काफी बढ़ोतरी कर सकते हैं। वे अब अपने इस छोटे से प्रोजेक्ट को विस्तार देने की दिशा में काम कर रहे हैं। अगले सीजन में पेड़ों पर फलों की संख्या और अधिक बढ़ने की उम्मीद है, जिससे उनकी कमाई में भी इजाफा होगा। छपरा के सारण जिले के किसानों के लिए रणजीत सिंह का यह प्रयोग किसी प्रेरणा से कम नहीं है, जो यह दर्शाता है कि मेहनत और सही दिशा में प्रयास करने से खेती में भी सफलता की नई इबारत लिखी जा सकती है।
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