उपनाम: भारतीय राजनीति
कर्नाटक की राजनीति से किनारा करने की तैयारी में सिद्धारमैया, 2028 में चुनाव नहीं लड़ने का किया ऐलान
कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने घोषणा की है कि वह 2028 का विधानसभा चुनाव नहीं लड़ेंगे, जिसका मुख्य कारण बिगड़ती सेहत और राजनीति में व्याप्त भ्रष्टाचार है। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया है कि वह चुनावी राजनीति से संन्यास लेने के बावजूद सामाजिक...
2027 का चुनावी संग्राम: क्या विकास के मुद्दों पर भारी पड़ेगा धर्म का कार्ड
साल 2027 में होने वाले सात राज्यों के विधानसभा चुनाव भारतीय राजनीति के लिए एक बड़े टेस्ट की तरह हैं, जहां महंगाई और बेरोजगारी जैसे जमीन से जुड़े मुद्दे सत्ता के समीकरण बदल सकते हैं।
डीलिमिटेशन बिल: जादुई आंकड़े 360 से एनडीए की दूरी, क्या मानसून सत्र में बदलेगा सियासी गणित?
संसद के मानसून सत्र से पहले परिसीमन विधेयक को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। एनडीए सरकार के लिए दो-तिहाई बहुमत का आंकड़ा हासिल करना एक बड़ी चुनौती बनी हुई है, जिस पर सबकी निगाहें टिकी हैं।
आत्महत्या की बात सुनकर हिल गए थे एसवाई कुरैशी, मनमोहन सिंह का वह किस्सा जो अब आया सामने
पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एसवाई कुरैशी ने अपनी किताब के जरिए एक पुरानी घटना का जिक्र किया है, जब तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह अपने मंत्रियों के व्यवहार से इतने दुखी हो गए थे कि उन्होंने आत्महत्या तक का जिक्र कर दिया था। यह मामला 2012 के उत्तर प्रदेश व...
आत्महत्या की धमकी क्यों दी थी मनमोहन सिंह ने? पूर्व चुनाव आयुक्त की किताब में बड़ा खुलासा
पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह का एक चौंकाने वाला बयान सामने आया है, जिसमें उन्होंने चुनाव आयोग की गरिमा बनाए रखने के लिए बेहद भावुक टिप्पणी की थी। यह खुलासा पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एसवाई कुरैशी ने अपनी आत्मकथा में किया है।
क्या देश की राजनीति में आने वाला है बड़ा बदलाव? TMC और NCP में मचे घमासान पर कुरुक्षेत्र में मंथन
कॉफी पर कुरुक्षेत्र कार्यक्रम में ममता बनर्जी की टीएमसी और शरद पवार की एनसीपी में जारी आंतरिक कलह समेत देश की प्रमुख राजनीतिक हलचलों पर विस्तार से चर्चा की गई।
एमपी-एमएलए कोर्ट क्या होते हैं और नेताओं की सदस्यता पर इनका क्या असर पड़ता है
देश में राजनेताओं से जुड़े आपराधिक मामलों की सुनवाई के लिए विशेष एमपी-एमएलए अदालतों का गठन किया गया है। जानिए यह सिस्टम कैसे काम करता है और कब एक नेता की कुर्सी खतरे में आ सकती है।
क्या आपके पास पासपोर्ट है, तो आप भारतीय नागरिक हैं? विदेश मंत्रालय के बयान से क्यों मचा सियासी घमासान
विदेश मंत्रालय द्वारा पासपोर्ट को नागरिकता का अंतिम प्रमाण न मानने के बयान पर विपक्ष ने तीखे हमले किए हैं। कानूनी जानकारों का कहना है कि पासपोर्ट और नागरिकता अधिनियम दो अलग-अलग कानून हैं, और फर्जी दस्तावेजों के बढ़ते मामलों के बीच अदालतों ने भी पासपोर्ट क...
विश्वनाथ प्रताप सिंह: साहसी फैसलों के राजा, जिन्होंने मंडल आयोग लागू कर बदली देश की राजनीति
भारत के पूर्व प्रधानमंत्री वीपी सिंह को उनके बेबाक और साहसी फैसलों के लिए याद किया जाता है। उन्होंने अन्य पिछड़ा वर्ग को आरक्षण देने और देश को पहला मुस्लिम गृहमंत्री देने जैसे कदम उठाए, लेकिन राजनीतिक विडंबना रही कि उन्हें कभी ओबीसी का सर्वमान्य नायक नहीं...
क्षेत्रीय दलों का 'भविष्य' शरद पवार ने दो साल पहले ही भांप लिया था, टीएमसी-एनसीपी को लेकर कही थी बड़ी बात
तृणमूल कांग्रेस के कांग्रेस में विलय की अटकलों के बीच शरद पवार का दो साल पुराना बयान फिर चर्चा में है, जिसमें उन्होंने कहा था कि आने वाले वर्षों में कई क्षेत्रीय दल कांग्रेस के करीब आ सकते हैं या उसमें विलय पर विचार कर सकते हैं।
कॉफी पर कुरुक्षेत्र: क्षेत्रीय दलों की सियासी समझ पर राहुल गांधी की टिप्पणी क्या विपक्ष को महंगी पड़ेगी? पढ़ें पूरी बहस
INDI गठबंधन की हालिया बैठक में राहुल गांधी की कथित टिप्पणियों के बाद विपक्षी खेमे में नेतृत्व, रणनीति और आपसी भरोसे को लेकर नई बहस छिड़ गई है। 'कॉफी पर कुरुक्षेत्र' में पैनलिस्टों ने इन बयानों के संभावित असर पर मंथन किया।
ममता की तरह इंदिरा गांधी से भी छिनी थी पार्टी की कमान, फिर भी की धमाकेदार वापसी — 'दीदी' के लिए बड़ा सबक
पश्चिम बंगाल में टीएमसी के भीतर बगावत और ममता बनर्जी के घटते नियंत्रण के बीच इंदिरा गांधी का दौर याद आता है, जिन्हें दो बार पार्टी से निकाला गया मगर उन्होंने जनता के भरोसे हर बार ताकतवर वापसी की। जानिए इस इतिहास से ममता के लिए क्या सीख निकलती है।
मोदी का संदेश: रील बनाने से वोट नहीं मिलते, अभी और रिकॉर्ड टूटने बाकी हैं
विविधता और गठबंधन की राजनीति वाले देश में 12 साल तक लगातार जनता का भरोसा जीतना बड़ी बात है। साथ ही ममता की पार्टी में टूट, और पाक अधिकृत कश्मीर में फौज के खिलाफ बगावत की तस्वीर।
कॉफी पर कुरुक्षेत्र: नेहरू का रिकॉर्ड पीछे छूटा, चर्चा में मोदी की सियासी विरासत
एक परिचर्चा में जानकारों ने प्रधानमंत्री मोदी के राजनीतिक सफर, बढ़ते जनाधार और एनडीए के विस्तार पर बात की। चर्चा में बंगाल से लेकर वैश्विक मंच तक मोदी की भूमिका को रेखांकित किया गया।
मोदी का नया कीर्तिमान: चाय बेचने वाले ने तोड़ा बैरिस्टर नेहरू का रिकॉर्ड
नरेंद्र मोदी देश के सबसे लंबे समय तक लगातार सेवा देने वाले निर्वाचित प्रधानमंत्री बन गए हैं और उन्होंने पंडित नेहरू के 4,398 दिन के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया। इसके साथ ही मध्य प्रदेश राज्यसभा चुनाव और बंगाल में तृणमूल नेताओं के खिलाफ जनाक्रोश भी चर्चा में...