अटल बिहारी वाजपेयी की पुण्यतिथि: सदैव अटल पर पीएम मोदी ने तोड़ा प्रोटोकॉल, वेंकैया नायडू को दिया खास सम्मान राष्ट्रीय राजनीति 2 घंटे पहले 7
भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी की पुण्यतिथि पर नई दिल्ली में एक भावुक पल देखने को मिला, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रोटोकॉल का पालन करने के बजाय पूर्व उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू को पहले श्रद्धांजलि देने का आग्रह किया।

सदैव अटल पर दिखी पीएम मोदी की सादगी

भारत के पूर्व प्रधानमंत्री और दिग्गज नेता भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी की पुण्यतिथि के अवसर पर दिल्ली स्थित उनके समाधि स्थल सदैव अटल पर देश के शीर्ष नेतृत्व ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान एक ऐसा दृश्य सामने आया जिसने वहां मौजूद सभी लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राजनीति और शिष्टाचार की एक नई मिसाल पेश करते हुए पूर्व उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू के लिए प्रोटोकॉल को पीछे छोड़ दिया। यह घटना न केवल पीएम मोदी के व्यक्तित्व की गहराई को दर्शाती है, बल्कि बड़ों के प्रति उनके सम्मान को भी उजागर करती है।

श्रद्धांजलि कार्यक्रम में उमड़ी दिग्गजों की भीड़

रविवार को दिल्ली के राजघाट स्थित सदैव अटल समाधि स्थल पर आयोजित कार्यक्रम में देश की कई प्रमुख हस्तियां शामिल हुईं। कार्यक्रम में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ-साथ पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद और पूर्व उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। आमतौर पर सरकारी कार्यक्रमों में प्रोटोकॉल का सख्ती से पालन किया जाता है, जिसके अनुसार राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति और फिर प्रधानमंत्री द्वारा श्रद्धांजलि देने का क्रम तय होता है। हालांकि, इस बार स्थिति कुछ अलग रही।

प्रोटोकॉल से ऊपर रहा बड़ों का सम्मान

जैसे ही प्रधानमंत्री मोदी की बारी आई, उन्होंने एक ऐसी सहजता दिखाई जिसकी चर्चा अब हर तरफ हो रही है। जब पूर्व उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू श्रद्धांजलि देने के लिए आगे बढ़े, तो उन्हें प्रोटोकॉल का ध्यान आया और वे रुक गए। उन्होंने पीछे से आ रहे पीएम मोदी को संकेत दिया कि वे पहले आगे बढ़ें। लेकिन, पीएम मोदी ने हाथ जोड़कर और उन्हें कंधे से पकड़कर विनम्रतापूर्वक आगे बढ़ने का आग्रह किया। यह क्षण भारतीय राजनीति की उस परंपरा को दर्शाता है जहाँ वरिष्ठता और अनुभव को प्रोटोकॉल से कहीं अधिक महत्त्व दिया जाता है। वेंकैया नायडू, जो भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी रह चुके हैं, अटल बिहारी वाजपेयी, लालकृष्ण आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी जैसे दिग्गजों के दौर के प्रमुख नेता रहे हैं। प्रधानमंत्री का यह आचरण यह स्पष्ट करता है कि वे आज भी अपने वरिष्ठ सहयोगियों को कितना सम्मान देते हैं।

देशभर में वाजपेयी को याद किया गया

अटल बिहारी वाजपेयी की पुण्यतिथि के मौके पर पूरे देश ने उन्हें नमन किया। दिल्ली में इस कार्यक्रम के दौरान पूर्व उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने अटल कैंटीन का औपचारिक शुभारंभ भी किया। इस आयोजन में भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन, विभिन्न केंद्रीय मंत्री, कई वरिष्ठ नेता और दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता भी मौजूद थीं। इस अवसर पर सभी गणमान्य लोगों ने बारी-बारी से समाधि पर पुष्प अर्पित किए और देश के इस महान राजनेता को अपनी श्रद्धांजलि दी।

अटल जी की विरासत: प्रेरणा का एक अटूट स्रोत

देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सबसे पहले समाधि स्थल पर पहुंचकर अटल जी को श्रद्धांजलि दी। इसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वहां पहुंचकर पुष्प चक्र अर्पित किया। सोशल मीडिया के माध्यम से भी प्रधानमंत्री ने अटल जी के योगदान को याद करते हुए उन्हें एक दूरदर्शी राजनेता बताया। वाजपेयी जी का संपूर्ण जीवन, उनका राजनीतिक सफर और उनके विचार आज की युवा पीढ़ी के लिए मार्गदर्शन का काम करते हैं। वे केवल एक कुशल वक्ता या नेता नहीं थे, बल्कि वे राजनीति में सर्वमान्य व्यक्तित्व थे जिन्हें विपक्षी दल भी पूरी श्रद्धा के साथ देखते थे।

अजातशत्रु अटल और उनके क्रांतिकारी फैसले

अटल बिहारी वाजपेयी को भारतीय राजनीति का अजातशत्रु कहा जाता है। उनके शासनकाल में भारत ने ऐसे अनेक ऐतिहासिक फैसले लिए, जिन्होंने देश की दिशा और दशा बदल दी। परमाणु शक्ति संपन्न भारत का निर्माण हो या स्वर्णिम चतुर्भुज जैसी महत्वाकांक्षी सड़क परियोजना, अटल जी की दूरदृष्टि हमेशा देश के विकास पर केंद्रित रही। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के माध्यम से उन्होंने ग्रामीण भारत को मुख्य शहरों से जोड़ने का काम किया। कारगिल युद्ध के दौरान उनके कुशल नेतृत्व ने न केवल देश का गौरव बढ़ाया, बल्कि वैश्विक मंच पर भारत की एक मजबूत छवि भी पेश की।

आधुनिक भारत की बुनियाद

भले ही आज अटल बिहारी वाजपेयी हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनके द्वारा दिया गया नारा जय जवान, जय किसान, जय विज्ञान आज भी भारत के विकास की यात्रा को ऊर्जा दे रहा है। उनकी वाक्पटुता, उनकी कविताएं और संसद के भीतर उनके ओजस्वी भाषण आज भी इतिहास के सुनहरे पन्नों में दर्ज हैं। उनका राजनीतिक जीवन हमें यह सिखाता है कि किस प्रकार कठोर कूटनीति और मधुर संवाद का संतुलन बनाकर राष्ट्र निर्माण किया जा सकता है। उनकी नीतियां आज भी भारत की उन्नति के आधार स्तंभों के रूप में मजबूती से खड़ी हैं।

देवेंद्र पांडेय पाबना के राजनीतिक संवाददाता हैं और राष्ट्रीय राजनीति, सरकार तथा नीतियों पर रिपोर्टिंग करते हैं। चुनाव, संसद और बड़े सियासी घटनाक्रमों का वे गहराई से विश्लेषण करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित होती है।

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