भारत
40 मिनट पहले
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किताब के प्रकाशन को लेकर बढ़ा विवाद
कांग्रेस के लिए एक बार फिर से एक बड़ी मुश्किल सामने आई है, जिसका संबंध सोनिया गांधी की बहुप्रतीक्षित आत्मकथा Belonging: A Journey of Love से जुड़ा है। जानकारी के अनुसार, पब्लिशर पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया ने इस पुस्तक को छापने से साफ इनकार कर दिया है। इस विवाद की मुख्य वजह किताब के कुछ हिस्सों में संपादन संबंधी बदलाव करने और विशिष्ट पैराग्राफ को हटाने को लेकर हुई तनातनी है। पब्लिशर की इस शर्त को सोनिया गांधी ने मानने से साफ मना कर दिया, जिसके परिणाम स्वरूप प्रकाशन संस्था ने किताब को पब्लिश करने का विचार त्याग दिया है।
प्रकाशन रोकने की वजह और प्रक्रिया
इस किताब की रिलीज की तारीख शुरुआती तौर पर 10 नवंबर निर्धारित की गई थी। अब कांग्रेस पार्टी की तरफ से यह तीखा सवाल उठाया जा रहा है कि जिन आपत्तियों को लेकर पेंगुइन बुक्स ने भारत में कदम पीछे खींचे, वही आपत्तियां दुनिया के अन्य हिस्सों में प्रकाशन के समय क्यों नहीं सामने आई थीं। हालांकि, पब्लिशर ने इस पूरे मामले पर अपनी ओर से एक आधिकारिक बयान जारी कर सफाई देने का प्रयास किया है, लेकिन कांग्रेस इसे अभिव्यक्ति की आजादी पर सीधा प्रहार बता रही है।
वर्तमान समय में किसी भी पुस्तक के प्रकाशन की प्रक्रिया बेहद जटिल होती है, जहां लेखक द्वारा लिखी गई सामग्री को ज्यों का त्यों नहीं छापा जाता है। एक सामान्य प्रक्रिया के तहत, हर पब्लिशर अपनी साख और कानूनी बचाव के लिए पूरी पांडुलिपि को एक कानूनी फर्म के पास भेजता है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना होता है कि भविष्य में किसी तरह का कानूनी विवाद न पैदा हो। सोनिया गांधी की इस किताब के साथ भी ठीक वैसा ही हुआ। पब्लिशर ने सामग्री का फैक्ट चेक करवाया और लेखिका को कुछ सुधारों का सुझाव दिया था। जब सोनिया गांधी ने उन सुझावों पर अमल करने से इंकार किया, तो पब्लिशर ने किसी भी कानूनी जोखिम से बचने के लिए प्रकाशन से दूरी बना ली। चूंकि यह किताब सोनिया गांधी जैसे बड़े राजनीतिक व्यक्तित्व से संबंधित है, इसलिए यह मामला तूल पकड़ता जा रहा है।
क्या है किताब में खास?
यह पुस्तक सोनिया गांधी की निजी जीवन यात्रा है, जिसमें इटली के एक छोटे से कस्बे में बीते उनके बचपन से लेकर भारत में उनके सफर तक की झलक देखने को मिलती है। इस आत्मकथा में उनके राजीव गांधी के साथ विवाह और तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की बहू के रूप में बिताए गए अनुभवों का विस्तार से वर्णन किया गया है। सोनिया गांधी के मुताबिक, जब उन्होंने राजनीति से दूरी बनाने के बाद अपने जीवन पर गौर किया, तो उन्हें महसूस हुआ कि उनके हर पड़ाव को जोड़ने वाली मुख्य कड़ी प्रेम और निष्ठा रही है। उन्होंने अपनी इस यात्रा को इटली के छोटे से कस्बे की सरलता और भारत में बिताए वर्षों की जटिलताओं के बीच का एक सफर बताया है।
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