स्वस्थ जीवन जीने के लिए थाली में क्या शामिल करें? जानिए ऑन्कोलॉजिस्ट की महत्वपूर्ण सलाह स्वास्थ्य एक घंटा पहले 3
लंबे समय तक फिट और बीमारियों से दूर रहने के लिए खान-पान में सुधार करना सबसे जरूरी है। कैंसर हीलर सेंटर के निदेशक और ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. कृष्णा तरंग ने हेल्दी डाइट के लिए खास सुझाव दिए हैं।

स्वस्थ रहने के लिए आहार में बदलाव की जरूरत

आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में अगर आप लंबे समय तक स्वस्थ और बीमारियों से मुक्त रहना चाहते हैं, तो आपको अपनी जीवनशैली और मुख्य रूप से खान-पान पर ध्यान देना होगा। कैंसर हीलर सेंटर के निदेशक और ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. कृष्णा तरंग का कहना है कि एक सही डाइट न केवल शरीर को ऊर्जा देती है, बल्कि कई गंभीर बीमारियों से लड़ने में भी सक्षम बनाती है। उन्होंने कुछ विशेष खाद्य पदार्थों की सूची साझा की है जिन्हें आपको अपनी दैनिक थाली का अनिवार्य हिस्सा बनाना चाहिए।

डाइट में इन खाद्य पदार्थों को दें प्राथमिकता

  • हरी और क्रूसिफेरस सब्जियां: अपनी रोजमर्रा की डाइट में ब्रोकोली, शलगम, मूली, सरसों का साग, फूलगोभी और पत्ता गोभी को जरूर शामिल करें। ये सब्जियां क्रूसिफेरस परिवार से संबंधित हैं और पोषक तत्वों का पावरहाउस हैं। इनमें भरपूर मात्रा में विटामिन सी, विटामिन के, विटामिन ए, पोटेशियम, फोलेट और कैल्शियम होता है। ये तत्व न केवल शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाते हैं, बल्कि ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस को कम करके कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों के खतरे को कम करने में भी बहुत मददगार साबित होते हैं।
  • एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटी-ऑक्सीडेंट्स युक्त फल: डॉ. तरंग के अनुसार, अपनी डाइट में रंग-बिरंगे फलों और बेरीज को शामिल करना चाहिए। गहरे रंग के फलों में मौजूद एंटी-ऑक्सीडेंट्स हानिकारक फ्री रेडिकल्स को नियंत्रित करने में मदद करते हैं। फ्री रेडिकल्स ऐसे अणु होते हैं जो शरीर के डीएनए को नुकसान पहुंचा सकते हैं और कैंसर कोशिकाओं को सक्रिय करने का काम करते हैं। इसके लिए आंवला, जामुन, अनार, ब्लू बेरीज और कच्चे टमाटर का सेवन करना बहुत फायदेमंद है।
  • साबुत अनाज और दालें: पाचन को दुरुस्त रखने और ऊर्जा बनाए रखने के लिए साबुत अनाज जैसे राजमा, अरहर की दाल, चना, लोबिया और ब्राउन राइस का सेवन जरूर करें। साथ ही सादे आटे की जगह मल्टीग्रेन आटे से बनी रोटियों को अपनी डाइट में शामिल करें।
  • हेल्दी फैट्स: डाइट में फैट का नाम सुनकर घबराने की जरूरत नहीं है। रिफाइंड फैट सेहत के लिए नुकसानदेह हो सकता है, लेकिन प्राकृतिक हेल्दी फैट्स शरीर की कार्यप्रणाली के लिए जरूरी हैं। अपने आहार में अखरोट, बादाम, अलसी के बीज और कद्दू के बीज जैसे नट्स और सीड्स को शामिल करें।
  • भारतीय रसोई के मसाले: भारतीय मसालों में औषधीय गुणों का भंडार है। अपने खाने में हल्दी, अदरक, लहसुन, दालचीनी और काली मिर्च का उपयोग करें। इनमें एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण प्रचुर मात्रा में होते हैं जो शरीर में सूजन कम करने में सहायक हैं। इसके अलावा आंतों के स्वास्थ्य और गुड बैक्टीरिया को बढ़ावा देने के लिए भी इन मसालों और खाद्य पदार्थों को डाइट का हिस्सा बनाना चाहिए।
डॉ. आलोक मिश्रा पाबना के स्वास्थ्य संवाददाता हैं और चिकित्सा, बीमारियों तथा वेलनेस से जुड़ी खबरों को प्रामाणिक तरीके से पाठकों तक पहुंचाते हैं। नई रिसर्च, इलाज और रोकथाम पर वे विशेषज्ञों के हवाले से सटीक जानकारी देते हैं। उनका जोर भरोसेमंद और जिम्मेदार स्वास्थ्य पत्रकारिता पर है।

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