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2 घंटे पहले
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अमेरिका का नया प्रस्ताव और भारतीयों की चिंता
अमेरिका में काम करने का सपना देख रहे लाखों भारतीयों के लिए एक बड़ी और चिंताजनक खबर सामने आई है। ट्रंप प्रशासन ने H-1B वीजा को लेकर एक बड़ा कदम उठाने की तैयारी की है, जिससे विदेशी कर्मचारियों की भर्ती प्रक्रिया महंगी हो सकती है। यदि यह प्रस्ताव लागू हो जाता है, तो अमेरिका में नई नौकरी शुरू करने वाले पेशेवरों और उन्हें नियुक्त करने वाली कंपनियों पर वित्तीय बोझ कई गुना बढ़ जाएगा। इस फैसले का सीधा असर उन लोगों पर पड़ेगा जो भारत से अमेरिका जाकर अपने करियर को नई ऊंचाई देना चाहते हैं।
वीजा शुल्क का गणित
अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग ने प्रस्तावित किया है कि नए H-1B वीजा के लिए शुल्क को 1,03,265 डॉलर निर्धारित किया जाए। यदि इसे भारतीय मुद्रा में बदलें, तो यह राशि लगभग 98,86,389 रुपये के आसपास पहुंचती है। पहले यह शुल्क काफी कम, यानी 2,000 डॉलर से 5,000 डॉलर के दायरे में हुआ करता था। इस प्रस्तावित बढ़ोतरी से कंपनियों को एक कर्मचारी को स्पॉन्सर करने के लिए लाखों रुपये अतिरिक्त खर्च करने होंगे, जिससे वे विदेश से प्रतिभाओं को बुलाने के फैसले पर पुनर्विचार करने के लिए मजबूर हो सकती हैं।
भारतीयों पर क्यों है सबसे ज्यादा असर का अंदेशा?
H-1B वीजा कार्यक्रम का लाभ उठाने वालों में भारतीय पेशेवरों की संख्या सबसे अधिक रहती है। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025 में जितने भी H-1B वीजा जारी किए गए, उनमें करीब 70 प्रतिशत भारतीय कर्मचारी शामिल थे। इस सूची में चीन दूसरे स्थान पर है, जिसकी हिस्सेदारी लगभग 12 प्रतिशत है। चूंकि भारतीय इस कार्यक्रम के सबसे बड़े लाभार्थी हैं, इसलिए फीस में किसी भी प्रकार की बढ़ोतरी का सबसे ज्यादा खामियाजा भारतीय आईटी और इंजीनियरिंग पेशेवरों को भुगतना पड़ सकता है।
कौन से मामले रहेंगे इस दायरे से बाहर?
हालांकि यह प्रस्ताव काफी सख्त नजर आ रहा है, लेकिन इसमें कुछ राहत की उम्मीदें भी हैं। अमेरिका के अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि यह बढ़ी हुई फीस हर मामले पर लागू नहीं होगी। इसके दायरे में निम्नलिखित वर्ग नहीं आएंगे:
- अमेरिका में पहले से छात्र वीजा पर रह रहे विदेशी नागरिक जो अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद H-1B वीजा के लिए आवेदन करते हैं।
- मौजूदा H-1B वीजा धारक, जिन्हें अपना वीजा रिन्यू यानी नवीनीकरण करवाना है।
यह फीस मुख्य रूप से उन नई नियुक्तियों पर लागू होगी जहां कंपनियां सीधे दूसरे देशों से पेशेवरों को बुलाकर अमेरिका में काम पर रखना चाहती हैं।
कानूनी पेंच और भविष्य की राह
यह पहली बार नहीं है जब वीजा फीस बढ़ाने की कोशिश की गई हो। इससे पहले भी सरकार ने 1 लाख डॉलर की फीस का प्रस्ताव रखा था, लेकिन उस समय एक सेंट्रल कोर्ट ने इस पर रोक लगा दी थी। फिलहाल वह मामला कानूनी विवादों में उलझा हुआ है। वर्तमान में, सरकार ने इस नए प्रस्ताव को सार्वजनिक राय के लिए रखा है। अगले 30 दिनों तक इस पर जनता और हितधारकों से फीडबैक लिया जाएगा। इसके बाद ही सरकार इसे अंतिम रूप देने या न देने का निर्णय लेगी।
H-1B वीजा का महत्व
बता दें कि H-1B वीजा अमेरिका में एक महत्वपूर्ण प्रणाली है, जिसके माध्यम से अमेरिकी कंपनियां विशेष क्षेत्रों जैसे कि इंजीनियरिंग, तकनीक, शिक्षा, और अनुसंधान में विदेशी कर्मचारियों को नियुक्त करती हैं। हर साल करीब 65,000 सामान्य H-1B वीजा जारी किए जाते हैं। इसके अतिरिक्त, जो उम्मीदवार अमेरिका की किसी मान्यता प्राप्त यूनिवर्सिटी से उच्च डिग्री प्राप्त करते हैं, उनके लिए 20,000 अतिरिक्त वीजा का कोटा निर्धारित होता है। इस पूरी व्यवस्था के महंगा होने से वैश्विक कंपनियों की भर्ती नीति में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
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