पोस्ट ऑफिस की 1 साल की FD पर मिल रहा है इतना ब्याज, वरिष्ठ नागरिकों के लिए क्या है नियम? मेरा पैसा 2 घंटे पहले 2
भारतीय डाक विभाग की बचत योजनाओं में निवेश करना आज भी सुरक्षित माना जाता है। जानिए एक साल की फिक्स्ड डिपॉजिट यानी टाइम डिपॉजिट पर वर्तमान में कितना लाभ मिल रहा है।

पोस्ट ऑफिस में सुरक्षित निवेश की सुविधा

भारतीय डाक विभाग देशभर में डाक सेवाओं के साथ ही निवेश और बैंकिंग सुविधाएं भी प्रदान करता है। बड़ी संख्या में लोग आज भी पोस्ट ऑफिस की बचत योजनाओं पर भरोसा जताते हैं क्योंकि यहां निवेश जोखिम मुक्त माना जाता है। पोस्ट ऑफिस अपनी विभिन्न स्कीमों के माध्यम से ग्राहकों को बैंकों की तुलना में भी प्रतिस्पर्धी रिटर्न देने का प्रयास करता है। कई लोग अपनी बचत को सुरक्षित रखने के लिए पोस्ट ऑफिस में निवेश करना पसंद करते हैं। इस लेख में हम विस्तार से चर्चा करेंगे कि एक साल की अवधि वाली जमा योजना पर वर्तमान में क्या ब्याज दर लागू है।

टाइम डिपॉजिट स्कीम की खासियत

बैंकों की फिक्स्ड डिपॉजिट यानी एफडी की तर्ज पर ही पोस्ट ऑफिस में भी जमा योजनाएं उपलब्ध हैं, जिन्हें तकनीकी भाषा में 'टाइम डिपॉजिट' (TD) कहा जाता है। यह एक ऐसी निवेश पद्धति है जिसमें निवेशक को केवल एक बार एकमुश्त राशि जमा करनी होती है। निवेश की अवधि पूरी होने यानी मैच्योरिटी पर जमाकर्ता को मूलधन के साथ पहले से तय ब्याज दर का लाभ मिलता है। यह योजना उन लोगों के लिए बेहतरीन है जो सुरक्षित और निश्चित रिटर्न की तलाश में रहते हैं।

1 साल की जमा पर ब्याज और वरिष्ठ नागरिकों का गणित

वर्तमान में पोस्ट ऑफिस द्वारा 12 महीने यानी एक साल की टाइम डिपॉजिट स्कीम पर 6.9 प्रतिशत सालाना ब्याज दिया जा रहा है। एक महत्वपूर्ण बात यह है कि पोस्ट ऑफिस सभी आयु वर्ग के ग्राहकों को एक समान ब्याज दर प्रदान करता है। अक्सर बैंकों में वरिष्ठ नागरिकों यानी 60 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों को सामान्य ग्राहकों के मुकाबले ज्यादा ब्याज मिलता है, और कुछ बैंक तो 80 वर्ष से अधिक उम्र के ग्राहकों के लिए अतिरिक्त लाभ भी रखते हैं। लेकिन पोस्ट ऑफिस में वरिष्ठ नागरिकों के लिए ऐसी कोई अलग या विशेष ब्याज दर की सुविधा नहीं है। यहां वरिष्ठ नागरिक भी सामान्य ग्राहकों की तरह ही 6.9 प्रतिशत की दर से ही लाभ प्राप्त करते हैं।

ब्याज दरें कौन तय करता है?

पोस्ट ऑफिस की इन तमाम बचत योजनाओं की ब्याज दरों का निर्धारण पूरी तरह से भारत सरकार के वित्त मंत्रालय के हाथों में होता है। वित्त मंत्रालय हर 3 महीने की अवधि में इन ब्याज दरों की समीक्षा करता है और स्थिति के अनुसार इनमें संशोधन किया जाता है। दूसरी ओर, बैंकों में एफडी की ब्याज दरें भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा निर्धारित रेपो रेट के आधार पर तय होती हैं।

राजीव खन्ना पाबना के व्यापार संवाददाता हैं और कंपनियों, बाजार तथा अर्थव्यवस्था की खबरों को सरल भाषा में समझाते हैं। कारोबार जगत के बड़े फैसलों, नीतिगत बदलावों और उनके आम आदमी पर असर को वे गहराई से कवर करते हैं। उनका मकसद जटिल आर्थिक खबरों को हर पाठक के लिए आसान बनाना है।

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