बिहार
एक घंटा पहले
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विचारों
बासमती धान के किसानों के लिए जरूरी निर्देश
बिहार के पश्चिमी चंपारण जिले में बासमती धान की खेती एक प्रमुख आर्थिक गतिविधि है। चनपटिया, लौरिया, नरकटियागंज, मैनाटांड़, रामनगर और गौनाहा जैसे प्रखंडों में किसान बड़े पैमाने पर इसकी खेती करते हैं। यहां किसान बासमती की कई किस्में उगाते हैं, जिनमें मर्चा धान और दोन धान की मांग और प्राथमिकता सबसे अधिक है। वर्तमान में फसलें खेतों में खड़ी हैं और लगातार बढ़ रही हैं। हालांकि, हाल के दिनों में लगातार बारिश और खेतों में पानी जमा होने के कारण फसल पर कीड़ों का हमला होने की आशंका बढ़ गई है, जिससे किसानों की चिंता स्वाभाविक है।
प्रमुख कीटों से फसल को नुकसान
कृषि और बागवानी के क्षेत्र में लंबे समय से कार्यरत विशेषज्ञ रविकांत पांडे का कहना है कि धान की फसल के परिपक्व होने के चरण में कई प्रकार के कीट भारी नुकसान पहुंचा सकते हैं। मुख्य रूप से दो कीटों का प्रभाव सबसे ज्यादा देखा जा रहा है:
- तना छेदक कीट: यह कीट धान के पौधों के मुख्य तने में छेद कर देते हैं, जिससे पौधा अंदर से खोखला होकर कमजोर पड़ जाता है और अंततः सूखने लगता है।
- गंधी बग कीट: यह कीड़ा मुख्य रूप से पौधों के फूलों और दानों पर हमला करता है, जिससे पैदावार की गुणवत्ता और मात्रा दोनों ही गिर जाती हैं।
- पत्ता लपेटक कीट: यह कीट पत्तियों को आपस में मोड़कर उनके भीतर मौजूद क्लोरोफिल को पूरी तरह नष्ट कर देता है, जिससे पौधे की प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया रुक जाती है और विकास थम जाता है।
फसल सुरक्षा के प्रभावी उपाय
विशेषज्ञों के अनुसार, समय रहते सही प्रबंधन करने से फसल को बर्बाद होने से बचाया जा सकता है। इसके लिए निम्नलिखित उपाय अपनाना फायदेमंद रहेगा:
- नीम के तेल का छिड़काव: नीम का तेल एक बेहद प्रभावी और प्राकृतिक कीटनाशक है। किसान फसल पर सप्ताह में एक बार 5% नीम के तेल के घोल का छिड़काव करें। यह न केवल कीटों को दूर रखता है, बल्कि पौधों को सुरक्षित भी करता है।
- फेरोमोन ट्रैप का प्रयोग: जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए फेरोमोन ट्रैप एक बेहतरीन तरीका है। इसमें नर कीट आकर्षित होकर फंस जाते हैं, जिससे उनकी जनसंख्या नियंत्रित रहती है। यह विशेष रूप से तना छेदक और पत्ता लपेटक कीटों पर लगाम लगाने के लिए काफी कारगर है।
- इंटरक्रॉपिंग की तकनीक: बासमती धान की मुख्य फसल के बीच में मूंग या उड़द जैसी चौड़ी पत्तियों वाली फसलों को उगाना एक स्मार्ट विकल्प है। इससे कीड़े भ्रमित हो जाते हैं और मुख्य फसल पर उनका हमला कम हो जाता है।
- वर्मीवॉश का उपयोग: जैविक कीटनाशकों और वर्मीवॉश के उपयोग से पौधों को पोषण मिलने के साथ ही कीटों से बचाव की सुरक्षा परत भी मिलती है।
कीटनाशकों के छिड़काव का सही समय
कृषि विशेषज्ञों की सलाह है कि कीटों का प्रकोप आमतौर पर मॉनसून के विदा होने के समय सबसे अधिक होता है। इसलिए, मॉनसून के अंत और शरद ऋतु की शुरुआत में ही कीटनाशकों या नीम के तेल का प्रयोग कर लेना चाहिए। यदि आप कीटों के आने का इंतजार करने के बजाय पहले ही छिड़काव कर लेंगे, तो फसल पर कीटों के हमले की संभावना लगभग खत्म हो जाएगी। किसानों को सलाह दी जाती है कि वे लगातार खेतों की निगरानी करें और किसी भी प्रकार के असामान्य बदलाव को देखते ही इन उपायों को अपनाएं ताकि उनकी मेहनत की कमाई सुरक्षित रहे।
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