स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खोलने के लिए ईरान ने अमेरिका के सामने रखीं कड़ी शर्तें, बढ़ सकता है तनाव विश्व 2 घंटे पहले 3
ईरान ने सामरिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने के बदले अमेरिका के सामने कई सख्त शर्तें पेश की हैं, जिनमें प्रतिबंधों को हटाना और सैन्य वापसी शामिल है।

अमेरिका के सामने ईरान की नई चुनौतियां

ईरान ने दुनिया के सबसे अहम समुद्री मार्गों में से एक, होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोलने के लिए अमेरिका के सामने कड़े और चुनौतीपूर्ण प्रस्ताव रखे हैं। ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल ने साफ कर दिया है कि जब तक अमेरिका अपना मौजूदा रवैया पूरी तरह नहीं बदलता, तब तक इस जलमार्ग को खोलने की अनुमति नहीं दी जाएगी। ईरान के इस कदम से क्षेत्र में जारी कूटनीतिक बातचीत के और जटिल होने के आसार हैं। यह बयान ईरान के सरकारी प्रसारक द्वारा जारी किया गया, जिसमें सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव मोहम्मद बागेर जोलगद्र की ओर से पक्ष रखा गया। जोलगद्र स्वयं इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड के एक प्रभावशाली कमांडर हैं। गौरतलब है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में दावा किया था कि होर्मुज जलडमरूमध्य इसी सप्ताह खोला जा सकता है, लेकिन ईरान की नई मांगों ने उस दावे पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

ईरान की वे शर्तें जो अमेरिका के लिए हैं बड़ी चुनौती

ईरान ने अपनी मांगों की फेहरिस्त में कई ऐसे बिंदु रखे हैं जो सीधे तौर पर अमेरिका की क्षेत्रीय नीतियों को चुनौती देते हैं। ईरान का कहना है कि अमेरिका को भविष्य में कभी भी उसे धमकी देने का साहस नहीं करना चाहिए। इसके अलावा, ईरान ने निम्नलिखित शर्तें रखी हैं:

  • अमेरिका को ईरान और उस क्षेत्र में ईरान के सहयोगी सशस्त्र समूहों के खिलाफ जारी युद्ध को स्थायी रूप से समाप्त करना होगा।
  • ईरान ने मांग की है कि अमेरिकी नौसेना ईरानी बंदरगाहों पर लगी अपनी नाकेबंदी को तत्काल प्रभाव से हटाए।
  • क्षेत्र से अमेरिकी सैन्य मौजूदगी को पूरी तरह वापस बुलाने की भी मांग की गई है।
  • युद्ध के दौरान ईरान को हुए आर्थिक और सैन्य नुकसान की पूरी भरपाई अमेरिका को करनी होगी।
  • अमेरिका को बिना किसी शर्त के सभी कड़े आर्थिक प्रतिबंध हटाने होंगे और ईरान की फ्रीज की गई संपत्तियों को तुरंत जारी करना होगा।

फिलहाल अमेरिका की ओर से इन कठोर मांगों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। अमेरिका का तर्क है कि पहले एक स्वीकार्य समझौता होना चाहिए, जिसके बाद ही नाकेबंदी को खत्म करने पर विचार किया जा सकता है।

ओमान की मध्यस्थता और समझौते की कोशिशें

कूटनीतिक स्तर पर, ईरान ने यह संकेत दिया है कि वह 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' के प्रबंधन को लेकर ओमान के साथ एक समझौते के बेहद करीब पहुंच चुका है। ओमान इस मामले में एक तटस्थ अरब देश के रूप में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है। हालांकि, ओमान अभी तक बातचीत के विस्तृत ब्योरे सार्वजनिक करने से बच रहा है। बीते शनिवार को ओमान ने एक संक्षिप्त बयान जारी कर बताया कि दोनों पक्षों के बीच बातचीत एक सकारात्मक और रचनात्मक माहौल में आगे बढ़ रही है। ओमान ने जलडमरूमध्य में जहाजों पर हो रहे लगातार हमलों की निंदा भी की है।

जहाजों पर हमलों का सिलसिला जारी

होर्मुज में तनाव के बीच अबू धाबी की सरकारी तेल और गैस कंपनी ADNOC के एक जहाज पर हमले की खबर आई है। संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के अधिकारियों के अनुसार, वाणिज्यिक जहाजों को निशाना बनाने के दौरान ईरान ने मिसाइल का उपयोग किया। हालांकि, हमले की सही लोकेशन और जहाज को हुए नुकसान की विस्तृत जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है। ADNOC के मुताबिक, इस हमले में कोई हताहत नहीं हुआ है। कंपनी ने बताया कि फरवरी में अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान के खिलाफ युद्ध शुरू करने के बाद से अब तक उनके एक दर्जन से अधिक जहाजों पर मिसाइल और ड्रोन से हमले किए जा चुके हैं। इन हिंसक घटनाओं में कंपनी के एक क्रू सदस्य की जान गई है और 20 अन्य घायल हुए हैं।

ब्रिटेन ने दी हमले की पुष्टि

इस बीच, ब्रिटेन के यूनाइटेड किंगडम मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस सेंटर ने भी एक घटना की जानकारी दी। उनके अनुसार, ओमान के खसब शहर के पूर्व में एक जहाज पर अज्ञात प्रोजेक्टाइल से हमला हुआ है, जिससे जहाज में आग लग गई थी, जिस पर बाद में काबू पा लिया गया। ब्रिटिश अधिकारियों ने बताया कि जहाज के सभी सदस्य सुरक्षित हैं, हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि यह वही ADNOC का जहाज था जिसे निशाना बनाया गया था या कोई अन्य घटना।

होर्मुज जलडमरूमध्य की सामरिक अहमियत

ईरान और ओमान के बीच स्थित होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए दुनिया का सबसे संवेदनशील और महत्वपूर्ण समुद्री रास्ता है। युद्ध की शुरुआत से पहले इसे एक अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग माना जाता था। वर्तमान में, ईरान और ओमान इस रास्ते के प्रबंधन के लिए एक व्यापक समझौते की दिशा में काम कर रहे हैं। ईरान की नई शर्तें और जहाजों पर हो रहे हमलों ने स्थिति को और अधिक संवेदनशील बना दिया है। दुनिया अब इस पर नजर टिकाए बैठी है कि अमेरिका इन मांगों को किस तरह देखता है और क्या ओमान की मध्यस्थता के जरिए दोनों देश किसी समझौते तक पहुँच पाएंगे।

साहिल चौहान पाबना के वर्ल्ड अफेयर्स रिपोर्टर हैं, जो अंतरराष्ट्रीय खबरें और वैश्विक मामले कवर करते हैं। विदेश नीति, कूटनीति और दुनिया भर के घटनाक्रमों पर उनकी अच्छी पकड़ है। वे जटिल वैश्विक मुद्दों को भारतीय नजरिए से समझाते हैं।

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