पश्चिम बंगाल
14 घंटे पहले
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हुगली: पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने हुगली में पहुंचकर एक तीखा बयान दिया। उन्होंने कहा कि यदि देश में रहना है तो वंदे मातरम और जन-गण-मन कहना ही होगा। साथ ही 26 जनवरी और 15 अगस्त का सम्मान करना भी अनिवार्य है।
मुख्यमंत्री ने आगे कहा, "हर स्कूल में वंदे मातरम का पाठ अनिवार्य कर दिया गया है। यह भारत की संस्कृति है, यह सनातन की संस्कृति है। भारत को हिंदुस्तान और भारत—दोनों नामों से पहचाना जाता है। यह देश किसी और के हाथों में नहीं जा सकता।"
तारकनाथ मंदिर में की पूजा-अर्चना
हुगली दौरे के दौरान शुभेंदु अधिकारी ने तारकेश्वर स्थित तारकनाथ मंदिर पहुंचकर पूजा-अर्चना भी की।
दर्शन करने के बाद उन्होंने कहा, "तारकेश्वर की यह यात्रा मुख्य रूप से एक प्रशासनिक कार्य थी, लेकिन एक भक्त के तौर पर मैं बाबा महादेव के दर्शन से वंचित नहीं रह सकता था, जिनका बंगाल के हर व्यक्ति के दिल में विशेष स्थान है।" उन्होंने यह भी जोड़ा कि यहां बहुत काम करना बाकी है और यहां नीले-सफेद रंग को केसरिया में बदलना है।
पीएम मोदी की यात्रा पर भी बोले
शुभेंदु अधिकारी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की संभावित यात्रा को लेकर भी बात की। उन्होंने कहा कि इस बारे में अधिक जानकारी प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से दी जाएगी और यह एक सरकारी कार्यक्रम होगा।
बंगाल की सियासत में बड़ा बदलाव
उल्लेखनीय है कि पश्चिम बंगाल में हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव में बीजेपी को प्रचंड बहुमत मिला है और शुभेंदु अधिकारी को राज्य का मुख्यमंत्री बनाया गया है। पद संभालते ही उन्होंने राज्य में ताबड़तोड़ कार्रवाई शुरू कर दी है। अपराध को लेकर उनकी जीरो टॉलरेंस की नीति है और अवैध अतिक्रमण पर बुलडोजर की कार्रवाई की गई है। जब से वे मुख्यमंत्री बने हैं, तृणमूल कांग्रेस के भीतर हलचल मची हुई है। अभिषेक बनर्जी के घर जांच के लिए सीआईडी पहुंची है, वहीं ममता बनर्जी सरकार पर तरह-तरह के आरोप लगा रही हैं। फिलहाल पूरे देश की नजर पश्चिम बंगाल की राजनीति में हो रहे बदलावों पर टिकी हुई है।
मंत्रिमंडल विस्तार में पांच समीकरण साधे
गौरतलब है कि हाल ही में शुभेंदु अधिकारी के मंत्रिमंडल का विस्तार भी हुआ है, जिसमें 5 समीकरणों को साधने की कोशिश की गई है। मंत्रिमंडल में अनुभवी नेताओं को प्राथमिकता दी गई है। इसके साथ ही उत्तरी बंगाल को महत्व दिया गया है, आदिवासी समुदाय से आने वाले नेताओं को जगह मिली है और गोरखाओं को भी साधने का प्रयास किया गया है। इसके अलावा अहम बात यह रही कि महिलाओं को भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है।
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