पौधों के लिए जलभराव बन सकता है जानलेवा, पूसा संस्थान के विशेषज्ञ ने बताई बचाव की विधि बिहार एक घंटा पहले 6
अत्यधिक पानी के कारण पेड़-पौधों की जड़ों तक ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाती, जिससे उनका विकास रुक जाता है और वे सूखने लगते हैं। पूसा संस्थान के कृषि वैज्ञानिकों ने गमलों और बगीचों में जल निकासी को लेकर महत्वपूर्ण सलाह दी है।

पेड़-पौधों के लिए ऑक्सीजन का महत्व

जिस प्रकार मनुष्य बिना सांस लिए पानी के भीतर अधिक समय तक जीवित नहीं रह सकता, ठीक उसी प्रकार पेड़-पौधों के जीवन चक्र में ऑक्सीजन की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। अक्सर लोग यह समझते हैं कि पौधों को केवल पानी और धूप की आवश्यकता होती है, लेकिन सत्य यह है कि उन्हें जमीन के अंदर सांस लेने के लिए ऑक्सीजन भी चाहिए होती है। जब गमलों या खेतों की मिट्टी में लगातार पानी भरा रहता है, तो हवा के बुलबुले बाहर निकल जाते हैं और जड़ें पूरी तरह जलमग्न हो जाती हैं।

जलभराव से होने वाले नुकसान

पूसा संस्थान के प्रोफेसर के अनुसार, जब पौधों की जड़ें लंबे समय तक पानी में डूबी रहती हैं, तो उन्हें ऑक्सीजन मिलना बंद हो जाता है। इसके मुख्य दुष्प्रभाव निम्नलिखित हैं:

  • पौधों की जड़ों में सड़न पैदा होने लगती है।
  • मिट्टी के अंदर मौजूद ऑक्सीजन की कमी से श्वसन प्रक्रिया बाधित हो जाती है।
  • पौधों की सामान्य वृद्धि और विकास पूरी तरह रुक जाता है।
  • पत्तियां पीली पड़ने लगती हैं और समय से पहले गिरने लगती हैं।
  • यदि जलभराव की स्थिति बनी रहे, तो पौधा पूरी तरह सूखकर नष्ट हो सकता है।

विशेषज्ञों की सलाह और बचाव के उपाय

विशेषज्ञों का कहना है कि घर के बगीचे या गमलों में पौधों को सुरक्षित रखने के लिए जल निकासी (ड्रेनेज) की व्यवस्था का होना अनिवार्य है। यदि आपके गमले में पानी रुक रहा है, तो तुरंत नीचे दिए गए उपायों को अपनाएं:

  • गमले की मिट्टी की ऊपरी परत की समय-समय पर गुड़ाई करें ताकि हवा का संचार बना रहे।
  • सुनिश्चित करें कि गमले के नीचे बने छेद बंद न हों, जिससे अतिरिक्त पानी आसानी से बाहर निकल सके।
  • पौधों को उतना ही पानी दें जितनी उनकी आवश्यकता है, मिट्टी की नमी की जांच किए बिना पानी न डालें।
  • भारी बारिश या जलजमाव की स्थिति में गमलों को किसी सुरक्षित और ऊंचे स्थान पर रखें।
अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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