UPI शुल्क पर राहुल गांधी के विरोध के बीच फंसी कांग्रेस, संसदीय समिति की रिपोर्ट में पार्टी के 5 सांसदों ने किया था MDR का समर्थन राष्ट्रीय राजनीति एक घंटा पहले 2
डिजिटल भुगतान प्रणाली यूपीआई पर एमडीआर चार्ज को लेकर राहुल गांधी के रुख और कांग्रेस के ही पांच वरिष्ठ सांसदों की सहमति के बीच एक बड़ा राजनीतिक विरोधाभास सामने आया है।

यूपीआई शुल्क पर कांग्रेस के भीतर दोहरी स्थिति

भारत में डिजिटल भुगतान की सबसे लोकप्रिय प्रणाली यूपीआई पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी एमडीआर शुल्क लगाने को लेकर सियासी गलियारों में घमासान छिड़ गया है। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी लगातार इस बात का पुरजोर विरोध कर रहे हैं कि यूपीआई लेन-देन पर किसी भी प्रकार का कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं वसूला जाना चाहिए। उनका तर्क है कि इससे आम आदमी और छोटे व्यापारियों पर आर्थिक बोझ बढ़ेगा। हालांकि, राहुल गांधी के इस रुख के ठीक विपरीत संसद की वित्त संबंधी स्थायी समिति की एक हालिया रिपोर्ट ने कांग्रेस के सामने अजीब स्थिति पैदा कर दी है। इस रिपोर्ट में यूपीआई सिस्टम के लिए टियर आधारित एमडीआर व्यवस्था को जल्द से जल्द लागू करने की अनुशंसा की गई है।

संसदीय समिति की रिपोर्ट और कांग्रेस सांसदों की भूमिका

विवाद की मुख्य जड़ वह बैठक है जिसमें इस रिपोर्ट को अंतिम रूप दिया गया। 12 अगस्त 2026 को जब वित्त संबंधी स्थायी समिति ने इस रिपोर्ट को औपचारिक रूप से स्वीकार किया, उस दौरान समिति में शामिल कांग्रेस के 5 दिग्गज सांसद वहां उपस्थित थे। इन सांसदों में पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम, गौरव गोगोई, मनीष तिवारी, किशोरी लाल और के. गोपीनाथ का नाम शामिल है। चौंकाने वाली बात यह है कि इस रिपोर्ट को सर्वसम्मति से अपनाया गया था और आधिकारिक तौर पर जारी मिनट्स में किसी भी सदस्य की ओर से कोई असहमति नोट दर्ज नहीं किया गया है। अब राजनीतिक गलियारों में यह सवाल पूछा जा रहा है कि जब पार्टी के बड़े रणनीतिकार और अनुभवी नेता इस वित्तीय मॉडल पर अपनी सहमति दे रहे थे, तो फिर राहुल गांधी इसका विरोध क्यों कर रहे हैं।

यूपीआई के संचालन की लागत और सरकारी सहायता का अंतर

संसदीय समिति की रिपोर्ट में यूपीआई नेटवर्क के संचालन में आ रही वित्तीय चुनौतियों का विस्तार से उल्लेख किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, डिजिटल भुगतान ढांचे को सुरक्षित और सुचारू रूप से चलाने की वास्तविक लागत और सरकार द्वारा प्रदान की जा रही सहायता राशि के बीच भारी अंतर है। सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए डिजिटल भुगतान बुनियादी ढांचे को बनाए रखने हेतु करीब 2,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। इसके विपरीत, डिजिटल भुगतान उद्योग की अनुमानित परिचालन लागत लगभग 20,700 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। समिति ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से रेखांकित किया है कि वर्तमान सरकारी सहायता कुल परिचालन लागत का मात्र 11 फीसदी हिस्सा ही कवर कर पा रही है। रिपोर्ट में आगाह किया गया है कि यदि यूपीआई के लिए एक टिकाऊ राजस्व मॉडल तैयार नहीं किया गया, तो साइबर सुरक्षा और भुगतान के दौरान होने वाले फ्रॉड को रोकने के लिए किए जाने वाले महत्वपूर्ण निवेश पर इसका गहरा नकारात्मक असर पड़ सकता है।

राहुल गांधी का विरोध और भविष्य की राह

समिति की रिपोर्ट में यह सुझाव दिया गया है कि एमडीआर को बड़े लेन-देन पर चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाना चाहिए ताकि सामान्य यूजर्स और छोटे दुकानदारों पर कोई अतिरिक्त भार न पड़े। दूसरी ओर, राहुल गांधी का आरोप है कि केंद्र सरकार जनता पर टैक्स का नया बोझ डालने की कोशिश कर रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि हालांकि संसदीय समिति में भाग लेने का मतलब हर प्रस्ताव पर व्यक्तिगत मुहर होना नहीं होता है, लेकिन एक ही मुद्दे पर पार्टी के नेताओं के बयानों और आधिकारिक संसदीय रिकॉर्ड में दिख रहे इस विरोधाभास ने भाजपा को कांग्रेस पर हमला करने का मौका जरूर दे दिया है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या कांग्रेस इस विषय पर अपना आधिकारिक स्टैंड स्पष्ट कर पाएगी या पार्टी के भीतर का यह मतभेद और गहराएगा।

देवेंद्र पांडेय पाबना के राजनीतिक संवाददाता हैं और राष्ट्रीय राजनीति, सरकार तथा नीतियों पर रिपोर्टिंग करते हैं। चुनाव, संसद और बड़े सियासी घटनाक्रमों का वे गहराई से विश्लेषण करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित होती है।

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