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2 घंटे पहले
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विचारों
पाकिस्तान पर दोहरी मार और बिगड़ते हालात
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और संघर्ष के कारण पाकिस्तान की मुश्किलें दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई भारी उछाल ने पाकिस्तान की ऊर्जा सुरक्षा के सामने एक बड़ा संकट खड़ा कर दिया है। पहले से ही गंभीर आर्थिक तंगी और विदेशी मुद्रा भंडार के भारी दबाव से जूझ रहे पाकिस्तान की हालत अब और भी खराब होती दिख रही है। देश की डगमगाती अर्थव्यवस्था को संभालने और ईंधन की बढ़ती खपत को नियंत्रित करने के उद्देश्य से प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की सरकार अब एक कड़े फैसले पर विचार कर रही है, जिसे 'पेट्रोलियम स्मार्ट लॉकडाउन' का नाम दिया गया है।
चार दिन का कामकाज और लंबा वीकेंड
प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की अध्यक्षता में हाल ही में एक उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई, जिसमें देश के मौजूदा हालात पर चर्चा की गई। इस बैठक में ईंधन की बचत सुनिश्चित करने के लिए कई अहम प्रस्तावों पर मुहर लगाने की तैयारी है। सरकार द्वारा पेश किए गए इस नए प्लान के तहत निम्नलिखित बदलाव किए जा सकते हैं:
- सरकारी और निजी दफ्तरों में चार दिन का ही वर्किंग वीक लागू किया जाएगा।
- सप्ताह में तीन दिन यानी शुक्रवार, शनिवार और रविवार को छुट्टी का ऐलान किया जा सकता है।
- इस योजना का मुख्य उद्देश्य सड़कों पर चलने वाले निजी और सार्वजनिक वाहनों की संख्या को कम करना है ताकि पेट्रोल और डीजल की मांग में कमी लाई जा सके।
कर्मचारियों के लिए रोटेशनल ड्यूटी और वर्क फ्रॉम होम
ईंधन की खपत को न्यूनतम स्तर पर लाने के लिए सरकार सरकारी विभागों में रोटेशनल अटेंडेंस प्रणाली लागू करने पर विचार कर रही है। इसके तहत सभी कर्मचारियों को रोजाना दफ्तर आने की आवश्यकता नहीं होगी। कर्मचारियों का एक बड़ा हिस्सा रोटेशन के आधार पर घर से काम (वर्क फ्रॉम होम) करेगा, जिससे न केवल ट्रैफिक का दबाव कम होगा, बल्कि दफ्तर आने-जाने में खर्च होने वाले महंगे ईंधन की भी बचत की जा सकेगी। यह कदम सरकारी मशीनरी पर पड़ने वाले आर्थिक बोझ को कम करने के लिए उठाया जा रहा है।
बाजारों और शॉपिंग मॉल्स पर सख्त पाबंदियां
सरकार की योजना केवल दफ्तरों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि कमर्शियल गतिविधियों पर भी सख्ती बरतने की तैयारी है। प्रस्ताव के मुताबिक, बाजारों, शॉपिंग मॉल्स और विभिन्न कार्यक्रम स्थलों को शाम होते ही बंद करने के आदेश दिए जा सकते हैं। इस कदम के पीछे का तर्क केवल वाहनों की आवाजाही को रोकना नहीं है, बल्कि इससे बिजली और ईंधन की उस अप्रत्यक्ष खपत को भी कम किया जा सकेगा जो देर रात तक चलने वाली व्यावसायिक गतिविधियों के कारण होती है।
सरकारी वाहनों पर भी लगेगी लगाम
अपनी फिजूलखर्ची पर लगाम लगाने के लिए सरकार अब सरकारी गाड़ियों के इस्तेमाल में कटौती करने की योजना बना रही है। आधिकारिक प्रस्तावों के अनुसार, सरकारी विभागों के पास उपलब्ध कुल वाहनों में से 50 फीसदी वाहनों को स्टैंडबाय मोड पर रखने यानी उनका इस्तेमाल रोकने पर विचार किया जा रहा है। इसके साथ ही सरकार की ओर से यह भी संकेत दिए गए हैं कि अधिकारियों की गैर-जरूरी यात्राओं पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाएगा और यात्रा से जुड़े आधिकारिक खर्चों में भी भारी कटौती की जाएगी।
महंगाई का बढ़ता खतरा और भविष्य की चिंताएं
अंतरराष्ट्रीय बाजार में पेट्रोलियम पदार्थों की आसमान छूती कीमतें पाकिस्तान की आम जनता के लिए दोहरी मुसीबत बन सकती हैं। ईंधन महंगा होने का सीधा असर जरूरी वस्तुओं और खाने-पीने की चीजों की कीमतों पर पड़ना तय है। पाकिस्तान सरकार पहले से ही विदेशी मुद्रा भंडार की कमी और महंगाई की मार झेल रही है। ऐसे में ईंधन की खपत को कम करके विदेशी मुद्रा बचाने की यह कोशिश आर्थिक मोर्चे पर पाकिस्तान की मजबूरी को दर्शाती है। शहबाज सरकार का स्पष्ट मानना है कि यदि समय रहते ये कड़े कदम नहीं उठाए गए, तो पश्चिम एशिया के संघर्ष से पैदा होने वाला सप्लाई चेन का यह झटका पाकिस्तान की पूरी अर्थव्यवस्था को और अधिक गहरे संकट में डाल सकता है।
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