पाकिस्तान के सीक्रेट बजट पर अमेरिका सख्त, सेना और ISI के खर्च का मांगा हिसाब विश्व 2 घंटे पहले 3
अमेरिका ने पाकिस्तान की वित्तीय पारदर्शिता पर सवाल उठाते हुए उसकी सेना और खुफिया एजेंसी आईएसआई के खर्च का ब्योरा मांगा है। अमेरिकी विदेश विभाग ने राजकोषीय पारदर्शिता रिपोर्ट-2026 में सैन्य बजट को नागरिक निगरानी के दायरे में लाने की मांग की है।

पाकिस्तान के गुप्त बजट पर अमेरिका की बड़ी मांग

पाकिस्तान के वित्तीय कामकाज और उसके सीक्रेट बजट को लेकर अमेरिका ने बड़ा कदम उठाया है। अमेरिका ने सीधे तौर पर पाकिस्तान सरकार से यह जवाब मांगा है कि वह अपनी सेना और खुफिया एजेंसी ISI पर आखिर कितना खर्च कर रही है। इस मामले ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हलचल पैदा कर दी है, क्योंकि अमेरिका ने पाकिस्तान से इन संवेदनशील खर्चों का पूरा हिसाब-किताब सार्वजनिक करने की मांग की है।

राजकोषीय पारदर्शिता रिपोर्ट-2026 में बड़ा खुलासा

अमेरिकी विदेश विभाग ने हाल ही में अपनी राजकोषीय पारदर्शिता रिपोर्ट-2026 जारी की है, जिसमें पाकिस्तान के वित्तीय मामलों को लेकर गंभीर टिप्पणियां की गई हैं। इस रिपोर्ट में पाकिस्तान से स्पष्ट रूप से कहा गया है कि उसे अपने सरकारी खर्चों में कहीं अधिक पारदर्शिता लाने की आवश्यकता है। अमेरिकी प्रशासन का मानना है कि पाकिस्तान की वित्तीय प्रणालियों में जवाबदेही की कमी है, जिसे अब दूर किया जाना चाहिए।

सैन्य और खुफिया खर्च पर नागरिक निगरानी का जोर

अमेरिकी रिपोर्ट में जो सबसे महत्वपूर्ण मांग उठाई गई है, वह यह है कि पाकिस्तान को अपने सैन्य बजट और खुफिया एजेंसियों के खर्च को संसदीय या नागरिक निगरानी के दायरे में लाना चाहिए। सामान्य तौर पर, पाकिस्तान में सेना और ISI का बजट एक बड़ा रहस्य बना रहता है, जिस पर संसद या आम नागरिकों का कोई नियंत्रण नहीं होता। अमेरिका ने इसी गोपनीयता पर निशाना साधते हुए कहा है कि लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं के तहत इन खर्चों का लेखा-जोखा जनता के सामने होना चाहिए।

कर्ज संबंधी जानकारी सार्वजनिक करने की शर्त

सिर्फ सैन्य खर्च ही नहीं, बल्कि अमेरिका ने पाकिस्तान को उसके सरकारी कर्ज के बारे में भी निर्देश दिए हैं। रिपोर्ट में जोर देकर कहा गया है कि पाकिस्तान को अपने देश पर चढ़े कुल कर्ज और उससे जुड़ी वित्तीय देनदारियों की जानकारी पूरी तरह से सार्वजनिक करनी चाहिए। अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थाओं से लिए गए कर्ज और उसके उपयोग को लेकर पारदर्शिता न होना, पाकिस्तान की गिरती आर्थिक स्थिति के लिए एक बड़ा कारण माना जा रहा है।

पाकिस्तान की चुप्पी और अंतरराष्ट्रीय दबाव

अमेरिकी विदेश विभाग का यह बयान ऐसे समय में आया है जब पाकिस्तान पहले से ही गहरा आर्थिक संकट झेल रहा है। लंबे समय से यह मांग उठती रही है कि पाकिस्तान अपनी सेना को मिलने वाले भारी-भरकम फंड की जांच करे, लेकिन अब एक महाशक्ति के रूप में अमेरिका का सीधा हस्तक्षेप स्थिति को और गंभीर बनाता है। क्या पाकिस्तान सरकार अपने शक्तिशाली सैन्य प्रतिष्ठान के खर्च का विवरण अमेरिका को सौंपेगी, यह देखना दिलचस्प होगा।

ग्लोबल वित्तीय रिपोर्ट के निहितार्थ

यह रिपोर्ट न केवल पाकिस्तान, बल्कि दुनिया भर के देशों के लिए वित्तीय अनुशासन का संदेश है। अमेरिका की इस सख्त टिप्पणी का मतलब है कि पाकिस्तान अब अंतरराष्ट्रीय सहायता या लोन के लिए अपनी मनमानी नहीं कर पाएगा। डोनाल्ड ट्रंप के शासनकाल और मौजूदा वैश्विक परिदृश्य में, अमेरिका अब उन देशों पर लगाम कस रहा है जो वित्तीय पारदर्शिता के मानकों को नजरअंदाज करते हैं।

  • सैन्य बजट पर संसदीय चर्चा की अनिवार्यता।
  • खुफिया एजेंसियों के खर्च का ऑडिट।
  • सरकारी कर्ज के आंकड़ों को पारदर्शी बनाना।
  • वित्तीय रिपोर्टिंग में अंतरराष्ट्रीय मानकों का पालन।

कुल मिलाकर, अमेरिका की यह मांग पाकिस्तान के लिए एक नई चुनौती बनकर उभरी है। अगर पाकिस्तान इसे अनसुना करता है, तो उसे भविष्य में अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सहयोग पाने में भारी कठिनाई का सामना करना पड़ सकता है। अब पूरी दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि पाकिस्तान के नीति निर्माता इस कड़े अमेरिकी रुख का क्या जवाब देते हैं।

करण मल्होत्रा पाबना के अंतरराष्ट्रीय संवाददाता हैं, जो अमेरिका, यूरोप और एशिया की खबरें रिपोर्ट करते हैं। वैश्विक राजनीति, अर्थव्यवस्था और बड़े अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर वे नजर रखते हैं। उनकी रिपोर्ट्स दुनिया की हलचल को पाठकों तक तेजी से पहुंचाती हैं।

आपकी प्रतिक्रिया?

Comments

https://pabna.in/assets/images/user-avatar-s.jpg

0 comment

Write the first comment for this!

फेसबुक वार्तालाप