ताजमहल और लाल किला तो देख लिए, अब भारत की इन 9 अनदेखी जगहों की बारी—सभी यूनेस्को सूची में शामिल जीवनशैली 4 घंटे पहले 3
भारत में कई ऐसी धरोहरें हैं जिन्हें यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज साइट का दर्जा तो मिला है, मगर पर्यटक इन तक कम ही पहुंच पाते हैं। ऐसी ही 9 खूबसूरत और 'सीक्रेट' जगहों की जानकारी यहां दी गई है।

जब भी छुट्टियों में घूमने की योजना बनती है, तो ज़ेहन में वही चुनिंदा नाम घूमने लगते हैं—शिमला-मनाली की वादियां, गोवा के समुद्र तट, या फिर दिल्ली का लाल किला और आगरा का ताजमहल। इसमें कोई शक नहीं कि ये सभी जगहें बेहद सुंदर हैं, लेकिन हर बार उन्हीं जानी-पहचानी और भीड़भाड़ वाली जगहों पर जाना कई बार उबाऊ लगने लगता है।

अगर इस बार आप कुछ अनोखा, ऐतिहासिक और ऐसी जगह देखना चाहते हैं जहां पर्यटकों की भीड़ आपके सुकून में खलल न डाले, तो यह सूची आपके लिए ही है। आपको यह जानकर हैरानी होगी कि हमारे देश में कई छिपी हुई धरोहरें मौजूद हैं, जिन्हें उनकी ऐतिहासिक और प्राकृतिक अहमियत के चलते यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज साइट का दर्जा मिल चुका है, फिर भी ये आज तक आम सैलानियों की नज़रों से ओझल हैं। यानी यहां आपको इतिहास की भव्यता भी मिलेगी और मन को राहत देने वाला सुकून भी। तो आइए, अपनी ट्रैवल बकेट लिस्ट को थोड़ा अपग्रेड करते हैं और जानते हैं भारत की ऐसी ही 9 बेहतरीन 'सीक्रेट' यूनेस्को साइट्स के बारे में।

1. चंपानेर-पावागढ़ आर्कियोलॉजिकल पार्क, गुजरात

गुजरात की पावागढ़ पहाड़ियों पर बसा यह पार्क प्राकृतिक खूबसूरती और इतिहास का अनोखा संगम है। यहां आठवीं शताब्दी के किले, महल, बावड़ियां और मस्जिदें मौजूद हैं, जो हिंदू और इस्लामिक वास्तुकला के शानदार मेल को सामने रखती हैं। पहाड़ी की चोटी पर बने कालिका माता मंदिर के कारण यह स्थान आध्यात्मिकता और इतिहास, दोनों का केंद्र माना जाता है।

2. कैपिटल कॉम्प्लेक्स टूरिस्ट सेंटर, चंडीगढ़

मशहूर आर्किटेक्ट 'ले कोरबुसिए' द्वारा डिज़ाइन किया गया यह कॉम्प्लेक्स आधुनिक वास्तुकला का बेहतरीन नमूना है। आज़ादी के बाद भारत के शहरी नियोजन को दर्शाने वाली इस साइट में सचिवालय, विधानसभा और उच्च न्यायालय शामिल हैं, जो अपनी मिनिमलिस्ट और ज्योमेट्रिक डिज़ाइन के लिए पहचाने जाते हैं।

3. पट्टदकल, कर्नाटक

मलप्रभा नदी के किनारे बसा पट्टदकल शुरुआती चालुक्य वास्तुकला का बेजोड़ उदाहरण है। इस मंदिर परिसर में 10 मंदिर हैं, जिनमें उत्तर और दक्षिण भारतीय शैलियों का अद्भुत मेल देखने को मिलता है। सातवीं और आठवीं शताब्दी की नक्काशीदार मूर्तियां तथा भव्य पत्थर के खंभे कला प्रेमियों को मंत्रमुग्ध कर देते हैं।

4. कास पठार, महाराष्ट्र

इसे 'महाराष्ट्र की फूलों की घाटी' भी कहा जाता है। मानसून के मौसम में पूरा पठार रंग-बिरंगे जंगली फूलों की चादर से ढक जाता है। अपनी अनूठी पारिस्थितिक अहमियत और दुर्लभ पौधों की प्रजातियों के कारण इसे यूनेस्को की सूची में जगह मिली है। प्रकृति प्रेमियों और फोटोग्राफरों के लिए यह किसी जन्नत से कम नहीं है।

5. हैलेबिडु, कर्नाटक

होयसल साम्राज्य की प्राचीन राजधानी रहा हैलेबिडु अपने उत्कृष्ट मंदिरों के लिए प्रसिद्ध है। यहां के होयसलेश्वर और केदारेश्वर मंदिर की दीवारों पर पत्थर तराशकर बनाई गई पौराणिक कथाएं, फूल-पत्तियों और जानवरों की आकृतियां वास्तुकला की बारीकी का सबूत हैं। इतिहास को नज़दीक से समझने वालों के लिए यह एक मस्ट-विजिट जगह है।

6. काकतीय रुद्रेश्वर मंदिर, तेलंगाना

रामप्पा मंदिर के नाम से मशहूर यह 13वीं शताब्दी का मंदिर काकतीय काल की कला का शिखर माना जाता है। भगवान शिव को समर्पित इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता इसके निर्माण में इस्तेमाल की गई 'पानी में तैरने वाली ईंटें' और भूकंपरोधी तकनीक है। यहां की मूर्तियों में नर्तकियों और संगीतकारों के दृश्य बेहद खूबसूरती से उकेरे गए हैं।

7. बीदर किला, कर्नाटक

दक्कन के पठार पर खड़ा यह विशाल किला बहमनी सल्तनत की वास्तुकला और रणनीतिक सूझबूझ की कहानी कहता है। 5 किलोमीटर के दायरे में फैले इस किले में रंगीन महल, फारसी शैली की टाइलें, भव्य प्रवेश द्वार और बड़े जलाशय मौजूद हैं, जो आपको इतिहास के पन्नों में ले जाते हैं।

8. नालंदा महाविहार का पुरातत्व स्थल, बिहार

5वीं से 12वीं शताब्दी तक दुनिया भर के विद्वानों को अपनी ओर खींचने वाला नालंदा विश्वविद्यालय प्राचीन भारत के ज्ञान और दर्शन का सबसे बड़ा केंद्र था। आज यहां मौजूद मठों, स्तूपों और व्याख्यान कक्षों के अवशेष भारत की समृद्ध शैक्षणिक और सांस्कृतिक विरासत की गवाही देते हैं।

9. खंगचेंदजोंगा राष्ट्रीय उद्यान, सिक्किम

दुनिया की तीसरी सबसे ऊंची चोटी, माउंट कंचनजंगा की छांव में बसा यह नेशनल पार्क अपनी बेमिसाल जैव विविधता और ग्लेशियर झीलों के लिए जाना जाता है। इस साइट का सिर्फ पारिस्थितिक ही नहीं, बल्कि सांस्कृतिक महत्व भी है, क्योंकि यहां की स्थानीय जनजातियों की परंपराएं इस प्रकृति से गहराई से जुड़ी हुई हैं।

अगली यात्रा के लिए कुछ नया चुनें

तो फिर देर किस बात की? अगली बार जब घूमने की योजना बनाएं, तो रूटीन टूरिस्ट डेस्टिनेशन्स को छोड़कर भारत के इन अनछुए और नायाब यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज साइट्स का रुख करें। यकीन मानिए, यहां का सुकून और इतिहास आपको हमेशा याद रहेगा।

चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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