बरसात के मौसम में बढ़ा सांपों का खतरा, कैसे करें कोबरा की पहचान और क्या कहती है रिसर्च? भारत 3 घंटे पहले 3
मानसून के दौरान बिलों में पानी भरने से सांप सुरक्षित ठिकानों की तलाश में बाहर निकल रहे हैं, जिससे इंसानी इलाकों में कोबरा का खतरा बढ़ गया है।

बरसात के मौसम में बढ़ता सांपों का खतरा

देशभर में इस समय मानसून की बारिश का दौर जारी है। इस मौसम में सांपों का खतरा काफी ज्यादा बढ़ जाता है। लगातार होने वाली बारिश के कारण जमीन के अंदर बने सांपों के बिलों में पानी भर जाता है। ऐसी स्थिति में अपने अस्तित्व को बचाने के लिए सांप बाहर निकलते हैं और सुरक्षित व सूखे ठिकानों की तलाश में अलग-अलग जगहों पर अपना ठिकाना ढूंढने लगते हैं। इस वजह से इंसानी बस्तियों में सांपों के आने की घटनाएं बढ़ जाती हैं, जो आम लोगों के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकता है।

पहचान का संकट और जान का जोखिम

सांपों के सामने आने पर सबसे बड़ी समस्या यह होती है कि आम लोग उनकी सही पहचान नहीं कर पाते हैं। लोग अक्सर यह समझने में असमर्थ होते हैं कि सामने दिख रहा सांप किस प्रजाति का है। ऐसे असमंजस के माहौल में अगर अचानक कोबरा जैसा अत्यधिक जहरीला सांप सामने आ जाए, तो लोगों की जान पर बड़ा संकट बन आता है। सांप की प्रजाति की सही पहचान न होने और बचाव के सही तरीके न जानने के कारण दुर्घटना की आशंका बहुत अधिक बढ़ जाती है।

वैज्ञानिक पी. गौरी शंकर का शोध और कोबरा का व्यवहार

कोबरा के व्यवहार, उनकी विभिन्न प्रजातियों और उनसे जुड़े खतरों को समझने के लिए वैज्ञानिक लगातार प्रयास कर रहे हैं। इस विषय में जीव वैज्ञानिक पी. गौरी शंकर की रिसर्च अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कोबरा प्रजाति पर 20 से भी अधिक वर्षों तक गहन अध्ययन किया है। उनकी यह रिसर्च कोबरा की विभिन्न प्रजातियों की पहचान करने, उनके रहने के तौर-तरीकों और उनके स्वभाव को करीब से समझने में बेहद मददगार साबित होती है।

देवेंद्र पांडेय पाबना के राजनीतिक संवाददाता हैं और राष्ट्रीय राजनीति, सरकार तथा नीतियों पर रिपोर्टिंग करते हैं। चुनाव, संसद और बड़े सियासी घटनाक्रमों का वे गहराई से विश्लेषण करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित होती है।

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