विदेशी फंडिंग लेने वाली संस्थाओं पर सरकार सख्त, FCRA नियमों में बड़े बदलाव भारत एक घंटा पहले 3
केंद्र सरकार ने विदेशी चंदा विनियमन अधिनियम यानी FCRA के तहत नियमों को और अधिक कड़ा कर दिया है। अब विदेशी चंदे के दुरुपयोग और प्रशासनिक नियमों के उल्लंघन पर भारी जुर्माना लगाया जाएगा।

FCRA नियमों में बदलाव और जुर्माना

गृह मंत्रालय ने FCRA 2010 कानून के तहत नियमों में महत्वपूर्ण संशोधन किए हैं। सोमवार को जारी गजट नोटिफिकेशन के अनुसार, अब विदेशी चंदा लेने और खर्च करने वाली संस्थाओं को नियमों का पालन न करने पर कड़ी आर्थिक दंड का सामना करना पड़ेगा। यह कदम विदेशी धन के पारदर्शी उपयोग को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उठाया गया है।

विदेशी चंदे के उल्लंघन पर जुर्माने का नया ढांचा

सरकार ने अलग अलग प्रकार के उल्लंघनों के लिए जुर्माने की राशि तय कर दी है, जिनमें निम्नलिखित शामिल हैं:

  • यदि कोई एनजीओ विदेशी चंदे का 20 प्रतिशत से अधिक हिस्सा प्रशासनिक खर्चों पर खर्च करता है, तो उसे एक लाख रुपये या सीमा से अधिक खर्च की गई राशि का 5 प्रतिशत, जो भी अधिक हो, जुर्माना देना होगा।
  • विदेशी चंदे को सट्टेबाजी जैसी जोखिम भरी गतिविधियों में लगाने पर एक लाख रुपये या उस राशि का 30 प्रतिशत जुर्माना लगेगा। साथ ही, ऐसी गतिविधि से प्राप्त पूरी कमाई यानी 100 प्रतिशत रकम भी सरकार जब्त कर लेगी।
  • निर्धारित उद्देश्य से अलग किसी अन्य काम में चंदा इस्तेमाल करने या बिना पंजीकरण वाले क्षेत्रों में फंड खर्च करने पर 30 प्रतिशत जुर्माना या एक लाख रुपये तक का दंड लगाया जाएगा।

पंजीकरण और पदाधिकारी से जुड़े नए नियम

सरकार ने विदेशी फंड प्राप्त करने की प्रक्रिया को भी और अधिक व्यवस्थित कर दिया है:

  • अब एनजीओ को विदेशी चंदा लेने के लिए आवेदन करते समय सरकार द्वारा तय की गई सूची में से ही अपने कार्य के उद्देश्य चुनने होंगे।
  • यदि किसी संस्था के मुख्य पदाधिकारियों में विदेशी नागरिक शामिल हैं, तो उन्हें पंजीकरण या मंजूरी मिलने की संभावना बहुत कम होगी। हालांकि, विशेष परिस्थितियों में केंद्र सरकार को छूट देने का अधिकार होगा।
  • धार्मिक गतिविधियों के लिए विदेशी चंदा लिया जा सकता है, लेकिन स्पष्ट रूप से धर्म-परिवर्तन को पंजीकरण के लिए योग्य श्रेणियों से बाहर रखा गया है।
  • मुख्य पदाधिकारी की परिभाषा में अब कंपनी के डायरेक्टर, फर्म के पार्टनर, ट्रस्टी, एचयूएफ (HUF) के कर्ता और प्रबंधन नियंत्रण रखने वाले सभी व्यक्ति शामिल होंगे।
देवेंद्र पांडेय पाबना के राजनीतिक संवाददाता हैं और राष्ट्रीय राजनीति, सरकार तथा नीतियों पर रिपोर्टिंग करते हैं। चुनाव, संसद और बड़े सियासी घटनाक्रमों का वे गहराई से विश्लेषण करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित होती है।

आपकी प्रतिक्रिया?


आपको यह भी पसंद आ सकता हैं

Comments

https://pabna.in/assets/images/user-avatar-s.jpg

0 comment

Write the first comment for this!