भारत
4 दिन पहले
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NEET-UG 2026 की दोबारा होने वाली परीक्षा से कुछ ही समय पहले सरकार द्वारा मैसेजिंग ऐप Telegram पर लगाई गई अस्थायी रोक के खिलाफ कंपनी ने दिल्ली उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है। Telegram ने इस फैसले को चुनौती देते हुए मामले की तत्काल सुनवाई की गुहार लगाई, जिसे अदालत ने मंजूर कर लिया। उल्लेखनीय है कि मंगलवार को केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (नेशनल टेस्टिंग एजेंसी) की सिफारिश पर इस ऐप पर 24 घंटे का प्रतिबंध लगाया था।
राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी वह केंद्रीय निकाय है, जो देशभर में मेडिकल पाठ्यक्रमों में दाखिले के लिए जरूरी राष्ट्रीय प्रवेश पात्रता परीक्षा (एनटीई) जैसी योग्यता परीक्षाओं का आयोजन करता है। केंद्र का कहना है कि यह अस्थायी रोक परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र लीक होने और भ्रामक सूचनाएं फैलने से रोकने तथा नकल कराने वाले नेटवर्कों पर लगाम कसने के मकसद से लगाई गई है। इसके साथ ही Telegram को 30 जून तक अपने मैसेज एडिटिंग फीचर को बंद करने का भी निर्देश दिया गया था।
एनटीए के आरोप
एनटीए ने दावा किया कि इसी एडिटिंग फीचर का गलत इस्तेमाल कर 'पेपर लीक' के सबूत गढ़े गए थे। इसमें परीक्षा होने के बाद पुराने संदेशों को संपादित कर उनमें प्रश्नपत्र डाले जाते थे, जबकि टाइमस्टैम्प पहले जैसा ही बनाए रखा जाता था। एजेंसी के मुताबिक, दोनों कदमों की सिफारिश ऐसे गिरोहों पर शिकंजा कसने के लिए की गई थी, जो प्रश्न लीक करते हैं और परीक्षा पास करने के इच्छुक मेडिकल अभ्यर्थियों को लाखों रुपये में पहले से हल किए गए प्रश्नपत्र मुहैया कराते हैं।
प्रश्नपत्रों के लीक होने की घटनाओं के बाद संस्था ने कहा कि ये प्रतिबंध संगठित नकल रैकेट और परीक्षा से जुड़े फर्जी संदेशों के प्रसार पर रोक लगाने के लिए हैं। इस बीच, गूगल और एप्पल ने इस ऐप को अपने मोबाइल एप्लिकेशन स्टोर से हटा दिया है।
Telegram के सीईओ की प्रतिक्रिया
Telegram के सीईओ पावेल ड्यूरोव ने इस फैसले की तीखी आलोचना की है। उनका तर्क है कि यह कदम 'मूल समस्या का समाधान किए बिना लाखों आम यूजर्स को प्रभावित करता है। इससे 15 करोड़ से ज्यादा सामान्य भारतीय यूजर्स को सजा मिल रही है।'
दूसरी ओर, कई छात्र संगठन और अभिभावक इन सुरक्षा उपायों का स्वागत कर रहे हैं। हालांकि कुछ लोगों का मानना है कि VPN के जरिये इस रोक को आसानी से बायपास किया जा सकता है, इसलिए इसका असर सीमित ही रहेगा।
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