प्रयागराज: मुहर्रम के जुलूस में तलवारबाजी और हथियारों के प्रदर्शन पर पाबंदी, उल्लंघन पर सख्त कार्रवाई उत्तर प्रदेश एक महीने पहले 35
मुहर्रम से पहले प्रयागराज प्रशासन ने जुलूस के दौरान तलवारबाजी और किसी भी प्रकार के हथियार के प्रदर्शन पर पूरी तरह रोक लगा दी है। आदेश न मानने वालों के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।

मुहर्रम का महीना नजदीक आते ही उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में प्रशासन ने नई गाइडलाइन जारी कर दी है। इन निर्देशों के तहत मुहर्रम के जुलूस के दौरान तलवारबाजी पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगी। इतना ही नहीं, जुलूस में लाठी-डंडे, भाले या किसी भी अन्य प्रकार के हथियार के प्रदर्शन पर भी पूरी तरह रोक लगा दी गई है।

हथियार दिखाने पर होगी कार्रवाई

डीसीपी सिटी मनीष कुमार शांडिल्य ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि यदि कोई व्यक्ति जुलूस के दौरान हथियारों का प्रदर्शन करता हुआ पाया गया तो उसके विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी। सभी ताजियादारों को साफ तौर पर हिदायत दी गई है कि इस बार किसी भी नई परंपरा की शुरुआत नहीं की जाएगी।

'बुड्ढा ताजिया' पूरी शान से उठेगा

इसके साथ ही प्रयागराज में मुहर्रम कमेटी की बैठक में इस वर्ष के जुलूसों और रस्मों को लेकर कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। बैठक में सर्वसम्मति से तय किया गया कि शहर का ऐतिहासिक 'बुड्ढा ताजिया' हर बार की तरह इस साल भी अपनी पूरी शानो-शौकत के साथ उठाया जाएगा। साथ ही 'बुड्ढा ताजिया की मेहंदी' की रस्म भी परंपरा के मुताबिक अदा की जाएगी। कमेटी के सभी सदस्यों ने इस फैसले पर पूरी सहमति जताई है।

इस बार नहीं निकलेगा 'बड़ा ताजिया'

वहीं दूसरी ओर, मुहर्रम कमेटी ने इस बार 'बड़ा ताजिया' और उसका आलम न उठाने का फैसला किया है। इस वर्ष बड़े ताजिया का जुलूस नहीं निकाला जाएगा। इसके स्थान पर केवल इमामबाड़े पर फातिहा पढ़ी जाएगी और मुहर्रम की दसवीं तारीख को परंपरागत ढंग से 'ताजिया का फूल' दफन किया जाएगा। इस दौरान पुलिस की एक टीम सोशल मीडिया पर भी कड़ी निगरानी रखेगी। माहौल बिगाड़ने वाली या भड़काऊ पोस्ट करने वालों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे।

इस्लामी कैलेंडर का पहला महीना है मुहर्रम

गौरतलब है कि मुहर्रम इस्लामी कैलेंडर यानी हिजरी कैलेंडर का पहला महीना होता है। जिस तरह अंग्रेजी कैलेंडर का पहला महीना जनवरी होता है, उसी तरह इस्लामी वर्ष की शुरुआत मुहर्रम के महीने से होती है। हालांकि इस महीने की शुरुआत जश्न के साथ नहीं, बल्कि शोक, याद और इबादत के रूप में की जाती है। मुहर्रम के 10वें दिन को 'आशूरा' कहा जाता है, जो पूरे महीने का सबसे अहम दिन माना जाता है, क्योंकि इसी दिन इमाम हुसैन की शहादत हुई थी। इसी दिन उनके 72 साथियों को भी बेहद बेरहमी से शहीद कर दिया गया था।

चेतन तिवारी पाबना के उत्तर प्रदेश संवाददाता हैं और राज्य की राजनीति, प्रशासन तथा जमीनी मुद्दों को कवर करते हैं। लखनऊ में रहते हुए वे जिलों से लेकर विधानसभा तक की खबरें संतुलित रिपोर्टिंग के साथ पाठकों तक पहुंचाते हैं। आम लोगों के मुद्दों और स्थानीय घटनाओं पर उनका खास फोकस रहता है।

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