स्लोवाकिया पहुंचे पीएम मोदी: वह अनोखा देश जहां एक भी मस्जिद नहीं, मुफ्त इलाज और शिक्षा विश्व 2 दिन पहले 7
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी विदेश यात्रा के तहत स्लोवाकिया पहुंचे हैं। यह यूरोपीय देश इस मायने में खास है कि यहां एक भी मस्जिद नहीं है, और साथ ही यह अपने नागरिकों को मुफ्त स्वास्थ्य सेवा और शिक्षा देता है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी विदेश यात्रा के दौरान आज स्लोवाकिया में मौजूद हैं। यूरोप का यह देश अपनी सुंदरता के साथ-साथ अपने शांत और समृद्ध स्वरूप के लिए जाना जाता है। यहां के लोग मेहनती और कामकाजी माने जाते हैं और कारों का उत्पादन बड़े पैमाने पर होता है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस देश में एक भी मस्जिद नहीं है और इसे बनाने की अनुमति भी नहीं दी जाती, जबकि इसके लिए कई बार मांग उठ चुकी है।

मस्जिद न होना और शरणार्थियों पर रुख

स्लोवाकिया इस लिहाज से बेहद खास है कि वहां एक भी मस्जिद मौजूद नहीं है और न ही वहां की सरकार इसकी इजाजत देती है। यहां मुस्लिम शरणार्थियों को भी प्रवेश की अनुमति नहीं है। ऐसा नहीं है कि यहां मुस्लिम बिल्कुल नहीं रहते, बल्कि उनकी संख्या बहुत कम है। साल 2010 में स्लोवाकिया में मुस्लिमों की आबादी करीब 5000 के आसपास थी, जो देश की कुल आबादी का महज 0.1 फीसदी है।

स्लोवाकिया यूरोपीय यूनियन का सदस्य तो है, लेकिन यह इस संगठन में सबसे आखिर में शामिल होने वाले देशों में से एक है। मस्जिद को लेकर यहां विवाद भी होते रहे हैं। वर्ष 2000 में राजधानी में इस्लामिक सेंटर बनाने को लेकर खासा विवाद हुआ था। ब्रातिस्लावा के मेयर ने स्लोवाक इस्लामिक वक्फ फाउंडेशन के ऐसे किसी भी प्रस्ताव को ठुकरा दिया था। वर्ष 2015 में जब पूरे यूरोप के सामने शरणार्थियों का संकट एक बड़ा मुद्दा बना हुआ था, तब स्लोवाकिया ने 200 ईसाइयों को शरण दी, मगर मुस्लिमों को शरण देने से इनकार कर दिया।

कड़े नियम और खूबसूरत भूगोल

स्लोवाकिया का जन्म यूगोस्लाविया के विभाजन के बाद हुआ था। इस देश की गिनती दुनिया के सबसे खूबसूरत देशों में होती है। यहां के नियम बेहद सख्त हैं और हर किसी को उनका पालन करना पड़ता है। हर व्यक्ति को अपना पहचान पत्र साथ रखना अनिवार्य है। अगर आप घूमने के लिए यहां जाएं, तो हमेशा पासपोर्ट साथ रखना जरूरी होगा। दिन के समय किसी से झगड़ा करना, बुरा बर्ताव करना या हंगामा करना यहां अपराध माना जाता है।

इसकी राजधानी ब्रातिस्लावा दुनिया की इकलौती ऐसी राजधानी है, जो दो देशों ऑस्ट्रिया और हंगरी की सीमाओं से सटी हुई है। यूरोप की दूसरी सबसे लंबी नदी डेन्यूब स्लोवाकिया से होकर बहती है और यह कुल 10 देशों से गुजरती है। नील नदी के अलावा शायद ही कोई दूसरी नदी इतने देशों से होकर बहती हो। यह एक लैंडलॉक्ड देश है, यानी इसकी कोई भी सीमा किसी समुद्र से नहीं मिलती।

इस देश के 40 फीसदी से अधिक हिस्से पर जंगल फैले हुए हैं। यहां का टाट्रा पर्वत अपनी गहरी घाटियों, शंकुधारी वनों, चट्टानी चोटियों और अल्पाइन झीलों की वजह से दुनियाभर के पर्यटकों को अपनी ओर खींचता है।

दुनिया का सबसे बड़ा प्रति व्यक्ति कार उत्पादक

प्रति व्यक्ति कार उत्पादन के मामले में स्लोवाकिया को 'निराला' यानी असाधारण देश कहा जाता है। यह दुनिया का सबसे बड़ा प्रति व्यक्ति कार उत्पादक देश है। साल 2019 में यहां कुल 1.1 मिलियन कारों का निर्माण हुआ था, जो इसके कुल औद्योगिक उत्पादन का 43% है। महज 55 मिलियन की आबादी वाले इस छोटे यूरोपीय देश में फॉक्सवैगन, किआ, स्टेलांटिस और जैगुआर लैंड रोवर जैसी दुनिया की कई बड़ी ऑटोमोबाइल कंपनियों के बड़े प्लांट लगे हुए हैं।

शासन व्यवस्था और नागरिक सुविधाएं

स्लोवाकिया एक संसदीय गणतंत्र है। इसकी राष्ट्रीय परिषद में 150 सदस्य होते हैं, जिन्हें हर 4 साल में होने वाले आम चुनाव के जरिए चुना जाता है। राष्ट्रपति का चुनाव सीधे जनता द्वारा होता है, जबकि सरकार के मुखिया प्रधानमंत्री होते हैं।

यह देश अपने नागरिकों को मुफ्त स्वास्थ्य सेवा और शिक्षा उपलब्ध कराता है। यहां सबसे लंबी पेरेंटल लीव भी दी जाती है। नागरिक स्वतंत्रता, प्रेस की आजादी, इंटरनेट स्वतंत्रता और शांति जैसे मापदंडों पर भी यह देश बेहतर स्थिति में आंका जाता है।

समाज, परिवार और रहन-सहन

स्लोवाक समाज में परिवार का बहुत महत्व है, जहां आमतौर पर दादा-दादी, चाचा-ताऊ और भाई-बहन सब साथ मिलकर रहते हैं। गांवों में आज भी संयुक्त परिवारों की परंपरा कायम है। यहां ज्यादातर लोग रोमन कैथोलिक हैं। स्लोवाक लोग अपने निजी जीवन को अहमियत देते हैं। उन्हें नए लोगों से दोस्ती करने में समय लगता है, लेकिन एक बार भरोसा कायम हो जाए तो रिश्ते बेहद मजबूत बनते हैं। यहां का समाज अपेक्षाकृत समानता वाला है।

यहां के पारंपरिक भोजन में ब्रिंड्जोवे हालुस्की प्रमुख है, जो आलू डंपलिंग के साथ शीप चीज और बेकन से तैयार होती है और यही इस देश की नेशनल डिश है। इसके अलावा यहां सूप, स्मोक्ड मीट, आलू, गोभी और डेयरी उत्पादों का सेवन भी खूब होता है। छुट्टी के दिनों में लोग बीयर और प्लम ब्रांडी के साथ आनंद लेते हैं। यहां के शहरों में कैफे कल्चर खूब मजबूत है और पेस्ट्री व कॉफी का मजा लेना आम बात है।

कुल मिलाकर यह देश शांत और कम भीड़भाड़ वाला है। यहां अपराध दर कम है और सार्वजनिक परिवहन की व्यवस्था अच्छी है। स्लोवाक महिलाएं प्राकृतिक रूप से आकर्षक मानी जाती हैं। ये महिलाएं नौकरी भी करती हैं और परिवार को भी अहमियत देती हैं। ये दोस्ताना स्वभाव की होती हैं, हालांकि शुरुआत में थोड़ी रिजर्व नजर आ सकती हैं।

चेतन शुक्ला
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चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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