सरगुजा का अनोखा चमत्कार: क्या वाकई बढ़ रही है हनुमान जी की प्रतिमा, जानिए लमगांव मंदिर का रहस्य छत्तीसगढ़ एक घंटा पहले 2
छत्तीसगढ़ के सरगुजा में स्थित लमगांव हनुमान मंदिर अपनी एक अनोखी विशेषता के लिए चर्चा में है, जहां भक्तों का मानना है कि बजरंगबली की प्रतिमा का आकार समय के साथ लगातार बढ़ रहा है।

सरगुजा में आस्था का अद्भुत केंद्र

छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले के लुंड्रा क्षेत्र में स्थित लमगांव का हनुमान मंदिर इन दिनों श्रद्धालुओं के लिए गहरी आस्था और उत्सुकता का विषय बना हुआ है। नेशनल हाईवे के किनारे स्थित इस मंदिर को लेकर स्थानीय लोगों और दूर-दराज से आने वाले भक्तों के बीच एक बड़ी मान्यता प्रचलित है। माना जाता है कि यहां स्थापित बजरंगबली की प्रतिमा स्वयंभू है और समय बीतने के साथ-साथ इसका आकार भी बढ़ता जा रहा है। यही कारण है कि यह स्थान आज एक प्रमुख धार्मिक और चमत्कारी धाम के रूप में स्थापित हो चुका है, जहां बड़ी संख्या में भक्त अपनी मनोकामनाएं लेकर पहुंचते हैं।

पीपल के पेड़ के नीचे से विशाल धाम तक का सफर

मंदिर से जुड़ी मान्यताओं के अनुसार, सदियों पुराने इस स्थल पर शुरुआत में हनुमान जी की एक बहुत ही छोटी प्रतिमा थी, जो एक पीपल के पेड़ के नीचे विराजमान थी। स्थानीय निवासियों का कहना है कि जैसे-जैसे समय बीतता गया, इस मूर्ति का आकार बढ़ता गया। आज यह स्थान न केवल भक्तों की आस्था का केंद्र है, बल्कि एक भव्य मंदिर के रूप में भी विकसित हो गया है। श्रद्धालु इसे पूरी तरह से एक दैवीय चमत्कार मानते हैं और हर रोज यहां पूजा-अर्चना करने के लिए भक्तों का तांता लगा रहता है। लोगों का अटूट विश्वास है कि यहाँ सच्चे मन से मांगी गई हर मुराद हनुमान जी अवश्य पूरी करते हैं।

वर्ष 1983 की यादें और प्रत्यक्ष दर्शन

इस मंदिर के इतिहास और उसके चमत्कारी स्वरूप के बारे में ओम प्रकाश तिवारी ने अपनी स्मृतियों को साझा किया है। उन्होंने बताया कि उन्हें वर्ष 1983 में पहली बार लमगांव में हनुमान जी के प्रकट होने की जानकारी प्राप्त हुई थी। उस दौरान वे कोरिया जिले के सलका (मनेन्द्रगढ़) में निवासरत थे। सूचना मिलते ही वे लमगांव पहुंचे, जहां उन्होंने पीपल के वृक्ष के नीचे विराजित हनुमान जी के दर्शन किए। उस समय वहां एक मौनी बाबा पूजा-पाठ का कार्य संभाल रहे थे। ओम प्रकाश तिवारी के अनुसार, तब से उनका इस मंदिर से गहरा नाता जुड़ गया है और जब भी उन्हें अवसर मिलता है, वे दर्शन के लिए यहां जरूर आते हैं।

बढ़ती आस्था और नई पीढ़ी का जुड़ाव

तिवारी जी ने बताया कि जब उन्होंने पहली बार हनुमान जी के दर्शन किए थे, तब प्रतिमा का आकार काफी छोटा था, लेकिन आज यह एक विशाल प्रतिमा का रूप ले चुकी है। जैसे-जैसे लोगों का विश्वास बढ़ा, वैसे-वैसे इस धाम की ख्याति भी दूर-दूर तक फैलती गई। आज यह स्थान एक बड़े धार्मिक केंद्र के रूप में तब्दील हो चुका है। दिलचस्प बात यह है कि इस मंदिर के प्रति न केवल पुरानी पीढ़ी समर्पित है, बल्कि अब नई पीढ़ी भी इससे पूरी तरह जुड़ गई है। ओम प्रकाश तिवारी ने बताया कि अब उनके परिवार के नाती, भांजे और बच्चे भी नियमित रूप से इस धाम में दर्शन करने आते हैं। उनका मानना है कि आने वाले भविष्य में भी श्रद्धालुओं की श्रद्धा और इस स्थान के प्रति लोगों का विश्वास निरंतर बढ़ता ही जाएगा।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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