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एक घंटा पहले
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विचारों
बघेलखंड के देसी जायके का जादू
बघेलखंड के पारंपरिक व्यंजनों की बात ही कुछ और है। यहां के लोग साधारण अनाजों और घर में उपलब्ध सामान्य सामग्री से भी ऐसे शानदार पकवान तैयार कर लेते हैं, जिनका स्वाद बरसों तक जेहन में बसा रहता है। इन्हीं में से एक बेहद खास व्यंजन है मक्के की मीठी दलिया। यह न केवल स्वाद से भरपूर है बल्कि इसे तैयार करने में केवल 10 मिनट का समय लगता है। अगर आप सुबह के नाश्ते में या फिर शाम के समय कुछ ऐसा खाना चाहते हैं जो हल्का हो और देसी स्वाद का अहसास कराए, तो मक्के की यह दलिया एक बेहतरीन विकल्प है।
साधारण सामग्री, असाधारण स्वाद
इस व्यंजन की सबसे बड़ी खूबी यह है कि इसे बनाने के लिए आपको बहुत ज्यादा तामझाम या बाजार से महंगी सामग्री लाने की आवश्यकता नहीं होती है। यह रेसिपी पूरी तरह से घर में मिलने वाली चीजों पर आधारित है। मक्का, गुड़ और शुद्ध देसी घी—बस इन्हीं चंद चीजों से आप रसोई में कमाल का स्वाद तैयार कर सकते हैं। सतना की रहने वाली अंजलि चतुर्वेदी बताती हैं कि यदि इस दलिया को सही विधि से पकाया जाए, तो इसका जायका इतना लाजवाब होता है कि घर के सभी सदस्य बार-बार इसकी फरमाइश करते हैं।
मक्के को तैयार करने का सही तरीका
दलिया बनाने की प्रक्रिया में सबसे पहला चरण मक्के का चुनाव और उसकी तैयारी है। सबसे पहले मक्के के दानों को लेकर उन्हें दरदरा पीस लें। ध्यान रखें कि मक्के को बिल्कुल बारीक आटे की तरह नहीं पीसना है। इसमें छोटे-छोटे दाने और टुकड़े बने रहने चाहिए, क्योंकि यही बनावट दलिया के असली स्वाद को बढ़ाती है। अगर आपके पास घर में पहले से कुटी हुई मक्के की दलिया मौजूद है, तो आप उसका भी उपयोग कर सकते हैं। पिसे हुए मक्के को अच्छी तरह साफ कर लें ताकि उसे भूनते समय कोई परेशानी न हो।
घी में धीमी आंच पर भुनाई का महत्व
अब एक कड़ाही लें और उसमें पर्याप्त मात्रा में देसी घी गरम करें। घी पिघलने के बाद तैयार की हुई मक्के की दलिया को इसमें डालें। इस बात का विशेष ध्यान रखें कि दलिया को तेज आंच पर न भूनें, बल्कि धीमी आंच पर लगातार चलाते रहें। धीरे-धीरे मक्के की सोंधी खुशबू आने लगेगी और उसका रंग हल्का बदलने लगेगा। धीमी आंच पर भूनने का सबसे बड़ा फायदा यह है कि दलिया अंदर तक अच्छी तरह पकती है। ध्यान रहे कि दलिया कच्ची न रहे और साथ ही यह बहुत ज्यादा गहरे रंग की न हो जाए, वरना उसका स्वाद बिगड़ सकता है।
गुड़ का पाक और घोल तैयार करना
दलिया भूनते समय दूसरी तरफ एक अलग बर्तन में पानी गर्म होने के लिए रखें। इसमें गुड़ के छोटे-छोटे टुकड़े डाल दें। इसे करीब 5 से 7 मिनट तक पकने दें ताकि गुड़ पानी में पूरी तरह घुल जाए। यदि आपको गुड़ में अशुद्धियां या कचरा नजर आता है, तो इसे छान लेना ही बेहतर रहता है। जब गुड़ का मीठा पानी पूरी तरह तैयार हो जाए, तो इसे भुनी हुई मक्के की दलिया में मिला दें।
लगातार चलाते हुए पकाने की तकनीक
मक्के की दलिया में गुड़ का पानी डालने के बाद इसे धीमी से मध्यम आंच पर लगातार चलाते रहें। लगातार चलाने का मुख्य उद्देश्य यह है कि दलिया कड़ाही की तली में चिपके नहीं और उसमें गांठें न बनें। धीरे-धीरे मक्का पानी को सोख लेगा और मिश्रण गाढ़ा होने लगेगा। जब मक्के की दलिया पूरी तरह नरम हो जाए और एक सही गाढ़ापन आ जाए, तो आप अपनी पसंद और मिठास के अनुसार थोड़ा और गुड़ ऊपर से डाल सकते हैं। इसके बाद इसे कुछ देर और पकाएं ताकि गुड़ का मीठापन मक्के के हर दाने में अच्छी तरह समा जाए।
इलायची और मेवों से बढ़ाएं स्वाद
अगर आप इस देसी व्यंजन को और भी शाही या खास बनाना चाहते हैं, तो इसमें कूटकर इलायची मिला सकते हैं। इसके अलावा बारीक कटा हुआ नारियल या अपनी पसंद के अन्य मेवे (ड्राई फ्रूट्स) डालने से भी इसका स्वाद कई गुना बढ़ जाता है। हालांकि, बघेलखंडी परंपरा के अनुसार गुड़ और देसी घी का मेल ही इसे खास बनाने के लिए पर्याप्त है।
नाश्ते और शाम के खाने के लिए बेहतरीन
मक्के की यह मीठी दलिया तैयार होने के बाद इसे गरमागरम परोसें। इसकी सोंधी खुशबू और गुड़ की प्राकृतिक मिठास इसे एक अलग पहचान देती है। यह व्यंजन केवल एक भोजन नहीं, बल्कि आपके देसी खानपान और यादों से जुड़ा एक अनुभव है। आप इसे सुबह के पौष्टिक नाश्ते के रूप में लें या फिर शाम की हल्की भूख मिटाने के लिए बनाएं, यह हर बार लोगों का दिल जीत लेगी। इसकी विधि इतनी सरल है कि आप जरूरत के हिसाब से गुड़, इलायची या मेवों की मात्रा को कम या ज्यादा कर सकते हैं।
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