हॉर्मुज जलडमरूमध्य के विकल्प तलाश रहे सऊदी अरब और यूएई, इंजीनियर्स इंडिया लिमिटेड के साथ 1 अरब डॉलर के प्रोजेक्ट पर चर्चा व्यापार एक दिन पहले 17
सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात हॉर्मुज जलडमरूमध्य पर अपनी निर्भरता कम करने के लिए वैकल्पिक ऊर्जा मार्ग विकसित करने की योजना बना रहे हैं, जिसमें इंजीनियर्स इंडिया लिमिटेड एक प्रमुख भागीदार बन सकती है।

ऊर्जा आपूर्ति के लिए नए विकल्पों की तलाश

भारत की सार्वजनिक क्षेत्र की दिग्गज कंपनी इंजीनियर्स इंडिया लिमिटेड यानी EIL इस समय खाड़ी देशों के साथ मिलकर तेल और गैस के बुनियादी ढांचों को मजबूत करने की दिशा में काम कर रही है। कंपनी सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात के साथ शुरुआती दौर की चर्चा में जुटी है। इस पहल का मुख्य मकसद स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज पर इन देशों की निर्भरता को घटाना है। ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे भू-राजनीतिक तनाव ने हॉर्मुज जलडमरूमध्य के माध्यम से होने वाली आवाजाही को बेहद संवेदनशील बना दिया है, जिससे इन देशों को अब वैकल्पिक रास्तों की सख्त जरूरत महसूस हो रही है।

1 अरब डॉलर का निवेश और बुनियादी ढांचा विकास

इंजीनियर्स इंडिया लिमिटेड के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर अतुल गुप्ता ने कंपनी की वार्षिक आम बैठक यानी AGM के बाद जानकारी दी कि सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात अपने कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजार तक सुरक्षित पहुंचाने के लिए एक बड़ा कदम उठा रहे हैं। वे इस उद्देश्य के लिए लगभग 1 अरब डॉलर का निवेश करने की योजना पर विचार कर रहे हैं। इस निवेश के जरिए तेल टर्मिनल, पाइपलाइन नेटवर्क और बड़े पैमाने पर स्टोरेज की सुविधाएं विकसित की जाएंगी ताकि ऊर्जा निर्यात निर्बाध बना रहे।

ईरान-अमेरिका तनाव का असर

अतुल गुप्ता ने स्पष्ट किया कि वर्तमान में ये देश पूरी तरह से योजना बनाने के चरण में हैं और EIL भी उनके साथ इसी शुरुआती स्तर पर परामर्श कर रही है। कंपनी इन महत्वाकांक्षी परियोजनाओं के लिए परियोजना परामर्श और व्यवहार्यता अध्ययन से संबंधित अनुबंध हासिल करने का प्रयास कर रही है। हॉर्मुज का रास्ता दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा परिवहन मार्गों में से एक है, लेकिन क्षेत्रीय संघर्षों के कारण यहां जहाजों की आवाजाही पर लगातार खतरा बना रहता है। संभावित बाधाओं के मद्देनजर ये देश अब निर्यात के लिए नए और सुरक्षित बुनियादी ढांचे को प्राथमिकता दे रहे हैं।

अंतरराष्ट्रीय कारोबार और नए अवसरों की उम्मीद

अतुल गुप्ता ने स्वीकार किया कि पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव के चलते वहां से नए ठेके मिलने की प्रक्रिया में हालिया समय में कुछ सुस्ती देखी गई है। हालांकि, उन्हें पूरी उम्मीद है कि चालू वित्त वर्ष की तीसरी और चौथी तिमाही में इन अनुबंधों की गति में तेजी आएगी। उन्होंने कहा कि मौजूदा वैश्विक हालात कंपनी के लिए चुनौतियों के साथ-साथ नए द्वार भी खोल रहे हैं। पश्चिम एशिया में ऑर्डर की स्थिति पर नजर रखना कंपनी के लिए इसलिए भी अहम है क्योंकि ईआईएल के विकास में विदेशी व्यापार का योगदान लगातार बढ़ता जा रहा है।

इंजीनियर्स इंडिया का विदेशी बाजार में दबदबा

इंजीनियर्स इंडिया की कुल ऑर्डर बुक में वर्तमान में विदेशी परियोजनाओं की भागीदारी 43 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है। वित्तीय वर्ष 2025-26 के आंकड़ों पर गौर करें तो कंपनी को प्राप्त कुल नए बिजनेस में अंतरराष्ट्रीय परामर्श सेवाओं का हिस्सा करीब 4,929 करोड़ रुपये रहा, जो कुल नए ऑर्डर्स का लगभग 62 प्रतिशत है। खाड़ी क्षेत्र में EIL की जड़ें काफी गहरी हैं और कंपनी सऊदी अरब, बहरीन, कुवैत और संयुक्त अरब अमीरात में विभिन्न व्यावसायिक गतिविधियों में सक्रिय रूप से शामिल है। अपनी मौजूदगी को और सशक्त बनाने के लिए कंपनी ने सऊदी अरब में अपना कार्यालय भी स्थापित किया है।

राजीव खन्ना पाबना के व्यापार संवाददाता हैं और कंपनियों, बाजार तथा अर्थव्यवस्था की खबरों को सरल भाषा में समझाते हैं। कारोबार जगत के बड़े फैसलों, नीतिगत बदलावों और उनके आम आदमी पर असर को वे गहराई से कवर करते हैं। उनका मकसद जटिल आर्थिक खबरों को हर पाठक के लिए आसान बनाना है।

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