क्रांतिकारियों में जोश भरने वाला खंडकाव्य 'पथिक', जानिए पंडित रामनरेश त्रिपाठी का सुल्तानपुर से नाता उत्तर प्रदेश एक महीने पहले 20
पंडित रामनरेश त्रिपाठी की रचना 'पथिक' ने आजादी की लड़ाई में क्रांतिकारियों के भीतर अदम्य उत्साह भरा। इस महान साहित्यकार का जन्म सुल्तानपुर जिले के कोइरीपुर गांव में हुआ था।

भारत की धरती पर लगभग 250 साल तक ब्रिटिश हुकूमत ने अपनी सत्ता चलाई। इस गुलामी की जंजीरों को तोड़ने और देश को स्वतंत्र कराने के लिए सैकड़ों लोगों ने अपने प्राणों की आहुति दी। हजारों लोग असहयोग आंदोलन और भारत छोड़ो आंदोलन में कूद पड़े। वहीं कुछ ऐसे भी रहे जिन्होंने अपनी कलम और साहित्य के बल पर जनमानस में अंग्रेजी शासन के खिलाफ चेतना की लौ जलाई। इन्हीं में से एक बड़ा नाम पंडित रामनरेश त्रिपाठी का है, जिनके खंडकाव्य 'पथिक' ने पूरे देश के क्रांतिकारियों में जोश की नई ऊर्जा भर दी।

'पथिक' ने दिलाई अमर पहचान

पंडित रामनरेश त्रिपाठी साहित्य जगत के बेताज बादशाह माने जाते हैं। ब्रिटिश भारत के दौर में उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों और क्रांतिकारियों के मन में जोश और हौसला जगाने का काम किया। उनकी सबसे महत्वपूर्ण रचना खंडकाव्य के रूप में सामने आई, जिसे 'पथिक' के नाम से जाना जाता है। इस कृति के जरिए उन्होंने भारतीय क्रांतिकारियों के भीतर ऐसा उत्साह भरा कि यह रचना हमेशा के लिए अमर हो गई।

आज से 126 साल पहले प्रकाशित हुए इस खंडकाव्य ने देशभर में क्रांति की भावना को धार दी। उल्लेखनीय है कि रामनरेश त्रिपाठी को ग्राम गीतों का संकलन करने वाले प्रथम कवि के रूप में भी पहचाना जाता है। उनका एक प्रबंध काव्य 'स्वप्न' है, जिसके लिए उन्हें हिंदुस्तान अकादमी का पुरस्कार मिला था। महात्मा गांधी के विचारों से वे गहराई से प्रभावित थे और इसी कारण उन्होंने गांधी जी पर भी रचनाएं लिखीं।

सुल्तानपुर से जन्म का गहरा संबंध

छायावाद युग से पूर्व के इस कवि का सुल्तानपुर से जन्म से ही नाता रहा है। उनका जन्म 4 मार्च 1889 को सुल्तानपुर जिले के कोइरीपुर गांव में एक ब्राह्मण परिवार में हुआ था। रामनरेश त्रिपाठी के पुत्र जयंत त्रिपाठी ने बताया कि उनके पिता रामदत्त त्रिपाठी भारतीय सेना में सूबेदार के पद पर कार्यरत थे। यही वजह रही कि बचपन से ही उनके मन में देशप्रेम और देशभक्ति का बीज पनपने लगा।

बचपन से ही देशभक्ति की भावना उनकी रगों में दौड़ रही थी। इसी कारण उन्होंने न केवल अपनी रचनाओं के माध्यम से लोगों के हृदय में राष्ट्रप्रेम और राष्ट्रभक्ति की भावना जगाई, बल्कि स्वयं भी स्वतंत्रता संग्राम में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। उस दौर में लोग तेजी से गांधी जी के विचारों से जुड़ रहे थे, और इन्हीं विचारों ने रामनरेश त्रिपाठी के मन में भी गहरी जगह बना ली। गांधी जी से प्रेरित होकर वे स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय रूप से शामिल हुए और अपनी साहित्यिक रचनाओं के जरिए आंदोलन को नई दिशा देते रहे।

चेतन तिवारी पाबना के उत्तर प्रदेश संवाददाता हैं और राज्य की राजनीति, प्रशासन तथा जमीनी मुद्दों को कवर करते हैं। लखनऊ में रहते हुए वे जिलों से लेकर विधानसभा तक की खबरें संतुलित रिपोर्टिंग के साथ पाठकों तक पहुंचाते हैं। आम लोगों के मुद्दों और स्थानीय घटनाओं पर उनका खास फोकस रहता है।

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